0 शीर्ष अदालत ने कहा-आयोग को एसआईआर कराने का संवैधानिक अधिकार है
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को चुनाव आयोग की ओर से किए गए मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की वैधता को बरकरार रखते हुए कहा कि यह प्रक्रिया स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के लिए जरूरी है।
शीर्ष अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 तथा उसके तहत बनाए गये नियमों के अनुसार आयोग को एसआईआर कराने का अधिकार प्राप्त है। कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने या हटाने के लिए नागरिकता की जांच कर सकता है, लेकिन यह फैसला सिर्फ चुनावी उद्देश्यों तक सीमित रहेगा। किसी व्यक्ति को अंतिम रूप से गैर-नागरिक घोषित करने का अधिकार आयोग के पास नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि संदिग्ध नागरिकता के आधार पर जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, उनके नाम 4 हफ्ते में केंद्र सरकार को भेजा जाए।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने उन याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाया, जिनमें निर्वाचन आयोग द्वारा पिछले वर्ष जून में बिहार में एसआईआर कराने संबंधी जारी अधिसूचना को चुनौती दी गई थी।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत द्वारा सुनाए गये फैसले में कहा गया कि जब कानून स्वयं चुनाव आयोग को किसी भी समय विशेष पुनरीक्षण कराने का अधिकार देता है, तो केवल इस आधार पर इस प्रक्रिया को अवैध नहीं ठहराया जा सकता कि यह नियमित पुनरीक्षण की सामान्य प्रक्रिया के प्रत्येक पहलू का पूरी तरह पालन नहीं करती।
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि हमारी सुविचारित राय में यह विवादित एसआईआर 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम' और उसके नियमों की जगह नहीं लेता है, बल्कि, यह धारा 21(3) द्वारा निर्धारित सटीक कानूनी सीमाओं के भीतर अनुच्छेद 324 के तहत दिए गए संवैधानिक आदेश में नयी जान डालता है। इसलिए, यह नहीं कहा जा सकता कि आयोग ने अपनी कानूनी शक्तियों से बढ़कर कोई कार्य किया है।
शीर्ष अदालत ने कहा कि एसआईआर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की संवैधानिक आवश्यकता को आगे बढ़ाता है। न्यायालय के अनुसार, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव केवल मतदान की प्रक्रिया तक सीमित नहीं हैं। वे मूल रूप से मतदाता सूची की सटीकता और विश्वसनीयता पर आधारित होते हैं, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया की नींव है।
पीठ ने कहा कि विस्तृत विचार के बाद वह इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 16 के तहत चुनाव आयोग को मतदाता सूची तैयार करने अथवा संशोधित करने की प्रक्रिया में नागरिकता से जुड़े प्रश्नों की जांच करने का अधिकार है।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ऐसी जांच केवल मतदाता सूची में नाम शामिल करने अथवा हटाने तक सीमित उद्देश्य से ही की जा सकती है और यह प्रक्रिया उस मतदाता के पक्ष में लागू पूर्वधारणा का सम्मान करते हुए की जानी चाहिए, जिसका नाम पहले से मतदाता सूची में दर्ज है। न्यायालय ने कहा कि आयोग केवल चुनावी प्रयोजनों के लिए उपलब्ध सामग्री का आकलन कर निर्णय ले सकता है।
जून 2025 में बिहार से शुरू हुई एसआईआर प्रक्रिया अब तक 10 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में पूरी हो चुकी है। इस दौरान 7.41 करोड़ वोटर्स के नाम हटाए गए, जिनमें सबसे ज्यादा 2.89 करोड़ नाम उत्तर प्रदेश से कटे।
अब तक 10 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर
देश के 10 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर हो चुका है। इनमें अब तक कुल 7.41 वोटर्स के नाम कट चुके हैं। दिल्ली में 30 जून से एसआईआर प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। एसआईआर के पहले फेज में बिहार शामिल था। दूसरे फेज में 9 राज्य और 3 केंद्रशासित प्रदेश शामिल था। इसमें मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, गुजरात, यूपी, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, गोवा, पुडुचेरी, लक्षद्वीप और अंडमान-निकोबार थे। एसआईआर के तीसरे फेज 16 राज्य और 3 केंद्रशासित प्रदेश कवर होंगे। पूरी प्रक्रिया 30 मई से 23 दिसंबर तक चलेगी।