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0 लाल आतंक पर निर्णायक प्रहार: बस्तर का आखिरी बड़ा कमांडर था
0 ओडिशा में 55 लाख के इनामी नक्सली ने भी डाले हथियार

जगदलपुर/रायपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान को बुधवार को एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। बस्तर संभाग के जगदलपुर में मोस्ट वॉन्टेड हार्डकोर नक्सली कमांडर पापाराव ने अपने 17 साथियों के साथ आत्मसमर्पण किया। यह घटनाक्रम बस्तर में शांति, विश्वास और विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जा रहा है।
पापाराव बस्तर का आखिरी बड़ा कमांडर था। बताया जा रहा है कि इसके सरेंडर के बाद कोई बड़ा नक्सली लीडर अब संगठन में नहीं बचा है।
एक दिन पहले पापाराव अपने साथियों के साथ जंगल से निकलकर बीजापुर के कुटरू थाने पहुंचा था। इनमें 10 पुरुष और 8 महिलाएं शामिल हैं। नक्सलियों ने 12 लाख कैश समेत 8 एके-47, 1 एसएलआर, 1 इंसास और अन्य हथियार पुलिस को सौंपा है।

बुधवार (25 मार्च) को जगदलपुर के शौर्य भवन में डीजीपी अरुण देव गौतम, बस्तर आईजी सुंदरराज समेत अन्य पुलिस के अधिकारियों की मौजूदगी में सभी नक्सलियों को सरेंडर कराया गया। बताया जा रहा है कि आज ही ओडिशा में 55 लाख के इनामी सुकरू ने भी अपने साथियों के साथ हथियार डाले हैं।

ओडिशा में 55 लाख के इनामी नक्सली का सरेंडर
पापाराव के सरेंडर वाले दिन ही ओडिशा में 5 नक्सलियों ने हथियार डाले हैं। इनमें 55 लाख का इनामी सुकरू भी शामिल है। ओडिशा के कंधमाल में केंद्रीय समिति का सदस्य गणेश उइके के एनकाउंटर के बाद सुकरू ने भी आत्मसमर्पण का फैसला लिया। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में सुकरू, एससीएम (55 लाख इनामी), रावा संजय (पीएम), बनिला (पीएम), रोनी (पीएम) व कुनी (पीएम) 8वीं कंपनी सीपीआई शामिल हैं। 

कौन है पापाराव
पापाराव उर्फ मंगू (56 वर्ष) ये छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का रहने वाला है। वर्तमान में डीकेएसजेडसीएम मेंबर है। साथ ही पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी का इंचार्ज और दक्षिण सब जोनल ब्यूरो का सदस्य है। अपने पास एके-47 राइफल रखता है। बस्तर के जल-जंगल जमीन से वाकिफ है, इसलिए कई बार पुलिस की गोलियों से बचकर भाग निकला था। पापाराव के सरेंडर से नक्सलियों की पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी लगभग खत्म हो गई है। देवा के सरेंडर करने के बाद अब पापाराव ही एक मात्र ऐसा नक्सली बचा था, जो फाइटर है। पापाराव के सरेंडर करते ही बस्तर से माओवाद का सफाया तय माना जा रहा है।

साल भर में बिखरा संगठन
पिछले साल ही नक्सल संगठन के सबसे खूंखार नक्सली माड़वी हिड़मा, नक्सल संगठन का सचिव बसवाराजू, गणेश उइके समेत 17 बड़े कैडर्स का एनकाउंटर किया गया। भूपति, रूपेश, रामधेर जैसे बड़े नक्सलियों ने अपने सैकड़ों साथियों के साथ हथियार डाल दिए हैं।बस्तर में बटालियन नंबर 1 का कमांडर देवा ने भी हिंसा का रास्ता छोड़ दिया है। अब केवल पापाराव ही एक ऐसा नक्सली बचा था, जो लड़ाकू है।

बदलाव के लिए बंदूक छोड़ेंः गृह मंत्री शर्मा
गृहमंत्री विजय शर्मा ने नक्सलियों को कहा कि हाथ में बंदूक रखकर जंगल में ना घूमे। हमारे शिक्षादूतों का गला ना काटे। नदी तालाब सड़क किनारे आईईडी ना बिछाए। हमारे सविंधान को चुनौती ना दें। बदलाव चाहते हैं तो समाज में जनता का बहुमत प्राप्त करें।

बस्तर में नक्सलवाद अब अंतिम पड़ाव परः सीएम साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस आत्मसमर्पण को नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक प्रहार बताते हुए कहा कि नक्सलवाद अब अपने अंतिम पड़ाव पर है और बस्तर की धरती पर हिंसा की विचारधारा पराजित होती स्पष्ट दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि वर्षों तक भय और हिंसा का वातावरण बनाने वाली माओवादी विचारधारा अब समाप्ति की ओर है और बस्तर तेजी से विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की पारदर्शी, संवेदनशील और पुनर्वास केंद्रित नीतियों के कारण भटके हुए युवा अब मुख्यधारा में लौटने का विश्वास पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह आत्मसमर्पण इस बात का प्रमाण है कि यदि सही अवसर, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन का भरोसा मिले, तो हिंसा का रास्ता छोड़कर विकास के मार्ग को अपनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज बस्तर में बंदूक की आवाज़ नहीं, बल्कि विकास, विश्वास और नई उम्मीदों की गूंज सुनाई दे रही है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में तेजी से हो रहे कार्यों ने बस्तर के जनजीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने इस उपलब्धि का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के सशक्त मार्गदर्शन को देते हुए कहा कि नक्सलमुक्त भारत का संकल्प अब निर्णायक चरण में पहुंच चुका है। उन्होंने सुरक्षाबलों के साहस, समर्पण और रणनीतिक कार्रवाई की भी सराहना की। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि माओवाद के पूर्ण खात्मे के साथ बस्तर में शांति, विकास और विश्वास की यह यात्रा निरंतर आगे बढ़ेगी और छत्तीसगढ़ देश के सुरक्षित, समृद्ध और विकसित राज्यों में अग्रणी स्थान प्राप्त करेगा।

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