0 ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की मीटिंग में बोले एस. जयशंकर
0 वैश्विक संघर्ष, ऊर्जा संकट और व्यापार बाधाओं के बीच कूटनीति, आर्थिक लचीलापन और मजबूत सहयोग पर जोर दिया
नई दिल्ली। भारत ने गुरुवार को ब्रिक्स देशों से गुजारिश की है कि वे भू-राजनीतिक उथल-पुथल और व्यापार में रुकावटों के नतीजों से बेहतर ढंग से निपटने के लिए व्यावहारिक तरीके खोजें। इसके साथ ही, भारत ने वैश्विक संघर्षों को सुलझाने में बातचीत और कूटनीति की अहमियत पर भी जोर दिया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने नई दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन में ये बातें कहीं, जिसमें ईरान, रूस, ब्राजील और अन्य सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों ने हिस्सा लिया।
भारत की मेजबानी में हुई यह मीटिंग इसलिए भी ज्यादा अहम हो गई, क्योंकि यह प्रभावशाली समूह पश्चिम एशिया संकट के आर्थिक नतीजों से जूझ रहा है- खासकर अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रही जंग की वजह से ऊर्जा आपूर्ति में आई भारी रुकावटों से खासा असर पड़ा है।
एस. जयशंकर ने दो दिन के इस सम्मेलन में अपनी शुरुआती स्पीच में कहा कि हम ऐसे वक्त में मिल रहे हैं, जब अंतरराष्ट्रीय संबंधों में काफी उथल-पुथल मची हुई है। चल रहे संघर्ष, आर्थिक अनिश्चितताएं और व्यापार, तकनीक और जलवायु से जुड़ी चुनौतियां ग्लोबल सिनेरियो में बदलाव ला रही हैं।
ब्रिक्स मौजूदा चुनौतियों से निपटने में एक रचनात्मक भूमिका निभाएगा
एस. जयशंकर ने कहा कि खासकर उभरते बाज़ारों और विकासशील देशों से यह उम्मीद बढ़ रही है कि ब्रिक्स मौजूदा चुनौतियों से निपटने में एक रचनात्मक और स्थिर भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि इस बैकग्राउंड में आज हमारी चर्चाएं वैश्विक और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर विचार करने और हमारे सहयोग को मज़बूत करने के व्यावहारिक तरीकों पर सोचने का एक मौका हैं। विकास के मुद्दे हमेशा केंद्र में रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई देश अभी भी ऊर्जा, भोजन, उर्वरक और हेल्थ सिक्योरिटी के साथ-साथ फाइनेंस तक पहुंच के मामले में चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
आर्थिक लचीलापन बहुत जरूरी है
जयशंकर ने आगे कहा कि ब्रिक्स उन्हें ज्यादा प्रभावी ढंग से जवाब देने में मदद कर सकता है। आर्थिक लचीलापन भी बहुत जरूरी है। भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखलाएं और कई तरह के बाजार इसके ज़रूरी हिस्से हैं। हमें दोनों पर ध्यान देना चाहिए। विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि शांति और सुरक्षा वैश्विक व्यवस्था के लिए केंद्रीय बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि हाल के संघर्ष सिर्फ बातचीत और कूटनीतिक अहमियत पर ही जोर देते हैं। आतंकवाद के खिलाफ सहयोग को मज़बूत करने में भी हमारी गहरी साझा रुचि है।
ब्रिक्स दुनिया की 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ लाता है
ब्रिक्स दुनिया की 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ लाता है, जो दुनिया की करीब 49.5 फीसदी आबादी, लगभग 40 प्रतिशत वैश्विक जीडीपी और करीब 26 फीसदी ग्लोबल ट्रेड का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस समूह के अध्यक्ष के तौर पर, भारत ने सितंबर में होने वाले समूह के सालाना शिखर सम्मेलन से पहले विदेश मंत्रियों के इस सम्मेलन की मेजबानी की।
ब्रिक्स का 2024 विस्तार हुआ
ब्रिक्स में मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे। साल 2024 में इसका विस्तार हुआ और इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हो गए। वहीं, इंडोनेशिया 2025 में इसमें शामिल होगा। ब्रिक्स के विदेश मंत्रियों ने अपनी पिछली मीटिंग पिछले सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए 80) के 80वें सत्र के दौरान आयोजित की थी।