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0 सेवोक-रंगपो रेल परियोजना से पहली बार रेल सेवा से जुड़ेगा सिक्किम
0 यह रेल परियोजना अगले साल दिसंबर तक होगी पूरी
0 सामरिक दृष्टि से बेहद अहम है यह परियोजना
0 दूसरे चरण में इसे रंगपो से गंगटोक तक पूरा किया जाएगा
0 तीसरे चरण में गंगटोक से भारत-चीन बॉर्डर नाथुला तक ले जाना प्रस्तावित है

शंकर चंद्राकर 
गंगटोक। देश का पहला अंडर ग्राउंड रेलवे स्टेशन आकार ले रहा है। यह अंडर ग्राउंड स्टेशन पश्चिम बंगाल के सेवोक से सिक्किम के रंगपो तक 44.96 किमी लंबी रेल परियोजना का हिस्सा है। देश में अब तक रेल सेवा से वंचित रहा पहाड़ी प्रदेश सिक्किम सेवोक-रंगपो रेल परियोजना से पहली बार रेल सेवा से जुड़ेगा। 
सिक्किम की धुंध से ढंकी पहाडिय़ों और गहरी घाटियों के बीच स्टील की पटरियों पर एक क्रांति आकार ले रही है। जिसे कभी एक दुर्गम क्षेत्र माना जाता था, उसे अब सेवोक-रंगपो रेलवे परियोजना से जोड़ा जा रहा है। यह परियोजना न केवल कनेक्टिविटी, बल्कि देश की पूर्वोत्तर सीमा के लिए वाणिज्य, गतिशीलता और एकीककरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। इस रेल परियोजना का 90 फीसदी काम पूरा हो गया है और यह दिसंबर 2027 तक पूरा हो जाएगा। इस रेल परियोजना को देश में सामरिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि तीन चरणों में पूरा कर इसे भारत-चीन बॉर्डर नाथुला तक ले जाने का प्रस्ताव है। 
पहले चरण के तहत सिवोक-रंगपो तक इस परियोजना का काम अगले साल दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद दूसरे चरण में इसे रंगपो से सिक्किम की राजधानी गंगटोक तक 35 किमी तक पूरा किया जाएगा। आखिरी व तीसरे चरण में इसे गंगटोक से नाथुला बॉर्डर तक ले जाने का प्रस्ताव है। नाथुला बॉर्डर तक रेल सेवा शुरू होने से 12 घंटे से भी कम समय में बॉर्डर पर तैनात जवानों के लिए जरूरी सामानों की आपूर्ति की जा सकती है। अभी बॉर्डर पर सेना के लिए जरूरी सामान ले जाने में कई-कई दिन लगते हैं, इसलिए यह रेल परियोजना सिक्किम के लोगों के साथ ही देश के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। 
इस रेल परियोजना का निर्माण कार्य रेलवे की अनुषंगी कंपनी इरकॉन इंटरनेशनल कर रही है। परियोजना के एडवाइजर महेंद्र सिंह, प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर सीजीएम रेनया और डिप्टी चीफ इंजीनिययर कंस्ट्रक्शन विष्णु कुमार ने बताया कि यह परियोजना पूरी तरह पहाड़ी इलाके में है। इस कारण यह बेहद चैलेंचिंग काम था। पिछले तीन सालों में पूरी टीम को कई चैलेंजेस फेस करने पड़े। 44.96 किमी लंबी इस परियोजना में कुल 38.6 किमी लंबा टनल है। इसमें कुल 14 टनल का निर्माण किया जा रहा है, जिनमें से 2 टनल का काम बचा है, जिसे सितंबर-अक्टूबर तक पूरा कर लिया जाएगा। 12 टनल का निर्माण कंपलीट हो गया है। इनमें टनल नं. 10 सबसे ज्यादा 5.3 किमी लंबा है। वहीं 3.09 किमी के अलग-अलग 13 ब्रिज का निर्माण किया जा रहा है, जिनमें से 10 ब्रिज का निर्माण पूरा हो गया है। इसमें ब्रिज की अधिकतम ऊंचाई 85 फीट है। एक तरह से देखा जाए तो ट्रेन पूरे 44.96 किमी तक अलग-अलग टनल और ब्रिज से ही गुजरेगी। इसमें 5 रेलवे स्टेशन हैं, जिसमें सेवोक, रियांग, तीस्ता बाजार, मेल्ली और रंगपो शामिल है। इसमें सिवोक स्टेशन का काम पूरा हो गया। बाकी का निर्माण चल रहा है। रंगपो रेलवे स्टेशन में 3 प्लेटफार्म बनाए जाएंगे। रंगपो के रूप में सिक्किम को बड़ा रेलवे स्टेशन मिलेगा। यहां से सिक्किम की राजधानी गंगटोक की दूरी करीब 38 किमी है। जब तक इस परियोजना का दूसरा चरण पूरा नहीं हो जाएगा, तब तक रंगपो ही सिक्किम का मुख्य रेलवे स्टेशन होगा।  

तीस्ता बाजार में पहला अंडर ग्राउंड स्टेशन 
परियोजना के एडवाइजर महेंद्र सिंह ने बताया कि इसमें पं. बंगाल के तीस्ता बाजार में देश का पहला अंडरग्राउंड रेलवे स्टेशन बनाया जा रहा है, जो अपने आप में अनूठा व अद्भुत है। इसमें यात्रियों की सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा गया है। इसमें आक्सीजन सप्लाई से लेकर अन्य सभी सुविधाओं का ध्यान रखा गया है। यह स्टेशन जब चालू होगा तो यहां ज्यादा यात्रियों की भीड़ जमा न हो, इसका विशेष ख्याल रखा गया है। ताकि यहां जरूरी आक्सीजन की सप्लाई लगातार होता रहे और यात्रयिों को किसी भी तरह की परेशानी न हों। 

यंग हिमालय क्षेत्र में है पूरी परियोजना
परियोजना के एडवाइजर श्री सिंह ने बताया कि पूरा निर्माण कार्य यंग हिमालय क्षेत्र में है     और यहां 5 इकोलॉजी सेंसेटिव जोन है। इस वजह से टनल व ब्रिज के निर्माण में विशेष ध्यान दिया गया है। पूरी परियोजना महानंदा वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी, कुरसेओंग फॉरेस्ट डिवीजन, दार्जिलिंग फॉरेस्ट डिवीजन, कलीमपोंग फॉरेस्ट डिवीजन और ईस्ट सिक्किम फॉरेस्ट डिवीजन से गुजरेगी। 

इस परियोजना में छत्तीसगढ़ का भी योगदान
बेहद महत्वपूर्ण इस परियोजना में छत्तीसगढ़ का भी योगदान है। इस परियोजना के निर्माण में छत्तीसगढ़ से मंगाए जा रहे विभिन्न प्रकार के टीएमटी व अन्य लौह सामग्री शामिल है। यही नहीं इसके निर्माण में लगे कई कर्मचारी भी छत्तीसगढ़ से हैं। परियोजना के डिप्टी चीफ इंजीनिययर कंस्ट्रक्शन विष्णु कुमार वर्मा छत्तीसगढ़ के साजा क्षेत्र के रहने वाले हैं। उन्होंने बताया कि यह एक बेहद चैलेंजिंग प्रोजेक्ट रहा है। फिर भी इसे बेहतर तकनीक की मदद से पूरा किया जा रहा है। 

10 साल देरी से शुरू हुई परियोजना 
परियोजना के एडवाइजर श्री सिंह के मुताबिक इस रेल परियोजना को वर्ष 2009-10 में मंजूरी दी गई थी, लेकिन जमीन अधिग्रहण, पर्यावरण मंजूरी और फॉरेस्ट क्लियरेंस की वजह से यह परियोजना करीब 10 साल देरी से शुरू हुई। सभी तरह की मंजूरी मिलने के बाद वर्ष 2019 में फुल स्केल पर निर्माण काम शुरू हुआ, लेकिन इसी बीच कोविड की वजह से वर्ष 2020 व 2021 में काम प्रभावित रहा। कोविड की समाप्ति के बाद वर्ष 2021 के बाद फिर इस पर काम शुरू हुआ और रिकार्ड 7 साल में इसे पूरा कर लिया जाएगा। 

देरी से शुरू होने से लागत में भारी इजाफा
10 साल देरी से शुरू होने से इस परियोजना की लागत में काफी इजाफा हुआ। वर्ष 2015 में इस परियोजना की लागत 4085 करोड़ थी, जो अब बढ़कर 11775.05 करोड़ हो गई है। 

छत्तीसगढ़ मीडिया टीम ने अद्भुत रेल परियोजना का किया अवलोकन 
छत्तीसगढ़ से आए मीडिया टीम ने सिक्किम के रंगपो में सेवोक-रंगपो रेल परियोजना स्थल का दौरा किया। परियोजना के एडवाइजर महेंद्र सिंह ने मीडिया टीम को आडियो-वीडियो प्रेजेंटेशन के माध्यम से इसकी पूरी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 44.96 किमी लंबी इस परियोजना को दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस परियोजना से सिक्किम को पहली रेल कनेक्टीविटी मिलेगी। परियोजना का करीब 90 फीसदी काम पूरा हो गया है। परियोजना के सभी 5 स्टेशन का निर्माण कार्य चल रहा है। इस परियोजना की सबसे लंबी सुरंग 5.3 किमी और सबसे छोटी सुरंग 542 मीटर लंबी है। इस परियोजना की आधारशिला 30 अक्टूबर 2019 को उपराष्ट्रपति द्वारा रंगपो और रेल मंत्री द्वारा सेवोक में रखी गई थी। 

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