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0 कहा-नॉर्थ-साउथ ब्लॉक ब्रिटिश हुकूमत का प्रतीक; गुलामी की मानसिकता से निकलना जरूरी
0 पीएम मोदी ने किया प्रधानमंत्री कार्यालय की नई इमारत 'सेवा तीर्थ' का उद्घाटन
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री कार्यालय का पता शुक्रवार से बदल गया है। नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नए पीएम ऑफिस सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन 1 व 2 का उद्घाटन किया। पीएम ऑफिस अब तक साउथ ब्लॉक में था। पीएम मोदी ने इसे विकसित भारत की यात्रा में ऐतिहासिक क्षण करार देते हुए कहा है कि यह दिन भारत की विकास यात्रा में एक नये आरंभ का साक्षी बन रहा है।

उन्होंने कहा कि ये भवन विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने तथा जनता की सेवा करने के संकल्प का प्रतीक है। ये नये परिसर भारत की जनताओं की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए बने हैं, यहां जो फैसले लिये जायेंगे वह 140 करोड़ जनता की आकांक्षाओं को पूरा करेंगे।
सरकारी भवनों तथा प्रमुख मार्गों के नाम बदलने का उद्देश्य स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल नाम बदलने का निर्णय भर नहीं है बल्कि यह सत्ता के मिजाज को सेवा की भावना में बदलने का पवित्र प्रयास है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 विकसित राष्ट्र का लक्ष्य विश्व की निगाहों में भारत की प्रतिज्ञा है और इसे पूरा करने के लिए हमारा हर निर्णय सेवा की भावना से प्रेरित होना चाहिए। 

उन्होंने कहा कि हम आज एक नया इतिहास बनता देख रहे हैं। यह दिन भारत की विकास यात्रा में एक नये आरंभ का साक्षी बन रहा है। विजया एकादशी का बहुत महत्व रहा है और इस दिन लिये गये संकल्प में विजय अवश्य प्राप्त होती है। हम विकसित भारत का संकल्प लेकर सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन में प्रवेश कर रहे हैं तथा अपने लक्ष्य में विजयी होने का दैवीय आर्शीवाद हमारे साथ है।" प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछली इमारतों में अहम निर्णय लिये गये और महत्वपूर्ण नीति बनी लेकिन ये इमारतें ब्रिटिश साम्राज्य की प्रतीक थी और इनका उद्देश्य देश को सदियों तक गुलामी की जंजीरों में जकड़े रखना था। उन्होंने कहा कि जब 1911 में देश की राजधानी को कोलकाता से बदलकर दिल्ली किया गया तो इसका निर्माण ब्रिटिश सम्राट की सोच और जरूरत को ध्यान में रखकर किया गया था। नॉर्थ और साउथ ब्लाक को ऊंचाई पर जानबूझकर बनाया गया जिससे कि और कोई इमारत इनकी बराबरी न कर सके। उन्होंने कहा कि इनके माध्यम से गुलाम भारत की जमीन पर ब्रिटिश साम्राज्य की सोच उतारनी थी।

पीएम मोदी ने कहा कि नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक की इमारतें ब्रिटिश शासन की हुकूमत की प्रतीक थीं। ये भवन ब्रिटेन के महाराज की सोच को गुलाम भारत की जमीन पर उतारने का माध्यम था। हमें गुलामी की इस मानसिकता से बाहर निकलना जरूरी था। पीएम ने कहा कि दिल्ली की इमारतों में ऐतिहासिक स्थलों पर गुलामी के चिन्ह भरे पड़े हैं। आजाद भारत में जो सैनिक शहीद हुए, यहां उनके लिए कोई स्मारक नहीं था। 2014 में देश ने तय किया कि गुलामी की मानसिकता और नहीं चलेगी। हमारे इन फैसलों के पीछे हमारी सेवा भावना है।

पीएम मोदी ने कहा कि विकसित भारत की सोच सिर्फ योजनाओं में नहीं, बल्कि काम करने की जगहों और इमारतों में भी दिखनी चाहिए। नई तकनीक के लिए पुरानी इमारतें पर्याप्त नहीं हैं। पुराने भवन छोटे और सुविधाओं में सीमित थे। करीब 100 साल पुरानी ये इमारतें जर्जर हो चुकी थीं, और इन समस्याओं की जानकारी देश को होना जरूरी है। आज भी कई मंत्रालय अलग-अलग 50 जगहों से चल रहे हैं, जिससे हर साल लगभग 1,500 करोड़ रुपए किराए में खर्च होते हैं। सभी मंत्रालय एक जगह आने से खर्च कम होगा, समय बचेगा और कामकाज बेहतर होगा। इन फैसलों के पीछे एक साफ सोच बताई गई है, जो भारत के अतीत, वर्तमान और भविष्य को जोड़ती है। पहले जिसे राजपथ कहा जाता था, वहां आम लोगों के लिए कम सुविधाएं थीं, अब कर्तव्य पथ पर बेहतर व्यवस्था है।

पीएम मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति भवन में मुगल गार्डन का नाम बदलकर अमृत उद्यान किया गया और पुरानी संसद को संविधान सदन कहा गया। इसे सिर्फ नाम बदलना नहीं, बल्कि आजाद भारत की नई पहचान बनाना बताया गया है। सरकार का कहना है कि सेवा ही देश की असली पहचान है। नए भवन यह याद दिलाते हैं कि शासन का मतलब सेवा और समर्पण है। “सेवा परमो धर्म” की सोच को ही आगे बढ़ाने की बात कही गई है। सेवा तीर्थ को सेवा के संकल्प का प्रतीक बताया गया है। इसका उद्देश्य लोगों की सेवा करना और देश को आगे बढ़ाना है, ताकि करोड़ों लोग गरीबी और गुलामी की मानसिकता से बाहर निकल सकें।

पीएम मोदी ने कहा कि शासन का केंद्र अब नागरिक है। इस भवन में लिया गया हर फैसला 140 करोड़ लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए होना चाहिए। यहां अधिकार दिखाने नहीं, जिम्मेदारी निभाने का भाव होना चाहिए। विकसित भारत 2047 सिर्फ लक्ष्य नहीं, बल्कि देश का वादा है। हर नीति सेवा की भावना से जुड़ी हो। कर्तव्य ही लोगों के सपनों को पूरा करने का आधार है, जिसमें समानता, समर्पण और आत्मनिर्भरता की सोच शामिल है।
2047 सिर्फ एक साल नहीं, बल्कि सपनों की समयसीमा है। सेवा तीर्थ में सत्ता नहीं, सेवा दिखनी चाहिए। आज का हमारा संकल्प और मेहनत ही आने वाली पीढ़ियों का भविष्य तय करेगी।

पीएम मोदी ने नए ऑफिस में कई फाइलों पर साइन किए
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए पीएमओ कॉम्प्लेक्स ‘सेवा तीर्थ’ में महिलाओं, युवाओं और कमजोर वर्गों से जुड़े अहम फैसलों की फाइलों पर साइन किए। सरकार के अनुसार, इन फैसलों का उद्देश्य इन वर्गों को सीधा लाभ पहुंचाना है। प्रधानमंत्री ने पीएम राहत योजना से जुड़ी फाइलों पर भी साइन किए। इस पहल के तहत, एक्सीडेंड पीड़ितों को 1.5 लाख तक का कैशलेस ट्रीटमेंट मिलेगा, जिससे उनके इलाज में देरी न हो। साथ ही लखपति दीदी योजना का लक्ष्य दोगुना कर 3 करोड़ से छह करोड़ करने का निर्णय लिया गया। प्रधानमंत्री ने कृषि अवसंरचना कोष के आवंटन को 1 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2 लाख करोड़ रुपये करने की मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री ने 10,000 करोड़ रुपये के कोष के साथ स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 को मंजूरी दी है।

सेवा तीर्थ कॉम्पलेक्स में कुल 3 इमारतें
सेवा तीर्थ कॉम्पलेक्स में कुल 3 इमारतें हैं- सेवा तीर्थ-1, सेवा तीर्थ-2 और सेवा तीर्थ-3। सेवा तीर्थ-1 में पीएमओ है। सेवा तीर्थ-2 में कैबिनेट सचिवालय और सेवा तीर्थ-3 में एनएससीएस और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का ऑफिस है। ये सभी ऑफिस पहले अलग-अलग जगहों पर थे। कैबिनेट सचिवालय सितंबर 2025 में ही सेवा तीर्थ-2 में शिफ्ट हो चुका है। आज पीएमओ के साथ एनएसएससी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का ऑफिस भी यहां शिफ्ट हो गया है। पीएम मोदी ने शुक्रवार को कर्तव्य भवन-1 और 2 का भी उद्घाटन किया। यहां मंत्रालयों के नए ऑफिस होंगे। पहले नॉर्थ ब्लॉक मंत्रालयों का ठिकाना था।
पीएमओ और मंत्रालयों का पता 13 फरवरी को बदला है। 1931 में इसी दिन नई दिल्ली का भारत की आधुनिक राजधानी के रूप में उद्घाटन हुआ था।

सेवा तीर्थ पर लिखा है- नागरिक देवो भव
स्पीच से कुछ देर पहले प्रधानमंत्री ने सेवा तीर्थ कॉम्प्लेक्स की पट्टिका का अनावरण किया। दीवार पर‘सेवा तीर्थ’ के नीचे ‘नागरिक देवो भव’ लिखा गया है। प्रधानमंत्री का ऑफिस 1947 से साउथ ब्लॉक में रहा है। ये इमारत करीब 78 सालों से देश की सत्ता का केंद्र रही है। 2014 से मोदी सरकार ने ब्रिटिश शासकों के प्रतीकों से दूर जाने के लिए लगातार कदम उठाए हैं।

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