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0 रिपोर्ट में दावाः वैश्विक संकट के बावजूद भारत की रफ्तार मजबूत रहेगी
मुंबई। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने शुक्रवार को अपनी साल 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में जारी तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद साल 2026-27 में भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार मजबूत बनी रहेगी। इस दौरान देश की रियल जीडीपी ग्रोथ रेट 6.9% रहने का अनुमान लगाया गया है।

केंद्रीय बैंक ने कहा कि भारत के मजबूत फंडामेंटल्स, लगातार बनी हुई घरेलू मांग, निर्यात पर कम निर्भरता और स्थिर पॉलिसी माहौल की वजह से भारतीय इकोनॉमी विपरीत वैश्विक परिस्थितियों का डटकर सामना करने में सक्षम है।

दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा भू-राजनीतिक तनाव
आरबीआई ने वैश्विक हालातों पर चिंता जताते हुए कहा कि साल 2026 में भू-राजनीतिक (जियोपॉलिटिकल) जोखिम दुनिया की आर्थिक ग्रोथ के लिए सबसे बड़ा रोड़ा बन गए हैं। विशेष रूप से फरवरी 2026 में शुरू हुए पश्चिम एशिया संकट ने दुनिया की विकास दर और महंगाई के अनुमानों को काफी प्रभावित किया है।

रिपोर्ट में इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (आईएमएफ) के बेसलाइन परिदृश्य का हवाला दिया गया है। इसके अनुसार, वैश्विक अर्थव्यवस्था की ग्रोथ रेट साल 2026 में घटकर 3.1% रहने का अनुमान है, जो पहले 3.3% आंकी गई थी।

इसी तरह वैश्विक व्यापार (ग्लोबल ट्रेड) की ग्रोथ भी धीमी होकर 2.8% पर आने की आशंका है। आरबीआई ने आगाह किया है कि यदि यह तनाव आगे और बढ़ता है, तो वैश्विक आर्थिक आउटलुक और ज्यादा कमजोर हो सकता है।

2026 में महंगाई दर 4.4% होने का अनुमान
केंद्रीय बैंक ने दुनिया भर में बढ़ती महंगाई के खतरों की ओर भी इशारा किया है। एनर्जी की बढ़ती कीमतों और सप्लाई चेन में आ रही रुकावटों की वजह से वैश्विक स्तर पर कीमतों का दबाव काफी अधिक है। साल 2026 में वैश्विक महंगाई दर 4.4% रहने का अनुमान लगाया गया है, जो पहले के 3.8% के अनुमान से ज्यादा है। आरबीआई का मानना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां और बिगड़ती हैं, तो शेयर बाजारों (इक्विटी मार्केट्स) में बड़ी गिरावट और भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

4 वजहों से बरकरार रहेगी भारत की मजबूत ग्रोथ
आरबीआई ने उम्मीद जताई है कि यदि पश्चिम एशिया संकट का असर सीमित रहता है, तो भारत की 6.9% की ग्रोथ हासिल करने में कोई बड़ी रुकावट नहीं आएगी। हालांकि वैश्विक उठापटक के चलते नीचे की तरफ जोखिम अभी भी बने हुए हैं। तमाम वैश्विक अनिश्चितताओं के बाद भी केंद्रीय बैंक ने भारत के आर्थिक भविष्य को लेकर सकारात्मक नजरिया रखा है। इसके लिए मुख्य रूप से 4 वजह को जिम्मेदार माना गया है। 
0 कॉर्पोरेट सेक्टर और बैंकों की बैलेंस शीट बेहद मजबूत स्थिति में हैं।
0 सरकार की तरफ से लगातार कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ाया जा रहा है।
0 देश के पास पर्यप्त मात्रा में फूड स्टॉक मौजूद है।
0 खेती-किसानी का उत्पादन स्थिर बना हुआ है।