Head Office

SAMVET SIKHAR BUILDING RAJBANDHA MAIDAN, RAIPUR 492001 - CHHATTISGARH

tranding

*0 सिक्किम में आईटीबीपी के जवान सीमावर्ती गांवों के लोंगों की जिंदगी संवारने में लगे हुए हैं*
0 *आईटीबीपी के जवान स्वास्थ्य सेवा, बुनियादी ढांचे और आजीविका सहायता के माध्यम से सीमावर्ती समुदाय के लिए बने 'लाइफलाइन'*
*0 छत्तीसगढ़ के मीडिया दल ने 'थेगु' के 'वाइब्रेंट विलेज' में बदलते स्वरूप को देखा*
*0 सीमावर्ती सिक्किम समेत 4 राज्यों व 1 केंद्र शासित प्रदेश में हो रही योजना संचालित*
 
*थेगु से शंकर चंद्राकर*
 
गंगटोक। देश की सुरक्षा के साथ ही चीन से सटे उत्तरी सीमावर्ती गांवों के निवासियों के जीवन स्तर सुधारने के लिए केंद्र सरकार ने वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के रूप में अनोखी पहल की है।  सिक्किम के सीमावर्ती इलाके में स्थित गांवों में आईटीबीपी के जवान इन गांवों के लोंगों की जिंदगी संवारने में लगे हुए हैं। आईटीबीपी के जवान (हिमवीर) स्वास्थ्य सेवा, बुनियादी ढांचे और आजीविका सहायता के माध्यम से सीमावर्ती समुदाय के लिए 'लाइफलाइन' बने हुए हैं। केंद्र सरकार सिक्किम समेत 4 राज्यों व 1 केंद्र शासित प्रदेश में इस योजना को संचालित कर रही है।
 
भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के पीआईबी रायपुर द्वारा आयोजित मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को सिक्किम के दुर्गम सीमावर्ती क्षेत्र का दौरा किया। छत्तीसगढ़ के पत्रकारों के इस दल ने समुद्र तल से 13,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित थेगु गांव का अवलोकन किया। भारत-चीन सीमा के अत्यंत निकट स्थित इस गांव में पत्रकारों ने केंद्र सरकार की 'वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम' (वीवीपी) की जमीनी हकीकत को देखा और समझा कि कैसे विषम परिस्थितियों में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) विकास की मशाल जलाए हुए है।
 
मीडिया प्रतिनिधिमंडल से बात करते हुए आईटीबीपी के डिप्टी कमांडेंट अरिमर्दन कुमार सिंह ने कहा कि आईटीबीपी यहाँ केवल सीमाओं की रक्षा नहीं कर रही है; हम लोगों के लिए बुनियादी सुविधाओं का भी ध्यान रख रहे हैं। उन्होंने आगे बताया कि हम यहाँ पानी, राशन और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करते हैं। चूंकि ग्रामीणों की आजीविका पशुपालन पर निर्भर है, इसलिए हम उनके पशुओं के लिए विशेष पशु चिकित्सा शिविर और साथ ही निवासियों के लिए नियमित अंतराल पर स्वास्थ्य शिविर आयोजित करते हैं। आईटीबीपी बुनियादी ढांचे के निर्माण और उसके रखरखाव के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह गांव इस कठोर जलवायु में भी पूरी तरह कार्यात्मक रहे।
 
*सिक्किम में 63 गांव योजना में चिन्हित*
 
सिक्किम राज्य में 'वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम' को 63 चिन्हित गांवों में 188.9 करोड़ रुपये के समर्पित बजटीय आवंटन के साथ लागू किया जा रहा है। यह फंडिंग अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख सहित अन्य उत्तरी सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है। इस योजना को महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता दी गई है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि थेगु जैसी ऊंचाई पर स्थित बस्तियां अब अलग-थलग न रहें, बल्कि देश की मुख्यधारा से जुड़ें। यह विकास स्थानीय परंपराओं के संरक्षण, तीर्थस्थल व्याख्या केंद्रों के निर्माण और सड़क व डिजिटल कनेक्टिविटी को बढ़ाने जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित है। इन दूरस्थ चौकियों को आधुनिक सुविधाओं के साथ 'जीवंत' समुदायों में बदलकर, सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि देश की सीमा पर रहने वाले निवासियों को भी विकास के वैसे ही अवसर मिलें जैसे देश के मध्य भाग में रहने वाले लोगों को मिलते हैं।
 
*डोमिसाइल न मिलना अभी भी यहां की समस्या*
केन्द्र सरकार की इस महत्वपूर्ण योजना के बावजूद सीमावर्ती गॉवों में रह रहे कई लोंगों की समस्या उन्हें डोमिसाइल न मिलना भी है। इस वजह से उन्हें केंद्र व राज्य की कई योजनाओं से वंचित होना पड़ता है। डेंगु के रहने वाले परतुक शेरपा, पशांग डोमा और भास्कर का कहना है कि सरकार उन्हें बिजली, पानी, राशन समेत बहुत सारी सुविधाएं मुहैया करा रही है। डेगु में करीब 200 लोग रहते हैं, लेकिन कई लोगों के पास डोमिसाइल नहीं है। इससे उन्हें कई परेशानी का सामना करना पड़ता है। डोमिसाइल के नियम को सरल करना चाहिए। 
 
*वर्ष 2023 से लागू है वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम*
 
भारत सरकार ने 15 फरवरी, 2023 को गृह मंत्रालय के तहत एक केंद्रीय प्रायोजित योजना के रूप में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (वीवीपी-I) को मंजूरी दी थी। इस दूरदर्शी पहल की शुरुआत उत्तरी सीमा से सटे 19 जिलों के 46 ब्लॉकों के 662 चयनित गांवों में व्यापक विकास लाने के लिए की गई थी। यह कार्यक्रम पर्यटन, सांस्कृतिक विरासत, कौशल विकास और उद्यमिता के प्रोत्साहन के माध्यम से आजीविका सृजन के अवसर पैदा करने के लिए इन गांवों में केंद्रित हस्तक्षेप की परिकल्पना करता है। इन दूरस्थ क्षेत्रों में जीवन स्तर में सुधार करके, इस योजना का उद्देश्य निवासियों को उनके मूल स्थानों पर रहने के लिए प्रोत्साहित करना है, जिससे पलायन को रोका जा सके और देश की सीमाओं की सुरक्षा को और मजबूती दी जा सके। इसका मुख्य उद्देश्य चीन सहित उत्तरी सीमा से सटे 4 राज्यों और 1 केंद्र शासित प्रदेश (हिमाचल, उत्तराखंड, अरुणाचल, सिक्किम, लद्दाख) गांवों का व्यापक विकास करना है। इसे बाद में पाकिस्तान, नेपाल, भूटान और म्यांमार की सीमाओं तक भी विस्तारित किया गया है। इसका उद्देश्य बुनियादी ढांचे (सड़क, पानी, बिजली व इंटरनेट), बेहतर जीवन स्तर और पर्यटन को बढ़ावा देकर सीमावर्ती गांवों से पलायन रोकना है। यह कार्यक्रम सीमा सुरक्षा को मजबूत करने और सीमावर्ती आबादी को राष्ट्र की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए एक रणनीतिक कदम है। इसका उद्देश्य सीमावर्ती गांवों को "अंतिम" नहीं बल्कि "पहले गांव" के रूप में विकसित करना, बुनियादी सुविधाएं प्रदान करना और पर्यटन व स्थानीय आजीविका को बढ़ावा देना है। इस योजना से सीमावर्ती गांवों के निवासियों का जीवन स्तर सुधारना है।

tranding