0 विपक्ष ने चूहे के नाम पर करीब 22 लाख क्विंटल धान गायब करने का आरोप लगाया
0 विपक्ष ने कहा-इससे राज्य को करीब 8500 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ
0 गर्भगृह में जाकर विपक्षी सदस्यों ने 'मुसवा को बदनाम करना बंद करो' के नारे लगाए
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा बजट सत्र में मंगलवार को धान खरीदी के मुद्दे पर 'चूहे' के नाम पर जमकर हंगामा हुआ। विपक्षी सदस्यों ने ‘चूहे’ के नाम पर सरकार पर भ्रष्टाचार करने और करीब 22 लाख क्विंटल धान गायब करने का आरोप लगाया। कांग्रेस ने दावा किया कि इससे राज्य को करीब 8500 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल समेत अन्य कांग्रेस सदस्यों ने इस पर स्थगन प्रस्ताव स्वीकार कर चर्चा कराने की मांग की। इस मुद्दे पर सरकार का पक्ष सुनने के बाद सभापति धरमलाल कौशिक ने स्थगन प्रस्ताव अग्राह्य कर दिया। इस पर सभी कांग्रेस सदस्य गर्भगृह में जाकर 'मुसवा को बदनाम करना बंद करो' के नारेबाजी कर स्वमेव निलंबित हो गए। बाद में सभी कांग्रेस सदस्यों का निलंबन वापस ले लिया गया।
शून्यकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदे गए धान के उचित भंडारण और सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रही है। जब से साय सरकार बनी है, तब से राज्य में धान के रखरखाव में भारी अव्यवस्था हुई है। उन्होंने बताया कि 2024-25 के खरीफ विपणन सीजन में 149.25 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया था, जिसमें से विभाग की सिटीजन रिपोर्ट के अनुसार 22.71 लाख क्विंटल धान का अब तक निपटान नहीं हुआ है। डॉ. महंत ने आरोप लगाया कि यह धान अब फेयर एवरेज क्वालिटी का नहीं रहा और इसे चूहों ने खा लिया या भ्रष्ट अधिकारियों ने बेच दिया या खराब भंडारण और रखरखाव के कारण यह नष्ट हो गया। उन्होंने कहा कि मार्कफेड के भंडारण केंद्रों से 16.03 लाख क्विंटल और खरीदी केंद्रों से 6.67 लाख क्विंटल धान गायब बताया जा रहा है। इस तरह कुल करीब 22 लाख क्विंटल धान गायब हो गया है। इतनी बड़ी मात्रा में धान को कुतरने के लिए करीब 60 करोड़ चूहे लाने पड़ेंगे। ये कौन सा भ्रष्टाचार का चूहा है या डबल इंजन का चूहा है, जो करोड़ों के धान खा गए। हमारे स्थगन प्रस्ताव को स्वीकार कर इस पर सदन में विस्तार से चर्चा कराई जाएं। इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, राघवेंद्र सिंह, उमेश पटेल, लखेश्वर बघेल समेत अन्य कांग्रेस सदस्यों ने इसे गंभीरता से लेते हुए स्थगन प्रस्ताव स्वीकार कर चर्चा कराने की मांग की। इस पर सभापति श्री कौशिक ने सरकार से अपना पक्ष रखने के लिए कहा।
मंत्री दयालदास बघेल ने विपक्ष के आरोप को बताया गलत
विपक्ष के आरोपों पर जवाब देते हुए खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री दयालदास बघेल ने कहा कि धान खरीदी योजना में कुप्रबंधन या भ्रष्टाचार के कारण राज्य को भारी नुकसान होने का दावा गलत है। उन्होंने बताया कि 2024-25 के खरीफ विपणन सीजन में राज्य ने 25.49 लाख किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 149.25 लाख टन धान खरीदा। इसके लिए किसानों को एमएसपी के रूप में 34,349 करोड़ रुपए और कृषक उन्नति योजना के तहत 11,928 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया। इस तरह किसानों को कुल 46,277 करोड़ रुपए दिए गए। मंत्री ने कहा कि धान खरीदी व्यवस्था के तहत बोनस सहित प्रति क्विंटल 3100 रुपए की कीमत देने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है। उन्होंने बताया कि 2024-25 सीजन में खरीदे गए धान के निपटान की अंतिम तारीख 30 अप्रैल 2026 तय की गई है और प्रक्रिया जारी है।
मंत्री बघेल ने चूहे द्वारा धान खाने के आरोप को भी खारिज किया
मंत्री श्री बघेल ने बताया कि 18.36 लाख टन अतिरिक्त धान का ऑनलाइन नीलामी के जरिए निपटान किया जा चुका है, जबकि करीब 1.60 लाख टन धान भंडारण केंद्रों और 67 हजार टन धान खरीदी केंद्रों में मौजूद है, जो कुल खरीदी का तीन प्रतिशत से भी कम है।मंत्री श्री बघेल ने इस आरोप को भी खारिज किया कि धान को चूहों ने खा लिया या भ्रष्ट अधिकारियों ने बेच दिया। उन्होंने कहा कि धान को सुरक्षित रखने के लिए कवर और कीट नियंत्रण जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं। उन्होंने बताया कि 2739 खरीदी केंद्रों में से 2728 केंद्रों पर स्टॉक का सत्यापन पूरा हो चुका है और बाकी 11 केंद्रों पर प्रक्रिया जारी है। भंडारण में नुकसान को लेकर 78 भंडारण केंद्र प्रभारियों और जिला मार्केटिंग अधिकारियों को नोटिस जारी किए गए हैं। दो भंडारण केंद्र प्रभारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और दो अन्य अधिकारियों को निलंबित किया गया है।
स्थगन प्रस्ताव नामंजूर, सदन में जमकर नारेबाजी
मंत्री के जवाब के बाद सभापति धरमलाल कौशिक ने स्थगन प्रस्ताव को अग्राह्य कर दिया। इसके बाद कांग्रेस विधायकों ने गर्भगृह में पहुंचकर 'मुसवा को बदनाम करना बंद करो', 'मुसवा को न्याय दिलाना है' के नारे लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया। सभापति श्री कौशिक ने सदन के नियमानुसार सभी कांग्रेस विधायकों के निलंबन की घोषणा की, जिसे बाद में वापस ले लिया गया।