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0 दावा- बिहार में चुनाव हैं, इसलिए एसआईआर पहले हुआ
0 अन्य राज्यों में तारीख की घोषणा अलग से होगी
नई दिल्ली। बिहार में वोटर्स लिस्ट के स्पेशल इंटेसिव रिविजन (एसआईआर) यानी वोटर्स लिस्ट वेरिफिकेशन के बाद, अब चुनाव आयोग पूरे देश में एक साथ एसआईआर कराएगा। टीवी चैनल के हवाले से बताया कि एसआईआर की शुरुआत कब होगी, अभी तक इसकी आधिकारिक तारीख तय नहीं हुई है।

सूत्रों ने बताया कि बिहार में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, इसलिए चुनाव आयोग ने सबसे पहले बिहार में एसआईआर किया। देश के बाकी हिस्सों के लिए एसआईआर की तारीख का ऐलान अलग से जारी किया जाएगा। चुनाव आयोग ने इस साल 24 जून को अपने एक आदेश के जरिए पूरे देश में एसआईआर करने की घोषणा की थी।

चुनाव आयोग ने देशभर में एसआईआर की रूपरेखा पर चर्चा करने के लिए बुधवार को दिल्ली में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ मीटिंग की थी। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईओ) ज्ञानेश कुमार भी मौजूद थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बिहार के बाद, इस साल के अंत में असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में 2026 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले SIR शुरू हो सकती है। इसका मुख्य मकसद जन्म स्थान की जांच करके अवैध प्रवासियों को बाहर निकालना है।

इससे पहले, चुनाव आयोग ने मंगलवार को बिहार चुनाव आयोग को लेटर भेजकर मतदाताओं की पहचान के लिए आधार कार्ड को 12वें दस्तावेज के रूप में स्वीकार करने का निर्देश दिया। चुनाव आयोग का यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के 8 सितंबर के आदेश के बाद आया है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- आधार पहचान का प्रमाण, नागरिकता का नहीं
सुप्रीम कोर्ट में 8 सितंबर को बिहार में एसआईआर (वोटर वेरिफिकेशन) के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई हुई थी। कोर्ट ने कहा- आधार पहचान का प्रमाण पत्र है, नागरिकता का नहीं। कोर्ट ने चुनाव आयोग को वोटर की पहचान के लिए आधार को 12वें दस्तावेज के तौर पर मानने का भी आदेश दिया। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि आधार को लेकर अगर किसी तरह की शंका हो तो इसकी जांच कराएं। कोई भी नहीं चाहता कि अवैध प्रवासियों को मतदाता सूची में शामिल किया जाए।