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0 कोर्ट ने कहा- जांच के नाम पर नहीं रोक सकते नियुक्ति
0 शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के आदेश को सही ठहराया
नई दिल्ली/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) भर्ती 2021 में चयनित उम्मीदवारों को अब राज्य सरकार को नियुक्ति देनी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य शासन की विशेष अनुमति याचिका को खारिज कर दी है। सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने चयनित उम्मीदवारों को नियुक्ति देने के हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया है।

दरअसल, सीजीपीएससी-2021 में गड़बड़ी सामने आने के बाद राज्य शासन ने सीबीआई जांच की घोषणा की थी। सीबीआई इस केस की जांच कर रही है। जबकि, एग्जाम में सिलेक्टेड उम्ममीदवारों को राज्य शासन ने जांच का हवाला देकर नियुक्ति आदेश नहीं दिया है।

इससे परेशान होकर डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी के पद पर चयनित उम्मीदवारों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने कहा कि उनका चयन मेरिट पर हुआ है। न तो उनके खिलाफ कोई जांच चल रही है और न ही कोई केस दर्ज है। इसके बाद भी उन्हें जॉइनिंग से रोक दिया गया है।

हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति रोकने का कारण पूछा था। जवाब में राज्य सरकार ने सीबीआई जांच का हवाला दिया था, जिससे असंतुष्ट हाईकोर्ट ने चयनित उम्मीदवारों को नियुक्ति देने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल पिटिशन लीव (एसएलपी) दायर कर चुनौती दी।

राज्य सरकार ने कहा- जांच पूरी होते तक नियुक्ति स्थगित रखा जाए
राज्य सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, सीनियर एडवोकेट अपूर्व कुरुप ने तर्क देते हुए कहा कि, फर्जीवाड़ा की सीबीआई जांच चल रही है। जांच पूरी होने तक नियुक्तियों को स्थगित रखा जाना चाहिए। उनका कहना था कि नियुक्तियों पर अंतिम निर्णय जांच पूरी होने के बाद ही लिया जा सकता है।

याचिकाकर्ताओं ने कहा- पहले ही दी जा चुकी है नियुक्ति
वहीं, राज्य सरकार की दलीलों का विरोध करते हुए चयनित उम्मीदवारों की ओर से कहा गया कि सीबीआई पहले ही अपनी अंतिम चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जिसमें 171 चयनित अभ्यर्थियों में से केवल 5 के नाम ही शामिल हैं। उन्होंने यह भी बताया कि 125 अभ्यर्थियों को पहले ही जॉइनिंग दी जा चुकी है। शेष अभ्यर्थियों को 3 वर्षों से अधिक समय तक जॉइनिंग से वंचित रखने का कोई औचित्य नहीं है।