0 रायपुर, दुर्ग-भिलाई और राजनांदगांव में एक साथ कार्रवाई
रायपुर/दुर्ग भिलाई/ राजनांदगांव/धमतरी। सीजी पीएससी भर्ती परीक्षा घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रायपुर, दुर्ग-भिलाई और राजनांदगांव में छापेमारी की है। ईडी की टीम ने बुधवार को इस मामले में पीएससी के पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी, रिटायर्ड आईएएस जेके ध्रुव, पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक व सहायक नियंत्रक ललित गनवीर के घर पर दबिश दी।
ईडी की टीम रिटायर्ड आईएएस जेके ध्रुव के भिलाई सेक्टर-10 स्थित घर पर सुबह 6 बजे पहुंची। जेके ध्रुव सीजी-पीएससी भर्ती घोटाले में आरोपी हैं और फिलहाल जेल में हैं। इस कार्रवाई को भारतमाला घोटाला मामले में उनके कनेक्शन से भी जोड़कर देखा जा रहा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक के रायपुर स्थित घर में भी ईडी की टीम ने दबिश देकर जांच की। इसी तरह बताया गया कि ईडी की टीम बुधवार सुबह पीएससी के पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी के धमतरी के पास उनके गृह ग्राम सरबदा पहुंचकर जांच शुरू की।
वहीं राज्यपाल के पूर्व सचिव अमृत खलखो के भिलाई तालपुरी स्थित निवास पर भी जांच की। बता दें कि उनकी बेटी नेहा का 13वीं रैंक और बेटे निखिल का 17वीं रैंक के साथ डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयन हुआ था।
इसके अलावा राजनांदगांव में तत्कालीन डिप्टी परीक्षा नियंत्रक ललित गणवीर के घर पर भी छापा मारा गया। गणवीर इस मामले में पहले से ही जेल में बंद हैं। ईडी की करीब आठ अधिकारियों की टीम पहुंची हुई है। घर के अंदर दस्तावेजों की जांच की। इस दौरान सुरक्षा बल के जवान भी तैनात रहे।
क्या है सीजीपीएससी घोटाला
यह मामला 2020 से 2022 के बीच हुई भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़ा है। आरोप है कि आयोग की परीक्षाओं और इंटरव्यू में पारदर्शिता को दरकिनार कर राजनीतिक और प्रशासनिक रसूख वाले परिवारों के उम्मीदवारों को उच्च पदों पर चयनित किया गया। इस दौरान योग्य अभ्यर्थियों की अनदेखी कर डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी और अन्य राजपत्रित पदों पर अपने नजदीकी लोगों को पद दिलवाने का खेल हुआ। प्रदेश सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंपी। जांच एजेंसी ने छापेमारी में कई दस्तावेज और आपत्तिजनक साक्ष्य बरामद किए हैं।
टामन सिंह ने रिश्तेदारों और करीबियों को लाभ पहुंचाया
सीबीआई ने दलील दी कि, साल 2020 से 2022 के बीच आयोजित राज्य सेवा परीक्षा में बड़े स्तर पर अनियमितताएं की गईं। आरोप है कि तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए रिश्तेदारों और करीबी लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाया। जांच में सामने आया कि एक निजी कंपनी से सीएसआर मद के तहत 45 लाख रुपए एक एनजीओ को दिए गए। जिसकी अध्यक्ष सोनवानी की पत्नी थीं। इसके बदले प्रश्नपत्र लीक किए गए।