0 मार्च 2026 तक 50 हजार मकान किए जाएंगे स्वीकृत
0 डिप्टी सीएम अरुण साव ने गिनाई नगरीय प्रशासन विभाग के दो सालों की उपलब्धियां गिनाईं
रायपुर। उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव ने सोमवार को नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद ऑडिटोरियम में आयोजित प्रेस-कॉन्फ्रेंस में पिछले दो वर्षों में हुए नगरीय प्रशासन विभाग के कार्यों और आगामी कार्ययोजनाओं की जानकारी दी। साव ने कहा, राज्य में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के द्वितीय चरण प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 के अंतर्गत सभी शहरों में डोर-टू-डोर सर्वेक्षण कार्य प्रगति पर है। योजना अंतर्गत कुल 1.32 लाख आवास निर्माण का लक्ष्य है, जिसमें बीएलसी अंतर्गत एक लाख, एएचएपी अंतर्गत 27 हजार एवं 5 हजार रेंटल हाउसिंग सम्मिलित है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत राज्य में अद्यतन 24,188 आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें 10 आवास पूरे हो गए हैं एवं 5,351 आवासों का निर्माण प्रगतिरत है। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 के अंतर्गत मार्च-2026 तक 50 हजार मकान स्वीकृत किए जाएंगे। नगरीय निकायों को आवास निर्माण के लिए अद्यतन 129 करोड़ 6 लाख रुपए जारी किए गए हैं।
अरुण साव ने कहा कि 74वें संविधान संशोधन के तहत भारतीय संविधान की अनुसूची 12 में नगरीय निकाय का प्रावधान किया गया है। यह प्रावधान संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के तहत 1 जून 1993 से संपूर्ण भारत में लागू है। राज्य में कुल 193 अधिसूचित नगरीय निकाय हैं, जिनमें 14 नगर निगम, 56 नगर पालिका और 123 नगर पंचायत शामिल हैं।
उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि वर्ष-2011 की जनगणना के अनुसार राज्य की शहरी आबादी 57.07 लाख है। यह राज्य की कुल जनसंख्या का 23.24 प्रतिशत है। वर्ष 2025 में यह बढ़कर लगभग 78.10 लाख हो चुकी है। राज्य में नगर निगमों के लिए छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 एवं नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के लिए छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम 1961 लागू है। एक लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों में नगर निगम, 20 हजार से एक लाख तक की जनसंख्या वाले शहरों में नगर पालिका और पांच हजार से 20 हजार तक की जनसंख्या वाले शहरों में नगर पंचायत के गठन का प्रावधान है।
राज्य में कुल 193 अधिसूचित नगरीय निकाय
श्री साव ने कहा कि राज्य में कुल 193 अधिसूचित नगरीय निकाय हैं, जिनमें 14 नगर निगम, 56 नगर पालिका और 123 नगर पंचायत शामिल हैं। वर्ष-2011 की जनगणना के अनुसार राज्य की शहरी आबादी 57.07 लाख है। यह राज्य की कुल जनसंख्या का 23.24 प्रतिशत है। वर्ष 2025 में यह बढ़कर लगभग 78.10 लाख हो चुकी है । राज्य में नगर निगमों के लिए छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 तथा नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के लिए छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम, 1961 लागू है। एक लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों में नगर निगम, 20 हजार से एक लाख तक की जनसंख्या वाले शहरों में नगर पालिका तथा पांच हजार से 20 हजार तक की जनसंख्या वाले शहरों में नगर पंचायत के गठन का प्रावधान है।
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0
श्री साव ने कहा कि राज्य में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के द्वितीय चरण प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 के अंतर्गत सभी शहरों में डोर-टू-डोर सर्वेक्षण कार्य प्रगति पर है। योजनांतर्गत कुल 1.32 लाख आवास निर्माण का लक्ष्य है, जिसमें बीएलसी अंतर्गत 1.00 लाख, एएचएपी अंतर्गत 27 हजार एवं 5 हजार रेंटल हाउसिंग सम्मिलित है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत राज्य में अद्यतन 24,188 आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें 10 आवास पूर्ण एवं 5,351 आवासों का निर्माण प्रगतिरत् है। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 के अंतर्गत मार्च-2026 तक 50 हजार मकान स्वीकृत किए जाएंगे।
नगरीय निकायों को आवास निर्माण के लिए अद्यतन 129 करोड़ 6 लाख रुपए जारी किए गए हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के हितग्राही द्वारा स्वयं आवास निर्माण (बीएलसी) अंतर्गत कुल स्वीजकृत 206118 आवासों मे से नवंबर-23 की स्थिति में कुल 1,30,548 आवास पूर्ण एवं दिसम्बर-25 की स्थिति में कुल 1,89,547 आवास पूर्ण, विगत 2 वर्ष में 58,999 आवास पूर्ण। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) भागीदारी में किफायती आवास निर्माण (एएचपी) अंतर्गत कुल स्वीककृत 37143 आवासों मे से नवंबर-23 की स्थिति में कुल 16185 आवास पूर्ण एवं दिसम्बर-25 की स्थिति में कुल 27475 आवास पूर्ण, विगत 2 वर्ष में 11290 आवास पूर्ण।
आगामी 3 वर्ष की कार्य योजना
श्री साव ने बताया कि शहरी क्षेत्रों में निवासरत् शत-प्रतिशत पात्र आवासहीन परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना – शहरी 2.0 के तहत हितग्राही के रूप में चिन्हांकित कर पक्का आवास उपलब्ध कराया जाना सुनिश्चित किया जावेगा।
स्वच्छ भारत मिशन (शहरी)
स्वच्छ भारत मिशन अंतर्गत छत्तीसगढ़ ने शहरी स्वच्छता एवं आजीविका को महिला सशक्तिकरण से जोड़कर एक अभिनव पहल करते हुए 9000 से अधिक स्वच्छता दीदियों को शहरी स्वच्छता की जिम्मेदारी दी है। स्वच्छता दीदियां निकायों में 2600 ट्राईसायकल तथा 1300 ई-रिक्शा के माध्यम से डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण कर 379 एसएलआरएम सेंटर्स तथा 173 कम्पोस्ट शेड में कचरे का निपटान सफलतापूर्वक कर रही हैं। प्रदेश में 1793 सार्वजनिक सह सामुदायिक शौचालयों का निर्माण किया गया है।
स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0
श्री साव ने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 अन्तर्गत 78 नगरीय निकायों में कुल 141 आकांक्षीय शौचालयों के निर्माण हेतु 46 करोड़ 59 लाख रुपए की परियोजनाएँ स्वीकृत हैं। वर्तमान सरकार द्वारा विगत 2 वर्षों में 127 शौचालयों का निर्माण कार्य प्रारंभ करते हुए 26 शौचालयों का निर्माण कार्य पूर्ण किया गया है। आकांक्षीय शौचालय निर्माण (स्वीकृत कार्ययोजना) स्वीकृत एक्शन प्लान अन्तर्गत 78 नगरीय निकायों में 141 आकांक्षीय शौचालयों के निर्माण हेतु राशि रू.28.06 करोड़ स्वीकृत। विगत 2 वर्षों में 73 नगरीय निकायों में एसटीपी निर्माण (इंटरसेप्शन एवं डायवर्सन ड्रेन सहित) हेतु 325 करोड़ 17 लाख रुपए की स्वीकृति निकायों को जारी की गई है। 58 नगरीय निकायों हेतु निविदा जारी करते हुए 5 परियोजनाओं हेतु कार्यादेश प्रदान किया गया है। शेष कार्यों हेतु शीघ्र ही निविदा कार्यवाही पूर्ण करते हुए कार्य प्रारंभ किया जाएगा। विगत 2 वर्षों में 83 नगरीय निकायों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए एमआरएफ तथा कंपोस्ट संयंत्र स्थापित किए जाने की परियोजनाओं हेतु 226 करोड़ 04 लाख रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है, जिसमें से 83 नगरीय निकायों हेतु निविदा जारी की जा चुकी है । शीघ्र ही निविदा कार्यवाही पूर्ण करते हुए कार्य प्रारंभ किया जाएगा । विभाग द्वारा भारत सरकार से लगातार समन्वय स्थापित करते हुए प्रदेश के 186 नगरीय निकायों हेतु बहुप्रतीक्षित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन हेतु राशि रू.230.48 करोड़ की कार्य-योजना स्वीकृत करायी गई। राज्य के 142 नगरीय निकायों में लगभग 1400 सार्वजनिक/सामुदायिक शौचालयों के मरम्मत/उन्नयन हेतु 42 करोड़ 56 लाख रुपए की स्वीकृति प्रदान की गई है। वर्तमान में समस्त शौचालयों का मरम्मत/उन्नयन कार्य प्रगतिरत् है। सतत् (सस्टेनेबल अल्टरनेटिव टूवर्ड्स एफोर्डेबल ट्रांसपोर्टेशन) परियोजना अंतर्गत प्रदेश के 8 नगरीय निकायों में घरेलू जैविक अपशिष्ट तथा कृषि उपज अपशिष्ट के प्रसंस्करण हेतु बायो सीएनजी प्लांट स्थापना हेतु एमओयू हस्ताक्षर किए गए है। इस उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा नगरीय निकायों को ऑयल तथा गैस मैन्यूफैक्चरिंग कंपनीज को 1 रुपया प्रति वर्गमीटर की रियायती दर पर शासकीय भूमि उपलब्ध कराने की स्वीकृति प्रदान की गई है। अद्यतन 8 निकायों में से 6 निकायों द्वारा बायो सीएनजी प्लांट की स्थापना हेतु भूमि का चिन्हांकन किया जा चुका है।
जिला स्तरीय सैनिटरी लैंडफिल साइट
श्री साव ने कहा कि एनजीटी के निर्देशानुसार राज्य के सभी निकायों को सैनिटरी लैंडफिल (एसएलएफ) स्थापित करना अनिवार्य है। निकायों के पास भूमि की उपलब्धता तथा वित्तीय संसाधनों की कमी को दृष्टव्य रखते हुए एसएलएफ को क्लस्टर आधार पर विकसित किया जा रहा है। इसके लिए निकायों को 33 क्लस्टर में बांटा गया है। राज्य के 33 जिलों में नगरीय निकायों से उत्पादित इनर्ट वेस्ट के प्रसंस्करण हेतु जिला स्तर पर रिजनल एसएलएफ के निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इस हेतु 27 जिलों में भूमि चिन्हांकित की गई है एवं शेष 6 जिलों में भूमि चिन्हांकन प्रगतिरत् । इसके अतिरिक्त 8 नगरीय निकायों में प्रचलित लेगेसी वेस्ट डंप साईट रेमेडिएशन अंतर्गत 5 निकायों में रेमेडिएशन का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। शेष 03 निकायों में दिसम्बर 2025 तक कार्य पूर्णता का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
स्वच्छ सर्वेक्षण-2024-25
0 केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में 20 हजार से कम आबादी वाले शहरों में बिल्हा को देशभर में प्रथम स्थान मिला है।
0 तीन लाख से दस लाख जनसंख्या वाले शहरों में बिलासपुर को पूरे देश में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है।
0 20 हजार से 50 हजार आबादी वाले शहरों में कुम्हारी देश का तीसरा सबसे स्वच्छ शहर है।
0 स्वच्छ सर्वेक्षण में पहली बार शामिल नई श्रेणी 'स्वच्छता सुपर लीग' (एसएसएल) में अंबिकापुर, पाटन और विश्रामपुर ने जगह बनाई है।
0 यह सम्मान उन शहरों को दिया गया, जो पिछले तीन वर्षों में कम से कम एक बार शीर्ष तीन में रहे हैं और वर्तमान वर्ष में शीर्ष 20 प्रतिशत शहरों में शामिल हैं।
0 अंबिकापुर ने 50 हजार से तीन लाख जनसंख्या श्रेणी में तथा पाटन और विश्रामपुर ने 20 हजार से कम आबादी वाले शहरों की श्रेणी में एसएसएल में अपना स्थान सुनिश्चित किया है।
0 स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में रायपुर को छत्तीसगढ़ का 'प्रॉमिसिंग (Promising) स्वच्छ शहर' का पुरस्कार मिला है।
0 गार्बेज फ्री सिटीज स्टार रेटिंग में रायपुर को 7-स्टार रेटिंग का गौरव मिला, अंबिकापुर, बिलासपुर और पाटन को 5-स्टार, 18 निकायों को 3-स्टार और 93 निकायों को 1-स्टार रेटिंग प्राप्त हुई।
0 वाटर+ प्रमाणन में रायपुर, बिलासपुर, कोरबा और भिलाई ने प्रतिष्ठित प्रमाणपत्र हासिल किया।
मिशन अमृत 2.0
मिशन का मुख्य उद्देश्य नल कनेक्शन के माध्यम से नागरिकों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना एवं एक लाख से अधिक जनसंख्या वाले नगरीय निकायों में एसटीपी का निर्माण किया जाना है। वर्ष - 2021 से 2023 तक कुल 08 निकायों की जल प्रदाय योजनाओं हेतु कुल 451.48 करोड़ रुपए के कार्यादेश जारी किए गए हैं। उक्त परियोजनाओं हेतु निकायों को कुल 51 करोड़ 40 लाख रुपए जारी किए गए हैं। विगत 02 वर्षों में कुल 24 निकायों की जल प्रदाय योजनाओं हेतु कुल 1151.17 करोड़ रुपए के कार्यादेश एवं 5 शहरों (भिलाई, दुर्ग, राजनांदगांव, कोरबा एवं अंबिकापुर) में कुल 333 एम.एल.डी. क्षमता के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट निर्माण हेतु 625.37 करोड़ रुपए के कार्यादेश किए गए हैं। प्रगतिरत परियोजनाओं हेतु निकायों को कुल 521 करोड़ 60 लाख रुपए जारी किए गए हैं।
मिशन अमृत 2.0 अंतर्गत कुल 1 लाख 38 हजार नल कनेक्शन प्रदाय किये जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। योजना के समस्त कार्य चरणबद्ध रूप से दिसंबर 2027 तक पूर्ण किये जावेंगे। इसके अतिरिक्त योजनातर्गत वॉटर बॉडी रिज्यूविनेशन की 22 तथा उद्यान एवं हरित स्थल विकास की 9 परियोजना हेतु कुल 157.35 करोड़ रुपए के एक्शन प्लान की स्वीकृति भारत सरकार द्वारा प्रदान की गयी है। मिशन अमृत अंतर्गत वूमन फॉर ट्री योजना के तहत कुल 444 परियोजनाओं के लिए 27 करोड़ 48 लाख रुपए की स्वीकृति भारत सरकार से प्राप्त हुई है। योजना अंतर्गत कुल लक्षित 1.65 लाख वृक्षों में से अद्यतन कुल 1.61 लाख वृक्ष स्व-सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा लगाये गये हैं। रिफार्म इंसेंटिव्ह के रूप में कुल 25 करोड़ रुपए भारत सरकार द्वारा प्रदान की गयी है।
आगामी 03 वर्षों का लक्ष्य
37 जल प्रदाय परियोजनाओं, 05 सीवेज परियोजनाओं, 22 वॉटर बॉडी रिज्यूविनेशन, 08 24x7 जल प्रदाय परियोजनाओं, 09 उद्यान विकास कार्यों को पूर्ण करने हेतु लक्ष्यन निर्धारित है तथा इससे 1.38 लाख परिवार लाभांवित होंगे।
प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि - पीएम स्वनिधि योजना
पथ विक्रेताओं के कल्याण, डिजिटल लेनदेन को प्रोत्साहित करने, क्षमता संर्वधन, 15 हजार से 50 हजार तक कार्यशील ऋण सहायता जैसे उद्देश्यों की प्रतिपूर्ति के साथ भारत सरकार, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि -पीएम स्वनिधि योजना प्रदेश के नगरीय निकायों में जून 2020 से संचालित है। भारत सरकार द्वारा नवाचारों के साथ इस योजना की अवधि में मार्च 2030 तक की वृद्धि कर पुर्नगठित पीएम स्वनिधि योजना लागू की गई है, जिसमें तृतीय ऋण की राशि 50 हजार को यथावत रखते हुये प्रथम ऋण की राशि 10 हजार को बढ़ाकर 15 हजार, 20 हजार की राशि को 25 हजार किया गया है। इस प्रकार ऋण अदायगी के शर्तों पर पथ विक्रेताओं को बिना किसी गारंटी के 90 हजार तक की कार्यशील पूंजी, ऋण सहायता बैंको के माध्यम से प्रदान कराई जा रही है। द्वितीय ऋण की अदायगी करने वाले पथ विक्रेताओं के लिये यूपीआई लिंक “रूपे क्रेडिट कार्ड“ भी इस योजना के माध्यम से उपलब्ध कराने की दिशा में सतत कार्य किया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश के 93 हजार 4 सौ 32 पथ विक्रेताओं को 198.56 करोड़ का ऋण विभिन्न बैंको के माध्यम से वितरित कराया गया है। राज्य शहरी विकास अभिकरण, छत्तीसगढ़ एवं नगरीय निकायों के संयुक्त प्रयासों से शत प्रतिशत लक्ष्यों की प्रतिपूर्ति हेतु कार्यवाही की जा रही है।
प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना
0 भारत सरकार द्वारा वर्ष 2023 में सार्वजनिक परिवहन के ढांचे को दुरुस्त करने के लिए पीएम ई.-बस सेवा योजना प्रारंभ की गई है। योजना के तहत राज्यों को शहरों की जनसंख्या के आधार पर बसों की संख्या निर्धारित की गई है जिसके अनुसार रायपुर को 100, दुर्ग-भिलाई को 50, बिलासपुर को 50 तथा कोरबा को 40, इस प्रकार कुल 240 ई-बसों की स्वीकृति प्राप्त हुई है।
0 नवम्बर 2025 तक बस डिपो सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर हेतु भारत सरकार द्वारा राशि रू.33.66 करोड़ एवं बीटीएम पावर इंफ्रास्ट्रक्चर हेतु राशि रू.29.46 करोड़ इस प्रकार कुल राशि रू.63.12 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की गई है।
15वां वित्त आयोग
0 15वें वित्त आयोग का गठन वर्ष 2020-21 से वर्ष 2025-26 के लिये किया गया है। 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत केन्द्र सरकार द्वारा राज्यों को अनुदान राशि का आबंटन किया जाता है, जिसका उपयोग मुख्यतः जनसामान्य की मूलभूत सेवाओं से संबंधित कार्य हेतु किया जाता है (प्रायः जल प्रदाय, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन एवं वायु गुणवत्ता सुधार आदि कार्य किये जाते है)।
0 15वें वित्त आयोग अंतर्गत भारत सरकार से दिनांक 30 नवम्बर 2025 तक कुल राशि रू.2207.04 करोड़ का आबंटन किया गया है। प्राप्त आबंटन राशि में से कुल राशि रू.1879.56 करोड़ के कार्य की स्वीकृति/अनुमति निकायों को जारी की गई है। 01 जनवरी 2024 के पूर्व में कुल 5128 कार्य हेतु राशि रू.848.56 करोड़ तथा 01 जनवरी 2024 से दिनांक 30 नवम्बर 2025 तक कुल 4510 कार्य हेतु राशि रू.1031.00 करोड़ की स्वीकृति जारी की गई है।
आगामी 03 वर्ष का कार्ययोजना
छत्तीसगढ़ शासन की ओर से शहरी विकास से जुड़े प्रमुख योजनाओं और नागरिक सेवाओं में गुणवत्तापूर्ण परिवर्तन हेतु 16वां वित्त आयोग द्वारा अनुमानित अनुदान का योजनाबद्ध उपयोग आगामी तीन वर्षों (2026-27 से 2028-29) में किया जाना है।
इस अवधि में कुल राशि का प्रमुख निवेश उन क्षेत्रों में केंद्रित होगा जिनका सीधा संबंध शहरी बुनियादी ढाँचा मजबूत करने, प्रदूषण में कमी लाने, स्थानीय निकायों की वित्तीय आत्मनिर्भरता बढ़ाने, स्वच्छता को उन्नत करने, ऊर्जा दक्ष सेवा सुधारने एवं नागरिकों को आधुनिक, विश्वसनीय और वैज्ञानिक सेवाएँ उपलब्ध कराने से है।
अटल परिसर
भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी की स्मृति में भारत राष्ट्र की गरिमा पूरे विश्व में बढ़ाने, भारत को द्रुत विकास के मार्ग पर, वैश्विक महाशक्ति बनाने की दिशा में अग्रसर करने एवं छत्तीसगढ़ वासियों को छत्तीसगढ़ राज्य की सौगात देने की स्मृति को अविस्मरणीय बनाने के लिए अटल जी की 100वीं जयंती के अवसर पर समस्त नगरीय निकायों में अटल परिसर का निर्माण किया जा रहा है। इसके तहत्, प्रदेश के 14 नगर निगमों में प्रत्येक नगर निगम में राशि रू.50.00 लाख, प्रदेश की 56 नगर पालिकाओं में प्रत्येक नगरपालिका में राशि रू.30.00 लाख और प्रदेश की 122 नगर पंचायतों में प्रत्येक नगर पंचायत में राशि रू.20.00 लाख इस प्रकार कुल राशि रू. 46.87 करोड़ की लागत से अटल परिसर का निर्माण किया जा रहा है। वर्तमान में कुल स्वीकृत अटल परिसर में से 160 नगरीय निकायों में अटल परिसर का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है। शेष निकायों में आगामी 04 माह में कार्य पूर्ण किया जावेगा।
मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना
0 मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना मुख्यतः शहरों में बढ़ते अव्यवस्थित शहरीकरण तथा परिवहन से सम्बंधित समस्याओं को कम करने हेतु प्रारंभ की गई एक प्रमुख शहरी अवसंरचना विकास की योजना है। योजना अंतर्गत मुख्य सड़कों का निर्माण एवं चौड़ीकरण, बायपास, फ्लाईओवर, सर्विस लेन, अंडरपास और रोड जंक्शन विकास जैसे यातायात सुधार कार्य किये जा रहे हैं ।
0 योजना का उद्देश्य ऐसे प्रतिष्ठित एवं आइकॉनिक प्रोजेक्ट विकसित करना है जो शहरों के संतुलित और आधुनिक विकास का उदाहरण बन सकें।
0 वित्तीय वर्ष 2025- 2026 में इस योजना हेतु 500 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिसके तहत 14 नगर निगमों में 31 कार्यों हेतु 504.80 करोड़ के प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। अद्यतन की स्तिथि में 29 कार्यों को 469.87 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है । 05 कार्यों का कार्यादेश प्रदान किया जा चुका है । शेष कार्य निविदा प्रक्रिया में है । 04 कार्य प्रगतिरत है ।
आगामी 03 वर्ष की कार्ययोजना:-
मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजनांतर्गत आगामी 03 वर्षो में शहर की आवश्यकताओं के अनुरूप सिटी डेव्हलपमेंट प्लान में शामिल कार्यो की परीक्षण कर लगभग राशि रू. 1500.00 करोड़ की स्वीकृति नगर निगमों को प्रदान की जायेगी। जिसमें मुख्य रूप से सड़क निर्माण/सड़क चौड़ीकरण, जल भराव से बचाव हेतु नाला निर्माण, सुव्यवस्थित परिवहन हेतु
जंक्शन का निर्माण शहर के सौंदर्यीकरण कार्य, आडिटोरियम, स्पोटर्स कॉम्पलेक्स निर्माण एवं पेयजल आपूर्ति संबंधी कार्य योजनाबद्ध तरीके से किया जावेगा तथा स्वीकृत कार्यो की प्रगति की नियमित समीक्षा कर कार्य को समय-सीमा में पूर्ण करने का प्रयास किया जावेगा ।
नालंदा परिसर
0 प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने तथा विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में विद्यार्थियों के सहयोग हेतु राज्य शासन द्वारा सर्व सुविधा युक्त वाचनालय स्थापित करने के दृष्टिकोण से नालंदा परिसर योजना प्रारंभ की गई ।
0 नालंदा परिसर निर्माण योजनांतर्गत वर्ष 2024-25 में 15 निकायों में नालंदा परिसर की निर्माण हेतु 111.69 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की गई है। वर्ष 2025-26 में 17 निकायों हेतु कुल 18 नालंदा परिसर निर्माण हेतु राशि रू. 125.88 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस प्रकार कुल 33 नालंदा परिसर के निर्माण हेतु ₹ 237.57 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की गई है। वर्तमान में 24 नालंदा परिसरों के लिए कार्यादेश जारी किए जा चुके हैं उक्त में से 10 स्थलों पर निर्माण कार्य प्रगतिरत है। शेष निकायों में निविदा की कार्यवाही प्रचलित है । इसके अतिरिक्त सीएसआर मद से 19.54 करोड़ रुपए की लागत से सेंट्रल लाइब्रेरी और रीडिंग जोन का कार्य भी प्रगतिरत है । यह छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी लाइब्रेरी होगी ।
आगामी 03 वर्ष की कार्ययोजना:-
0 समस्त स्वीकृत नालंदा परिसर का निर्माण पूर्ण कर अध्ययन हेतु परिसर शहर के नागरिकों को उपलब्ध कराया जायेगा।
अधोसंरचना मद
0 अधोसंरचना मद अंतर्गत नगरीय क्षेत्रां में बेहतर सेवाओं, मूलभूत सुविधाओं में सुधार, शहरों के विकास, बुनियादी ढाचे में विस्तार तथा सामाजिक विकास हेतु अधोसंरचना मद अंतर्गत विभिन्न कार्यो जैसे - सड़क एवं नाली निर्माण, सामुदायिक भवन निर्माण, गार्डन एवं खेल मैदान निर्माण, शहर सौंदर्यीकरण कार्य तथा पेयजल एवं प्रकाश व्यवस्था के कार्य इत्यादि कार्य कराए जाते हैं ।
0 दिनांक 01.01.2024 से अब तक नगरीय निकायों को कुल 8516 कार्यों हेतु 1376.99 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की गई है। इनमें से 5304 कार्य पूर्ण, 1816 कार्य प्रगतिरत हैं ।
0 वित्तीय वर्ष 2025-26 हेतु इस मद के अंतर्गत 840.00 करोड़ का प्रावधान किया गया है। टाइड हेड के अंतर्गत, चालू वित्तीय वर्ष हेतु 224.09 करोड़ लागत वाली 53 परियोजनाओं का प्रावधान किया गया है। अन टाइड हेड के अंतर्गत 1971 कार्यों हेतु राशि रू. 655.34 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है।
आगामी 03 वर्ष की कार्ययोजना:-
0 अधोसंरचना मद अंतर्गत प्रदेश के समस्त नगरीय निकायों में आगामी 03 वर्षो में शहर की आवश्यकताओं के अनुरूप सिटी डेव्हलपमेंट प्लान में शामिल कार्यो का परीक्षण कर लगभग राशि रू.1500 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की जायेगी। जिसके अंतर्गत स्वीकृत कार्यो की प्रगति की नियमित समीक्षा कर कार्य को समय-सीमा में पूर्ण करने प्रयास किया जावेगा।
मोर संगवारी सेवा
0 प्रदेश के नागरिकों को शासन के विभिन्न विभागों की 27 से अधिक सेवाओं का लाभ नागरिकों को उनके घर पर संगवारी के माध्यम से निर्धारित समय सीमा में पूर्ण पारदर्शिता के साथ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मोर संगवारी सेवा प्रदेश के 14 नगर पालिक निगमों एवं समस्त नगर पालिका परिषद एवं जिला मुख्यालय के 02 नगर पंचायत अंबागढ़ चौकी/गौरेला में संचालित किया जा रहा है। नवीन निविदा के माध्यम से मोर संगवारी सेवा को प्रदेश के समस्त 193 नगरीय निकायों में विस्तार किया जाना है। इस सेवा के माध्यम से शासकीय सेवाओं का सहज ही लाभ आम नागरिक अपने निवास पर संगवारी के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं।
0 वर्तमान में योजना के माध्यम से 1 मई 2022 से 24 नवम्बर 2025 तक 6.90 लाख एवं जनवरी 2024 से 24 नवम्बर 2025 तक 5.00 लाख से अधिक सेवाएं नागरिकों के घर तक पहुंचायी गई है।
मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना
0 शहरी क्षेत्र में निवासरत नागरिकों को उनके घर के समीप स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना प्रारंभ की गई । इस योजना में आम नागरिकों को कुल 150 मोबाइल मेडिकल यूनिट द्वारा मेडिकल कैंप के माध्यम से मुफ्त में परामर्श, उपचार, दवाईयां एवं दैनंदिन होने वाले लैब टेस्ट की सुविधा प्रदान की जा रही है । मुख्यमंत्री दाई दीदी क्लीनिक भी इसी योजना की कड़ी है। इसमें संपूर्ण महिला स्टॉफ के साथ एमएमयू गरीब बस्तियों की महिलाओं के इलाज हेतु उनकी बस्तियों में जा रही है ।
0 योजना अंतर्गत दिसम्बर 2023 से पूर्व 87197 शिविर आयोजित किये जा चुके हैं, जिनमें 66.89 लाख से अधिक मरीजों का इलाज किया गया है। 57.89 लाख मरीजों को मुफ्त दवा वितरित की गई है तथा 17.65 लाख मरीजों को मुफ्त लैब टेस्ट का लाभ मिला है । मुख्यमंत्री दाई दीदी क्लीनिक के तहत महिला स्पेशल एम.एम.यू. में महिला विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा 2.23 लाख से अधिक महिला मरीजों का उपचार किया गया है ।
0 योजना अंतर्गत पिछले दो वर्षों में 79 हजार 638 शिविर आयोजित किये जा चुके हैं, जिनमें 50 लाख 37 हजार से अधिक मरीजों का इलाज किया गया है। 45.17 लाख मरीजों को मुफ्त दवा वितरित की गई है तथा 13.99 लाख मरीजों को मुफ्त लैब टेस्ट का लाभ मिला है । मुख्यमंत्री दाई दीदी क्लीनिक के तहत महिला स्पेशल एम.एम.यू. में महिला विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा 3.17 लाख से अधिक महिला मरीजों का उपचार किया गया है ।
शहरी रिफॉर्म्स
सिटी डेवलपमेंट प्लान (CDP)
राज्य में सभी शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) के लिए एक सिटी डेवलपमेंट प्लान तैयार किया जा रहा है ताकि इंटीग्रेटेड और ज़रूरत के हिसाब से शहरी विकास हो सके ।
यह प्लान हर शहर की खास ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए, कम से कम पाँच साल के प्रोजेक्ट्स को कवर करने के लिए डिज़ाइन किया जा रहा है ।
सिटी डेवलपमेंट प्लान के तहत, अलग-अलग ULB द्वारा प्रस्तावित लगभग रू.500 करोड़ के प्रोजेक्ट्स को मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना में शामिल किया गया है ।
इस प्लान के तहत ULBs द्वारा सबमिट किए गए प्रपोज़ल की प्रोजेक्ट की ज़रूरतों के हिसाब से जांच की जाएगी और उन्हें मंज़ूरी दी जाएगी।
फाइनेंशियल मंज़ूरी सही फंडिंग सोर्स जैसे कि अधोसंरचना फंड, 15वें फाइनेंस कमीशन, या दूसरे उपलब्ध बजटीय हेड से दी जाएगी।
CDP को निकायों द्वारा स्थानीय जन प्रतिनिधियों से चर्चा कर प्रति वर्ष अद्यतन किया जावेगा |
प्रॉपर्टी टैक्स रिफॉर्म्स
वर्ष 2024 तक प्रदेश के 7 नगर निगमों (बिलासपुर,भिलाई,दुर्ग,रिसाली,कोरबा,रायपुर,एवं रायगढ़) द्वारा स्वयं के पृथक पृथक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से प्रॉपर्टी टैक्स कलेक्शन किया जा रहा था ।
संपत्ति कर सुधार प्रक्रिया अंतर्गत वर्ष 2023 – 2024 मे वर्ल्ड बैंक परियोजना के तहत प्रदेश के 46 नगरीय निकार्यों में GIS आधारित प्रॉपर्टी टैक्स सॉफ्टवेयर को लाइव किया गया है।
यह शासकीय कर संग्रहण प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
GIS आधारित प्रॉपर्टी टैक्स लाइव पोर्टल होने से नगरीय निकायों में कर संग्रह प्रक्रिया में तेजी आएगी।
यह व्यवस्था अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और कुशल बनाकर स्थानीय सरकार की कार्यक्षमता और नागरिक हितों को मजबूत करेगी।
नई तकनीकों का सही उपयोग और निरंतर सुधार से शासन व्यवस्था में गुणवता और सेवाओं का स्तर बेहतर होता जाएगा।
इस व्यवस्था को आगे सभी नगरीय निकायों में लागू की जाएगी जिसके लिए शीघ्र ही सर्वे कर इसका विस्तार किया जायेगा।
नोट : शेष नगरीय निकायों हेतु GIS आधारित प्रॉपर्टी टैक्स सिस्टम तैयार किये जाने हेतु कार्य योजना बनायीं जा रही है
ई गवर्नेंस
केन्द्र सरकार के ईज ऑफ डुईंग बिजनेस रिफार्म के बिंदुओं के परिपालन, राज्य सरकार के ट्रांसफॉर्मिंग अर्बन गवर्नेस एवं प्रदेश के 193 नगरीय निकायों में निवासरत लगभग 65 लाख नागरिकों को बिना किसी व्यावधान के समस्त विभागीय सेवाओं का लाभ सरल, सुगम एवं प्रभावशीलता के साथ डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से ऑनलाईन उपलब्ध कराया जाना है।
उक्त डिजिटल प्लेटफार्म प्रदेश के समस्त नगरीय निकायों में नागरिक सेवा में सुधार करने, निर्धारित समय-सीमा में सेवाओं का लाभ उपलब्ध कराने, बेहतर सूचना प्रबंधन, पारदर्शिता तथा शासकीय सेवा मे नागरिकों की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने में सहायता प्रदान करेगा।
समस्त नगरीय निकायों हेतु उपरोक्त ऑनलाईन प्लेटफार्म में नागरिक सेवाओं यथा भवन अनुज्ञा, संपत्तिकर प्रबंधन, नल कनेक्शन प्रबंधन, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, ऑनलाईन यूजर चार्ज एवं विलींग प्रबंधन, म्यूनिसिपल प्रापर्टी बुकिंग व्यापार अनुज्ञप्ति, विज्ञापन कर, रोड कटिंग, लेखा एवं वित्तीय प्रबंधन संपत्ति प्रबंधन, वेब पोर्टल, डैश बोर्ड, सूचना का अधिकार, पेरोल पेंशन, कानूनी मामलो का प्रबंधन, स्टोर इन्वेंटरी, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, परिषद प्रबंधन हेतु डिजिटल प्लेटफार्म का विकास किया जाना है।
सिटीजन एक्सपीरियंस सेंटर (CEC)
• प्रदेश के नागरिकों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों से जुड़ी समस्त सेवाओं पर आधारित म्यूनिसिपल शेयर्ड सर्विसेस सेंटर के अंतर्गत सिटीजन एक्सीपिरियंस सेंटर का संचालन प्रारंभ किया जावेगा ।
• छत्तीसगढ़ द्वारा प्रेषित प्रस्ताव को स्वीकृति एवं अनुशंसा प्रदान करते हुए 50 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है ।
• म्यूनिसिपल शेयर सर्विसेस सेंटर स्थापित किए जाने के प्रथम चरण में प्रदेश के 14 नगर पालिक निगम, 55 नगर पालिकाओं (समस्त जिला मुख्यालय) में सिटिजन एक्सपीरियंस सेंटर स्थापित किए जाने कार्य करेगा ।
पं. दीनदयाल उपाध्याय भू-जल संवर्धन मिशन – शहरी
छत्तीसगढ़ राज्य के शहरी क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन और पर्यावरण संरक्षण के महत्व को बढ़ावा देने के लिए पं. दीनदयाल उपाध्याय भू-जल संवर्धन मिशन शहरी दिनांक 20 मई 2025 से प्रारंभ किया गया है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य शहरी नगरीय निकायों में वर्षा जल संचयन को प्रोत्साहित करना और भू-जल संवर्धन की दिशा में सामूहिक प्रयासों से वाटर पॉजिटिव शहरों की परिकल्पना को साकार करना है।
भारत सरकार जल शक्ति मंत्रालय द्वारा जल संचय जन भागीधारी अभियान के अंतर्गत नगर निगम रायपुर द्वारा अल्प समय मे 32,699 रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापना का कार्य पूर्ण कर, जल संरक्षण के क्षेत्र मे उल्लेखनीय कार्य करने हेतु भारत की माननीय राष्ट्रपति जी के कर कमलो से सर्व श्रेष्ठ नगर निगम का पुरस्कार 18-नवम्बर 2025 को मिला है, साथ ही राशि रु 2 करोड़ का इंसेंटिव प्राप्त हुआ है ।
जल परीक्षण प्रयोगशाला
विभाग अंतर्गत समस्त 14 नगर पालिक निगम, 56 नगर पालिका परिषद् एवं 123 नगर पंचायत में पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित किये जाने हेतु 05 संभाग के जिला मुख्यालयो में जल परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित किये जाना है ।
रायपुर , बिलासपुर , अंबिकापुर , दुर्ग , जगदलपुर शहरों में स्थल का चिन्हांकन पूर्ण ।
एजेंसी चयन किये जाने हेतु आर.एफ.पी. जारी ।
यह सभी प्रयोगशालायें नेशनल एक्रिडीएशन बोर्ड फॉर लैबोरेट्रीज (NABL) से मान्यता प्राप्त होंगी ।
इन प्रयोगशालाओं में क्लोरिन, फ़्लोरिन, ई कोलाई जैसे विभिन्न प्रकार के परीक्षण हो सकेंगे ।
इस परीक्षण प्रयोगशाला में दूषित जल का भी परीक्षण किया जावेगा।
इस योजना को 01 वर्ष के भीतर पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है जिसमे लगभग 9.90 करोड़ का व्यय संभावित है ।
इंटरनल ऑडिट
समस्त नगरीय निकायों में भुगतान से पूर्व तथा पश्चात, प्री एवम पोस्ट ऑडिट हेतु ऑडिटर एजेंसी के संभागवार चयन के लिए निविदा प्रक्रिया प्रचलित है। वित्तीय वर्ष 2026-27 से सभी निकायों में प्री तथा पोस्ट ऑडिट अनिवार्य रूप से कराया जावेगा। इस कदम से निकायों में वित्तीय अनुशासन को बल मिलेगा।
प्री ऑडिट और इंटरनल ऑडिट से निकाय में वित्तीय अनुशासन होगा।