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0 एनसीएलटी ने एसबीआई की याचिका पर जारी किया आदेश
0 12,668 करोड़ के लोन डिफॉल्ट पर कार्रवाई

नई दिल्ली। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) की मुंबई बेंच ने वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज के पूर्व प्रमोटर और डायरेक्टर वेणुगोपाल नंदलाल धूत को बैंकरप्ट घोषित कर दिया है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए ट्रिब्यूनल ने यह आदेश जारी किया है।

यह कदम धूत की पर्सनल इनसोल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस और रीपेमेंट प्लान के असफल होने के बाद उठाया गया है। विनय गोयल और चरणजीत सिंह गुलाटी की बेंच ने इंसोल्वेंसी एंड बैंक्रप्सी कोड (आईबीसी) के तहत 5 नवंबर को यह बैंक्रप्सी आदेश पारित किया।

पर्सनल गारंटी और बकाए की डिटेल्स
एनसीएलटी ने नोट किया कि एसबीआई ने वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज लिमिटेड (वीआईएल) की बैंक से ली गई क्रेडिट सुविधाओं के लिए धूत के पर्सनल गारंटर होने के नाते उनके खिलाफ बैंक्रप्सी कार्यवाही शुरू की थी। धूत ने कंपनी को दी गई कई क्रेडिट सुविधाओं जैसे- रुपया टर्म लोन, वीडियोकॉन टेलीकम्युनिकेशंस लिमिटेड से जुड़ी सुविधाएं और वर्किंग कैपिटल लोन के लिए पर्सनल गारंटी दी थी। बैंक ने फरवरी 2018 में इन गारंटियों को इनवोक किया गया था। 

वीडियोकॉन का इनसोल्वेंसी बैकग्राउंड
वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज को जून 2018 में कॉर्पोरेट इनसोल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस में शामिल किया गया था। बाद में इस कार्यवाही को वीडियोकॉन ग्रुप की अन्य कंपनियों के साथ जोड़ दिया गया था। इसके बाद जून 2021 में एनसीएलटी ने ट्विन स्टार टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के जमा किए गए रिजॉल्यूशन प्लान को मंजूरी दी थी।

रीपेमेंट प्लान क्यों खारिज हुआ?
वेणुगोपाल धूत की पर्सनल इनसोल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस अप्रैल 2026 में शुरू की गई थी। हालांकि, उनका प्रस्तावित रीपेमेंट प्लान लेनदारों (क्रेडिटर्स) को मंजूर नहीं था। धूत ने सिलीगुड़ी में एक प्रस्तावित डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के जरिए 36 महीनों की अवधि में 600 करोड़ देने का रीपेमेंट प्रस्ताव रखा था।
ट्रिब्यूनल ने पाया कि यह प्रस्ताव भविष्य के विकास, मंजूरियों और कैश फ्लो पर निर्भर था और इसमें कोई शुरुआती पेमेंट शामिल नहीं था। इसके अलावा, रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने बताया कि यह रीपेमेंट प्लान आईबीसी के नियमों के अनुसार उनसे सलाह लेकर तैयार नहीं किया गया था।
इसके बाद क्रेडिटर्स ने पर्सनल इनसोल्वेंसी प्रोसेस को बंद करके बैंक्रप्सी प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया। इससे पहले 17 जुलाई को एनसीएलटी ने रीपेमेंट प्लान को खारिज करते हुए पर्सनल इनसोल्वेंसी प्रोसेस खत्म कर दी थी और क्रेडिटर्स व देनदार को IBC के नियमों के तहत बैंक्रप्सी कार्यवाही शुरू करने का अधिकार दिया था।