0 मिडटर्म में हार के बाद रिपब्लिकन पार्टी में फूट
वॉशिंगटन डीसी। अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में हार के बाद राष्ट्रपति ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी में मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। विदेश मंत्री मार्को रूबियो ट्रम्प का साथ छोड़ने पर विचार कर रहे हैं।
इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, रूबियो अपने भविष्य के विकल्पों पर चर्चा कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने इससे इनकार किया है। दूसरी ओर, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी ट्रम्प से दूरी बना रहे हैं। वेंस 2028 के राष्ट्रपति चुनाव की तैयारी में ट्रम्प से नाराज वोटरों को अपने साथ लाने की कोशिश कर रहे हैं।
ट्रम्प के रक्षा मंत्री पर इस्तीफे का दबाव
रिपब्लिकन पार्टी की हार के बाद रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ पर इस्तीफे का दबाव बढ़ रहा है। उन पर आरोप है कि उन्होंने ट्रम्प को ईरान पर हमले के लिए उकसाया, लेकिन युद्ध खत्म करने की कोई योजना नहीं बनाई थी। केंटकी से रिपब्लिकन सांसद थॉमस मैसी ने बुधवार को हेगसेथ से इस्तीफा मांगा। अगले हफ्ते प्रतिनिधि सभा में उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर वोटिंग भी हो सकती है। यह मामला ऐसे समय उठा है, जब मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेट्स ने संसद के दोनों सदनों में बहुमत हासिल किया है। चुनाव में ईरान जंग भी वोटरों की नाराजगी की बड़ी वजह रही।
रिपब्लिकन उम्मीदवार ने वोटों की दोबारा गिनती की मांग की
कंसास में रिपब्लिकन उम्मीदवार टाय मास्टरसन ने डेमोक्रेट उम्मीदवार सिंडी होल्शर से पीछे रहने के बाद वोटों की दोबारा गिनती की मांग की। उनका कहना था कि मुकाबला बेहद करीबी है, इसलिए हर वोट की सही गिनती होनी चाहिए। इसके बाद 5 नवंबर से चुनाव अधिकारियों ने कुछ सीटों पर मतपत्रों की हाथ से जांच शुरू की। यह राज्य के कानून के तहत होने वाला नियमित चुनावी ऑडिट है। इसका मतलब यह नहीं है कि चुनाव में किसी तरह की गड़बड़ी सामने आई है।
मिडटर्म चुनाव में ट्रम्प के वोट चोरी के दावे फेल
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 2025 में सत्ता में लौटने के बाद से ही चुनाव में धांधली के पुराने दावे फिर उठाने शुरू कर दिए थे। उनका कहना था कि डेमोक्रेट्स ने वोटिंग मशीनों में गड़बड़ी की और गैर-अमेरिकी नागरिकों ने अवैध तरीके से वोट डाले। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, ट्रम्प ने इन्हीं दावों के आधार पर इस साल के मिडटर्म चुनाव पर अपनी सरकार का कंट्रोल बढ़ाने की कोशिश की। लेकिन चुनाव में उनकी पार्टी को बड़ी हार का सामना करना पड़ा। डेमोक्रेट्स ने कई ऐसी सीटें भी जीत लीं, जहां दशकों से रिपब्लिकन पार्टी का कब्जा था। ऐसे नतीजों के बाद चुनाव में धांधली का दावा करना मुश्किल हो गया।
अलास्का में चुनावी गड़बड़ी की शिकायतें मिलीं
अमेरिकी न्याय विभाग (डीओजे) ने 4 नवंबर को सोशल मीडिया पर बताया कि उसे अलास्का में चुनाव से जुड़ी गड़बड़ी और वोटों में संभावित हेराफेरी की शिकायतें मिली हैं। विभाग ने कहा कि वह इन शिकायतों पर नजर रख रहा है और गंभीरता से लिए जाने वाले आरोपों की जांच कर रहा है। हालांकि, विभाग ने यह नहीं बताया कि ये शिकायतें किसने की हैं और उनमें किस तरह की गड़बड़ी का आरोप लगाया गया है। अभी तक विभाग ने चुनाव में गड़बड़ी की पुष्टि भी नहीं की है।
मिसिसिपी में कांटे की टक्कर, वोटों की जांच पर दोनों पार्टियों की नजरें
अमेरिका की दोनों प्रमुख पार्टियों के नेता, वकील और कार्यकर्ता मिसिसिपी पहुंच रहे हैं। यहां हजारों अस्थायी वोटों (प्रोविजनल बैलेट) की जांच होगी। दोनों पार्टियां नतीजों को कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी भी कर रही हैं। मिसिसिपी में डेमोक्रेट उम्मीदवार स्कॉट कोलम को रिपब्लिकन सीनेटर सिंडी हाइड-स्मिथ पर बेहद कम बढ़त मिली है। इस चुनाव का नतीजा तय करेगा कि अगले साल अमेरिकी सीनेट में डेमोक्रेट्स की कितनी सीटें होंगी। मिसिसिपी में करीब 40 साल से कोई डेमोक्रेट सीनेट नहीं पहुंचा है। दोनों उम्मीदवारों ने वोटों की जांच और जरूरत पड़ने पर कानूनी चुनौती देने के लिए टीमें तैनात की हैं। नतीजे घोषित करने की आखिरी तारीख 3 दिसंबर है।
मिस्र मूल के अल-सैयद की पत्नी का परिवार भारतीय मूल का है
अमेरिकी सीनेट के लिए चुने गए डेमोक्रेट अब्दुल अल-सैयद का भारतीय कनेक्शन चर्चा में है। इनके माता-पिता मिस्र मूल के। हालांकि अल-सैयद का जन्म अमेरिका में ही हुआ था। इसके अलावा अल-सैयद की पत्नी का परिवार कर्नाटक के भटकल से जुड़ा है। एक पुराने पॉडकास्ट में उन्होंने बताया कि शादी के 20 सालों में वे दक्षिण भारतीय परिवार और उसकी संस्कृति को करीब से समझ पाए हैं। मजाक में उन्होंने कहा था कि, मैं शायद अरब से ज्यादा भारतीय हूं। उन्होंने हंसते हुए यह भी कहा कि लोग अरबों से ज्यादा देसी लोगों को पसंद करते हैं।
ईरान पर फिर हमले की तैयारी में ट्रम्प, राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ बैठक की
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ईरान पर फिर से हमला करने पर विचार कर रहे हैं। गुरुवार को उन्होंने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ इस मुद्दे पर बैठक की थी। इसके बाद ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका जल्द फैसला करेगा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने के लिए उस पर और हमले किए जाएं या नहीं। उन्होंने कहा कि मैं नहीं चाहता कि ईरान का बाकी हिस्सा भी तबाह हो, लेकिन जरूरत पड़ी तो ऐसा करना पड़ सकता है। एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका तीन विकल्पों पर विचार कर रहा है। इनमें नए सैन्य हमले, आर्थिक प्रतिबंध जारी रखना और ईरान से बड़ी रियायतें लेकर समझौता करना शामिल है।