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0 शीर्ष अदालत ने कहा- आरोप गंभीर, लेकिन अंतिम पुष्टि नहीं, छत्तीसगढ़ से रहना होगा बाहर
रायपुर/नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित डीएमएफ घोटाला मामले में पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा को जमानत दे दी है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची की बेंच ने कहा कि मामले में आरोप गंभीर हैं, लेकिन इनकी अंतिम पुष्टि ट्रायल के दौरान होगी।

अनिल टुटेजा को इस मामले में 23 फरवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया था, हालांकि वे 21 अप्रैल 2024 से ही न्यायिक रिमांड पर जेल में बंद हैं। राज्य सरकार की ओर से 2019 के कुछ व्हाट्सएप मैसेज का हवाला देते हुए आरोपों की गंभीरता बताई गई।
वहीं, टुटेजा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है और मामले में 85 गवाहों की जांच होनी है, जिससे ट्रायल पूरा होने में लंबा समय लगेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले की सुनवाई पूरी होने और अंतिम फैसला आने में काफी समय लग सकता है। इसलिए मेरिट पर कोई टिप्पणी किए बिना पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा को जमानत देना सही होगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि टुटेजा को जमानत के लिए संबंधित न्यायालय में तय नियमों के अनुसार बॉन्ड जमा करना होगा। साथ ही छत्तीसगढ़ से बाहर रहना होगा।

जमानत के साथ कड़ी शर्तें
सुप्रीम कोर्ट ने टुटेजा की पूर्व प्रभावशाली प्रशासनिक भूमिका को देखते हुए गवाहों को प्रभावित करने की आशंका जताई। इसी कारण कोर्ट ने सख्त शर्त लगाई कि रिहाई के बाद वे छत्तीसगढ़ राज्य से बाहर रहेंगे। रिहाई के एक सप्ताह के भीतर उन्हें अपने निवास की पूरी जानकारी ACB और संबंधित पुलिस थाने को देनी होगी। साथ ही, उन्हें हर सुनवाई में अदालत में उपस्थित होना होगा, जब तक कि अदालत से विशेष छूट न मिले।

क्या है डीएमएफ घोटाला ?
छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से जारी की गई जानकारी के मुताबिक ईडी की रिपोर्ट के आधार पर ईओडब्ल्यू ने धारा 120 बी 420 के तहत केस दर्ज किया है। इस केस में यह तथ्य निकल कर सामने आया है कि डिस्ट्रिक्ट माइनिंग फंड कोरबा के फंड से अलग-अलग टेंडर आवंटन में बड़े पैमाने पर आर्थिक अनियमितताएं की गई हैं।
टेंडर भरने वालों को अवैध लाभ पहुंचाया गया। ईडी के तथ्यों के मुताबिक टेंडर करने वाले संजय शिंदे, अशोक कुमार अग्रवाल, मुकेश कुमार अग्रवाल, ऋषभ सोनी और बिचौलिए मनोज कुमार द्विवेदी, रवि शर्मा, पियूष सोनी, पियूष साहू, अब्दुल और शेखर नाम के लोगों के साथ मिलकर पैसे कमाए गए।
डिस्ट्रिक मिनरल फंड (डीएमएफ) घोटाला मामले में कलेक्टर को 40%, सीईओ 5%, एसडीओ 3% और सब इंजीनियर को 2% कमीशन मिला। डीएमएफ के वर्क प्रोजेक्ट में करप्शन के लिए फंड खर्च के नियमों को बदला गया था।
फंड खर्च के नए प्रावधानों में मटेरियल सप्लाई, ट्रेनिंग, कृषि उपकरण, खेल सामग्री और मेडिकल उपकरणों की कैटेगरी को जोड़ा गया था, ताकि संशोधित नियमों के सहारे DMF के तहत जरूरी डेवलपमेंट वर्क को दरकिनार कर अधिकतम कमीशन वाले प्रोजेक्ट को अप्रूव किया जा सके।
यह खुलासा कोरबा में 575 करोड़ रुपए से ज्यादा के हुए DMF स्कैम की जांच में हुआ है। इसकी पुष्टि रायपुर कोर्ट में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) द्वारा पेश किए गए 6 हजार पेज के चालान से हुई है।