0 विदेश मंत्री ने कहा-हमारी दोस्ती कोई और तय नहीं कर सकता, भारत-रूस संबंध सबसे मजबूत
नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के दौरे का असर भारत-अमेरिका के रिश्तों पर नहीं पड़ेगा। जयशंकर ने एचटी लीडरशिप समिट 2025 में यह बातें कही।
विदेश मंत्री ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते बातचीत पर इसका असर पड़ने की अफवाहों को भी खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि भारत किस से दोस्ती करे या न करे यह भारत के अलावा कोई और तय नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि सभी को पता है कि भारत का दुनिया के हर बड़े देश से संबंध है। किसी भी देश के लिए यह उम्मीद करना कि भारत अपने अन्य देशों से रिश्ते कैसे बनाएगा, इस पर उसकी राय मानी जाएगी, यह उचित नहीं है। अगर हमने ऐसा किया तो दूसरे देश भी हमसे यही उम्मीद करेंगे।
अमेरिका के साथ हो रहे व्यापार समझौते पर विदेश मंत्री ने कहा कि भारत अपने किसानों, मजदूरों, छोटे व्यापारियों और मध्यम वर्ग के हितों की पूरी रक्षा करेगा। वहीं, जयशंकर ने भारत-रूस संबंध को दुनिया के सबसे मजबूत रिश्तों में से एक बताया।
भारत-अमेरिका व्यापार बातचीत 10 दिसंबर को शुरू हो सकती है
भारत-अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) की बातचीत जारी है। न्यूज एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से बताया कि समझौते पर बातचीत 10 दिसंबर को शुरू होगी। वर्तमान में दोनों देशों के बीच सालाना व्यापार लगभग 191 अरब डॉलर है, जिसे 2030 तक 500 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस साल की शुरुआत में अमेरिका यात्रा के दौरान इस व्यापार समझौते की घोषणा हुई थी और तब से दोनों पक्ष लगातार बातचीत कर रहे हैं। ट्रम्प ने भारत पर 25 अतिरिक्त टैरिफ लगा रखा है। अमेरिका ने इसके पीछे की वजह भारत का रूसी तेल खरीदना बताया था।
भारत-रूस का रिश्ता हमेशा विश्वसनीय रहा
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत-रूस संबंधों को दुनिया के सबसे स्थिर, मजबूत और बड़े रिश्तों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दो दिवसीय भारत यात्रा का मकसद दोनों देशों के बीच के असंतुलन को दूर करना था। पुतिन की यात्रा ने पिछड़े क्षेत्रों, विशेष रूप से आर्थिक सहयोग में साझेदारी को नए तरीके से पेश किया है।' जयशंकर ने कहा कि रूस का चीन, अमेरिका और यूरोप के साथ रिश्ता कई बार ऊपर-नीचे हुआ, लेकिन भारत के साथ यह रिश्ता हमेशा स्थिर और विश्वसनीय रहा।
रक्षा, ऊर्जा के क्षेत्र में भारत-रूस संबंध मजबूत रहे
जयशंकर ने कहा कि किसी भी लंबे रिश्ते में कुछ क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ते हैं और कुछ पीछे रह जाते हैं। भारत-रूस संबंध में रक्षा, ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्र हमेशा से बहुत मजबूत रहे, लेकिन व्यापार और आर्थिक सहयोग उतना नहीं बढ़ पाया था। उन्होंने कहा कि इसके उलट, अमेरिका और यूरोप के साथ भारत का आर्थिक रिश्ता 80, 90 और 2000 के दशक में तेजी से बढ़ा, पर रक्षा और सुरक्षा सहयोग में उतनी प्रगति नहीं हुई।
मित्र चुनने की आजादी ही विदेश नीति है
विदेश मंत्री ने भारत की विदेश नीति पर भी बात की। उन्होंने कहा कि हमारे जैसे बड़े और उभरते देश के लिए, जिससे और बेहतर करने की अपेक्षा की जाती है। उन्होंने आगे कहा कि यह जरूरी है कि हमारे खास रिश्ते अच्छी स्थिति में हो। हम महत्वपूर्ण देशों के साथ सहयोग बनाए रख सकें और हमें अपने हित के अनुसार मित्र चुनने की आजादी हो। यहीं हमारी विदेश नीति है।
पुतिन की यात्रा का मकसद पश्चिमी देशों को मैसेज भेजना नहीं
रूसी राष्ट्रपति की यात्रा का मकसद पश्चिमी देशों को मैसेज भेजना था। इस सवाल पर जयशंकर ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि सवाल यह है कि आप उन देशों से क्या कहते हैं। सवाल यह है कि आप भारत और रूस के लिए क्या करते हैं। विदेश मंत्री ने साफ किया कि पुतिन की यात्रा पश्चिमी देशों को संदेश देने के लिए नहीं था।
23वें भारत-रूस समिट के आए थे पुतिन
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4 दिसंबर को 23वें भारत-रूस समिट के लिए दो दिन के भारत दौरे पर आए थे। इससे पहले पुतिन 2021 में भारत आए थे। उन्हें रिसीव करने के लिए पीएम मोदी प्रोटोकॉल तोड़कर खुद पालम एयरपोर्ट गए। मोदी ने एयरपोर्ट पर पुतिन को गले लगाकर स्वागत किया। इसके बाद दोनों नेता पुतिन की लग्जरी कार ऑरस सीनेट छोड़कर सफेद रंग की टोयोटा फॉर्च्यूनर से पीएम आवास पहुंचे। यात्रा के अंत में रूसी राष्ट्रपति के सम्मान में प्राइवेट डिनर दिया गया।