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0 आंध्र-छत्तीसगढ़ बॉर्डर इलाके में थे सक्रिय
0 ऑटोमेटिक वेपंस भी साथ लेकर आए
सुकमा। दक्षिण बस्तर डिवीजन में 8 लाख रुपए के इनामी 4 नक्सली कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए आत्मसमर्पण कर दिया हैं। इनमें 2 महिला नक्सली भी शामिल हैं। ये सभी कोंटा-किस्टाराम एरिया कमेटी में सक्रिय थे। सभी कैडरों ने ऑटोमेटिक हथियार और एम्युनेशन पुलिस के पास जमा किए।

यह आत्मसमर्पण जिला सुकमा पुलिस और आंध्रप्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू (एएसआर) जिला पुलिस के संयुक्त प्रयासों से पूना मारगेम पुनर्वास से पुनर्जीवन अभियान के तहत हुआ। इन नक्सलियों ने बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी., सुकमा एसपी किरण चव्हाण, एएसआर (एपी) के ओएसडी पंकज मीणा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रोहित शाह और कोंटा रेंज सीआरपीएफ के 2 आईसी अरविंद पी. आनंद की मौजूदगी में सरेंडर किया।

पुलिस के अनुसार आत्मसमर्पित माओवादी किस्टाराम और गोलापल्ली एलओएस से जुड़े हुए थे। इनमें एक एसीएम रैंक का कमांडर भी शामिल है। सभी माओवादी 8 आपराधिक मामलों में आरोपी हैं, जिनसे पूछताछ जारी है। ये सभी नक्सली अपने साथ इंसास, एसएलआर, 303 जैसे हथियार साथ लेकर आए हैं।

इन्होंने किया सरेंडर
0 सोढ़ी जोगा (एसीएम)- 5 लाख रुपए इनामी
0 डाबरा गंगा (एलओएस) - 1 लाख रुपए इनामी
0 सोढ़ी राजे (एलओएस) - 1 लाख रुपए इनामी
0 माड़वी बुधरी (एलओएस)- 1 लाख रुपए इनामी

सुरक्षा कैंप और विकास से टूटा माओवादियों का नेटवर्क
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि, किस्टाराम और गोलापल्ली क्षेत्रों में नए सुरक्षा कैंपों की स्थापना, सड़क कनेक्टिविटी में विस्तार और लगातार चल रहे नक्सल विरोधी अभियानों से माओवादियों का स्वतंत्र विचरण क्षेत्र समाप्त हो गया है। इसके चलते संगठन के भीतर असंतोष और मोहभंग तेजी से बढ़ा है। वहीं शासन की विकास योजनाओं और प्रशासन की सीधी पहुंच से ग्रामीणों का भरोसा मजबूत हुआ है। जिससे माओवादी संगठन का प्रभाव कमजोर पड़ा है। पुलिस का दावा है कि संगठन अब अंतिम चरण में है।

शासन की पुनर्वास नीति का मिलेगा लाभ
आत्मसमर्पण करने वाले सभी कैडरों को छत्तीसगढ़ शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत आर्थिक सहायता, पुनर्वास और अन्य सुविधाएं दी जाएंगी, ताकि वे समाज की मुख्यधारा से जुड़कर सामान्य जीवन जी सकें।

पुलिस की अपील
सुकमा एसपी किरण चव्हाण ने कहा कि शेष बचे माओवादी भी हिंसा छोड़कर आत्मसमर्पण करें और शासन की पुनर्वास योजना का लाभ लें। वहीं बस्तर IG सुंदरराज पी. ने कहा कि हिंसा में केवल विनाश है, जबकि ‘पूना मारगेम’ अभियान विकास और सम्मान का रास्ता खोलता है।