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0 निवेशकों को 8.4 लाख करोड़ का मुनाफा, ट्रम्प की हार से उछला बाजार
मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में धनतेरस से पहले दीवाली जैसी रौनक देखने को मिल रही। बेंचमार्क इंडेक्स लगातार छठे सेशन में बढ़त के साथ कारोबार कर रहे। सेंसेक्स और निफ्टी ढाई-ढाई फीसदी उछल गए हैं। तूफानी तेजी में फाइनेंशियल्स सर्विसेस सेक्टर्स सबसे आगे है। इससे निवेशकों को 8.4 लाख करोड़ का मुनाफा हुआ है। 

घरेलू बाजारों में जोश भरने वाले ट्रिगर्स में यूएस मिड टर्म इलेक्शन के नतीजे अहम है, क्योंकि नतीजों के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी की हार और डेमोक्रेटिक पार्टी की पकड़ सीनेट एवं हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स दोनों पर मजबूत हुई है। इसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार गिरावट देखने को मिल रही, क्योंकि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद है। दूसरी ओर, विदेशी निवेशकों की खरीदारी का भी बाजार को सहारा मिल रहा। तगड़ी खरीदारी के चलते बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। यह पहली 500 लाख करोड़ रुपए के पार निकल गया है। 

बाजार में रौनक, सेंसेक्स 2100 अंक उछला
बेंचमार्क इंडेक्स 5 नवंबर को सुबह बढ़त के साथ खुले। अच्छे ग्लोबल संकेतों के चलते दूसरे सेशन में खरीदारी और बढ़ी। सेंसेक्स 2100 अंकों से ज्यादा उछला। सेशन के दौरान इंडेक्स 79470 तक उछला। बता दें कि सेंसेक्स ने 1 दिसंबर 2025 को 86159 का स्तर छुआ था, जो रिकॉर्ड हाई भी है। वहीं, निफ्टी ने 5 जनवरी को 26358 का स्तर ऑल टाइम हाई छुआ था। निफ्टी गुरुवार के सेशन में 24579 तक उछला। इंडेक्स में शामिल 50 में से 38 शेयर बढ़त के साथ कारोबार कर रहे हैं। श्रीराम फाइनेंस और बजाज फाइनेंस 6-7 फीसदी तक की कमजोरी दर्ज की जा रही। वहीं, अपोलो हॉस्पिटल्स के शेयर 3 फीसदी से ज्यादा टूटकर टॉप लूजर हैं।  जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अनुकूल परिस्थितियां लगातार मजबूत हो रही हैं। ऐसे में शेयर बाजार में तेजी का सिलसिला आगे भी जारी रहने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि बाजार के लिए सबसे बड़ी पॉजिटिव बात ब्रेंट क्रूड की कीमतों में आई 10 फीसदी की भारी गिरावट है।

जोरदार तेजी, टूटा रिकॉर्ड
बाजार की तेजी में बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप पहली बार 500 लाख करोड़ रुपये के पार निकल गया। शुरुआती सेशन में यह 501.64 लाख करोड़ रुपये के ऊपर तक गया। जबकि पिछले सेशन में क्लोजिंग के बाद यह आंकड़ा 494.4 लाख करोड़ रुपये था। यानी बाजार की तेजी में करीब 8.40 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई। 

कच्चे तेल की कीमतें गिरीं, 2 महीने में सबसे कम
घरेलू बाजारों को सहारा देने का काम कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार गिरावट है। ब्रेंट क्रूड हफ्तेभर में करीब 16 फीसदी गिरकर 94 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया है। यह दो महीने का निचला स्तर भी है। केवल बीते सेशन में क्रूड के भाव करीब 9 फीसदी गिर गए थे। क्योंकि अमेरिका के मिड टर्म इलेक्शन में प्रेसिडेंट ट्रंप की पार्टी की हार से पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
विजयकुमार के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में यह गिरावट अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष जल्द खत्म होने की उम्मीद से आई है। इस संघर्ष और इसके कारण कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की बड़ी हार में अहम भूमिका निभाई है। ऐसे में अब दोनों देशों के बीच तनाव कम होने और समझौते की संभावना बढ़ गई है।

ग्लोबल मार्केट में तेजी, घरेलू बाजारों का सहारा
अमेरिकी शेयर बाजार बुधवार को बड़ी बढ़त के साथ बंद हुए थे। डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज में 3 फीसदी की तेजी आई। वहीं, एसएंडपी 500 इंडेक्स 1.58 फीसदी और नैस्डैक कंपोजिट 0.91 फीसदी चढ़ा। दरअसल, मिड टर्म इलेक्शन के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी की पकड़ सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स दोनों पर मजबूत हुई है। इसके चलते बाजारों में जोश देखने को मिला।