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0 दीपम विवाद पर हाईकोर्ट के टिप्पणी पर पीयूष गोयल ने डीएमके समेत इंडिया गठबंधन को घेरा
नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने इंडिया गठबंधन पर गंभीर और तीखे आरोप लगाते हुए कहा है कि विपक्ष तुष्टिकरण की राजनीति करने और एंटी हिंदू सोच रखने वाला है। उनकी राजनीति का असली चेहरा न्यायपालिका के खिलाफ लाए गए महाभियोग प्रस्ताव से साफ तौर पर सामने आता है। गोयल के मुताबिक, यह प्रस्ताव उन न्यायाधीशों को डराने का प्रयास है, जिनके फैसले कुछ राजनीतिक दलों को स्वीकार्य नहीं हैं।
केंद्रीय मंत्री ने डीएमके और कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन पर तुष्टिकरण की राजनीति करने और एंटी हिंदू सोच रखने का आरोप लगाया।  उन्होंने कहा कि कुछ राजनीतिक दल एक विशेष वोट बैंक को खुश करने के लिए सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं का विरोध कर रहे हैं। गोयल ने जनता से अपील की कि वे संवैधानिक संस्थाओं, धार्मिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने वालों के साथ खड़े रहें।

पीयूष गोयल ने कहा कि माननीय न्यायमूर्ति टी. आर. स्वामीनाथन के खिलाफ लाया गया महाभियोग प्रस्ताव झूठे और निराधार आरोपों पर आधारित है। उनके अनुसार, एक न्यायिक फैसले के कारण न्यायाधीश को “एंटी सेक्युलर” बताना और किसी खास व्यक्ति, समुदाय या विचारधारा के पक्ष में झुकाव का आरोप लगाना पूरी तरह असत्य है। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र और संविधान दोनों के लिए खतरनाक संकेत है।

केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि इंडिया गठबंधन की नीति यह बन गई है कि अगर अदालत का फैसला उनके पक्ष में नहीं आता, तो उस संवैधानिक संस्था पर सीधा हमला किया जाता है. संसद के भीतर महाभियोग प्रस्ताव लाकर न्यायाधीशों की निष्पक्षता और स्वतंत्रता पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं, जो न्यायपालिका को कमजोर करने की कोशिश है।

पीयूष गोयल ने मद्रास हाईकोर्ट के मदुरै बेंच के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि जस्टिस जी. जे. चंद्रन और जस्टिस के. के. रामकृष्णन की डिवीजन बेंच ने तिरुपरनकुंड्रम पहाड़ी पर दीप प्रज्वलन से जुड़े मामले में स्पष्ट कहा कि यह एक सदियों पुरानी परंपरा है। अदालत ने स्थानीय लोगों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने और दीप प्रज्वलन की अनुमति देने के निर्देश दिए।

गोयल ने कहा कि अदालत ने राज्य सरकार द्वारा कानून व्यवस्था बिगड़ने के तर्क को भी पूरी तरह खारिज कर दिया। हाईकोर्ट के अनुसार, यह आशंका एक काल्पनिक डर थी, जिसे प्रशासन ने खुद गढ़ा था। अदालत ने यहां तक कहा कि अगर कभी कानून व्यवस्था की समस्या पैदा होती है, तो वह तभी होगी जब उसे राज्य सरकार स्वयं प्रायोजित करे।