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तिरुवनंतपुरम। केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने समुद्र से जुड़ी अर्थव्यवस्था को एक ऐसा बड़ा अवसर बताया है, जो राज्य के विकास के अगले चरण को गति देने में पूरी तरह सक्षम है। उन्होंने कहा कि राज्य के पास मौजूद विशाल समुद्री संसाधन, रणनीतिक तटीय क्षेत्र और बंदरगाहों का बुनियादी ढांचा नये जमाने के केरल के लिए ‘असीम संभावनाएं’ खोल सकता है।

आठ जून को मनाये जाने वाले 'विश्व महासागर दिवस' के अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि अक्सर यह दिन बिना किसी विशेष ध्यान के बीत जाता है। इस वर्ष इसका महत्व बहुत अधिक है, क्योंकि केरल को एक नये युग में ले जाने के लिए यूडीएफ सरकार ने जिस महत्वाकांक्षी परियोजना की कल्पना की है, वह पूरी तरह समुद्र और राज्य की समुद्री अर्थव्यवस्था से जुड़ी है।

श्री सतीशन ने बताया कि केरल के पास 600 किलोमीटर से अधिक लंबी तटरेखा है, जहां दो अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह, एक कंटेनर टर्मिनल और 17 मध्यवर्ती बंदरगाह मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का विजन इन सभी सुविधाओं को आपस में जोड़कर केरल को बड़े बंदरगाह-आधारित आर्थिक केंद्र में बदलना है।

इस रणनीति के हिस्से के रूप में, वर्तमान में सड़कों के माध्यम से ले जाये जाने वाले माल का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा अंततः समुद्री मार्गों पर स्थानांतरित किया जाना चाहिए। योजना के दूसरे चरण में क्रूज शिपिंग सेवाओं के विस्तार की परिकल्पना की गयी है, जबकि तीसरा चरण अंतर्देशीय जलमार्गों से जुड़ी पर्यटन परियोजनाओं पर केंद्रित है।

उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे केरल धीरे-धीरे बंदरगाह-आधारित अर्थव्यवस्था के रूप में विकसित होगा, कई क्षेत्रों में लाखों रोजगार के अवसर पैदा होंगे। वैश्विक उदाहरणों का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया के अग्रणी व्यावसायिक केंद्रों में से एक दुबई की जीडीपी का लगभग 28 प्रतिशत हिस्सा उसके बंदरगाहों से आता है। उन्होंने कहा कि केरल की तटरेखा और समुद्री संसाधनों में भी भारी आर्थिक क्षमता छिपी हुई है, जिसका अभी तक पूरी तरह उपयोग नहीं किया गया है।

श्री सतीशन ने कहा कि विश्व महासागर दिवस हमें मानव जीवन, वैश्विक आर्थिक गतिविधियों, जलवायु नियंत्रण, जैव विविधता संरक्षण, खाद्य सुरक्षा और सतत विकास में महासागरों की महत्वपूर्ण भूमिका की याद दिलाता है। महासागर दुनिया की जलवायु प्रणाली को नियंत्रित करते हैं और दुनिया भर में तीन अरब से अधिक लोगों की आजीविका का आधार हैं।

इस दिवस को मनाने का उद्देश्य महासागरों के महत्व के बारे में जागरूकता पैदा करना और समुद्री संसाधनों के सतत प्रबंधन को बढ़ावा देना है।

विश्व महासागर दिवस की अवधारणा पहली बार 1992 में रियो डी जेनेरियो में आयोजित पृथ्वी शिखर सम्मेलन के दौरान प्रस्तावित की गयी थी। संयुक्त राष्ट्र ने 2008 में आधिकारिक तौर पर इस दिवस को मान्यता दी। तब से यह दुनिया के सबसे बड़े पर्यावरण जागरूकता अभियानों में से एक बन गया है, जिसे 150 से अधिक देशों में मनाया जाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह वार्षिक आयोजन सरकारों, वैज्ञानिकों, समुद्री उद्योगों, शैक्षणिक संस्थानों, पर्यावरण संगठनों और तटीय समुदायों को महासागर संरक्षण और समुद्री संसाधनों के सतत प्रबंधन के लिए सामूहिक रूप से काम करने के लिए एक मंच पर लाता है।

इस वर्ष की वैश्विक थीम 'सस्टेनिंग ह्वाट सस्टेन्स अस' का संदर्भ देते हुए श्री सतीशन ने कहा कि इसके मुख्य क्षेत्रों में महासागर संरक्षण, जलवायु सहनशीलता, सतत महासागर अर्थव्यवस्था, समुद्री जैव विविधता की सुरक्षा और सतत विकास के लिए महासागर-आधारित समाधान शामिल हैं। उन्होंने कहा कि समुद्री अर्थव्यवस्था तेजी से वैश्विक विकास के मुख्य चालकों में से एक बनकर उभर रही है।

दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन से जुड़े कदम, कार्बन उत्सर्जन में कमी, समुद्री जैव विविधता संरक्षण, सतत आर्थिक विकास, पर्यावरण-अनुकूल समुद्री परिवहन और कार्बन मुक्ति प्रमुख प्राथमिकताएं बन गये हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक समुद्री क्षेत्र में पर्यावरण-अनुकूल बंदरगाह, स्मार्ट नौवहन प्रणाली, अपतटीय नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं, महासागर अवलोकन तकनीक, ब्लू कार्बन पहल और सतत एक्वाकल्चर कुछ ऐसे अवसर हैं, जिनमें आगे बढ़ने की बहुत संभावनाएं हैं।

मुख्यमंत्री केरल को समुद्र के लिए भारत का प्रवेश द्वार बताया और कहा कि ऐतिहासिक और आर्थिक दोनों दृष्टिकोणों से राज्य समुद्री विकास के क्षेत्र में अग्रणी बनकर उभरने के लिए बिल्कुल सही स्थिति में है। प्रचुर मात्स्यिकी संसाधन, समुद्री विरासत, अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कनेक्टिविटी, पर्यटन की संभावनाएं और व्यापक अंतर्देशीय जलमार्ग नेटवर्क केरल को एक मजबूत समुद्री अर्थव्यवस्था विकसित करने के लिए विशिष्ट रूप से अनुकूल बनाते हैं।

केरल की प्रमुख समुद्री संपत्तियों में 17 गैर-प्रमुख (छोटे) बंदरगाह, विझिंजम अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह, कोचीन बंदरगाह, कोचीन शिपयार्ड, कई मछली पकड़ने के बंदरगाह, तीन राष्ट्रीय जलमार्ग और दुनिया भर में प्रसिद्ध तटीय तथा बैकवाटर पर्यटन स्थल शामिल हैं।

श्री सतीशन ने स्पष्ट किया कि विझिंजम अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह एक गहरे पानी का ट्रांसशिपमेंट केंद्र है, जो दुनिया के कुछ सबसे बड़े जहाजों को संभालने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि इस बंदरगाह में पूरे दक्षिण एशिया में सतत बंदरगाह विकास के लिए एक मॉडल के रूप में उभरने की क्षमता है।

मुख्यमंत्री ने इस पर जोर दिया कि बंदरगाह और समुद्री क्षेत्र को केरल के भविष्य के विकास के प्राथमिक चालकों में से एक बनना चाहिए। इसे हासिल करने के लिए, राज्य को सतत मात्स्यिकी, जलीय कृषि, समुद्री जैव प्रौद्योगिकी, महासागर-आधारित नवीकरणीय ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, जहाज निर्माण, तटीय पर्यटन, समुद्री क्लस्टर, निर्यात प्रसंस्करण क्षेत्र, वेयरहाउसिंग सुविधाएं, जलवायु अनुकूल बंदरगाह और स्वच्छ ईंधन को मजबूत करना चाहिए।

उन्होंने समुद्र अर्थव्यवस्था के लाभों को अधिकतम करने के लिए क्रूज पर्यटन, समुद्री विरासत पर्यटन, पर्यावरण-पर्यटन, समुद्री मनोरंजन, समुद्री विश्वविद्यालयों, कौशल विकास केंद्रों और अनुसंधान संस्थानों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

इसके साथ ही श्री सतीशन ने सचेत किया कि गंभीर चुनौतियां समुद्री पारिस्थितिकी प्रणालियों और तटीय अर्थव्यवस्थाओं के लिए खतरा बनी हुई हैं। समुद्री प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, तटीय कटाव और प्लास्टिक कचरा बड़ी चिंताओं के रूप में उभरे हैं और समन्वित नीतिगत प्रयासों तथा सतत विकास प्रथाओं के माध्यम से इनका प्रभावी ढंग से समाधान किया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्व महासागर दिवस केवल एक प्रतीकात्मक उत्सव नहीं है। यह हमें याद दिलाता है कि महासागर जीवन को बनाये रखते हैं, अर्थव्यवस्थाओं को गति देते हैं, जलवायु को नियंत्रित करते हैं और देशों को जोड़ते हैं।” उन्होंने कहा कि महासागरों का संरक्षण न केवल पर्यावरणीय जिम्मेदारी है, बल्कि मानवता के भविष्य में निवेश भी है।

विकास के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण का आह्वान करते हुए श्री सतीशन ने कहा कि यदि केरल को अपने समुद्र और तटरेखा के पेश किये गये अपार अवसरों का पूरा लाभ उठाना है, तो सतत महासागर विकास, जिम्मेदार महासागर शासन, समुद्र अर्थव्यवस्था की पहल और समुद्री संरक्षण को भविष्य की विकास नीति के केंद्रीय स्तंभ बनना चाहिए।