Head Office

SAMVET SIKHAR BUILDING RAJBANDHA MAIDAN, RAIPUR 492001 - CHHATTISGARH

tranding

0 हाईकोर्ट ने पलटा निचली अदालत का फैसला 

बिलासपुर। कोरिया जिले के ज्योति मिशन स्कूल यौन उत्पीड़न मामले में निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट ने पलट दिया है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने निचली अदालत द्वारा आरोपियों को दोषमुक्त किए जाने के फैसले को त्रुटिपूर्ण बताते हुए स्कूल के फादर जोसेफ धन्ना स्वामी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही घटना को छिपाने वाली दो महिला स्टाफ को भी 7-7 साल कारावास की सजा दी है।

दरअसल, कोरिया के सरभोका स्थित ज्योति मिशन स्कूल में चौथी की 9 वर्षीय छात्रा हॉस्टल में रहती थी। उसके साथ 9 सितंबर 2015 को दुष्कर्म हुआ था। पीड़िता ने बताया कि वह रात को बाथरूम गई थी, जहां नशीला पाउडर छिड़का हुआ था, जिससे उसे चक्कर आने लगे। इसके बाद जब वह अपने कमरे में सो रही थी, तब आरोपी ने दुष्कर्म किया। छात्रा ने सुबह इसकी शिकायत स्कूल की सिस्टर फिलोमिना और किसमरिया से की, तो उन्होंने मदद करने की बजाय उसे छड़ी से पीटा और किसी को न बताने की धमकी दी।

इस मामले में पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। 9 जनवरी 2017 को बैकुंठपुर की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने तीनों आरोपियों को बरी कर दिया था। राज्य सरकार ने इस फैसले को चुनौती दी थी। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने इस फैसले को त्रुटिपूर्ण ठहराया है। कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने पीड़िता के ठोस बयानों और मेडिकल साक्ष्यों को तकनीकी आधार पर खारिज कर गलत फैसला सुनाया था।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में डॉ. कलावती पटेल की मेडिकल रिपोर्ट का हवाला दिया है। रिपोर्ट में पीड़िता के निजी अंगों पर गंभीर चोटों और सूजन की पुष्टि हुई थी। साथ ही एफएसएल रिपोर्ट में पीड़िता के कपड़ों पर मानव शुक्राणु पाए गए थे, जो अपराध की पुष्टि करते हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि बलात्कार पीड़िता की गवाही अपने आप में पूर्ण है और उसे किसी अन्य स्वतंत्र गवाह के समर्थन की अनिवार्य आवश्यकता नहीं है। 
हाईकोर्ट ने मुख्य आरोपी फादर जोसेफ धन्ना स्वामी को आईपीसी की धारा 376 (2) और पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद व 10 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं, फिलोमिना केरकेट्टा और किसमरिया को अपराध छिपाने और पीड़िता मदद न करने के लिए आईपीसी की धारा 119 के तहत 7-7 साल की कठोर कारवास और 5-5 हजार रु के जुर्माने की सजा सुनाई है।