Head Office

SAMVET SIKHAR BUILDING RAJBANDHA MAIDAN, RAIPUR 492001 - CHHATTISGARH

tranding

0 शीर्ष अदालत ने कहा- गृहिणियों के काम की कीमत हर महीने 30 हजार जितनी
0  किसी हादसे में गृहिणियों की मौत होने पर मिलने वाले मुआवजे का मामला
नई दिल्ली। देशभर में सड़क हादसों में जान गंवाने वाली गृहिणियों के परिवारों को मिलने वाले मुआवजे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि घर संभालने वाली महिलाओं को राष्ट्र निर्माता (नेशन बिल्डर) का दर्जा मिलना चाहिए। उनके काम की तुलना किसी पेशेवर से करके उनके योगदान को कम नहीं आंका जा सकता।

जस्टिस संजय करोल और न्यायाधीश एन कोटिस्वर सिंह की बेंच ने कहा कि किसी हादसे में गृहिणियों की मौत होने पर, उनके द्वारा की जाने वाली परिवार की देखभाल और घरेलू काम की कीमत कम से कम 30 हजार रुपए प्रति महीना (3.6 लाख रुपए सालाना) मानी जाएगी। यह रकम 'प्रणय सेठी' मामले में तय अन्य सभी मुआवजा नियमों के अलावा होगी।

अब समझिए अब तक क्या थे नियम?
सड़क हादसों के मामलों में अब तक देश की अदालतें और एक्सीडेंट ट्रिब्यूनल किसी हादसे में जान गंवाने वाली गृहिणियों का मुआवजा तय करने के लिए एक 'काल्पनिक आय' मानती थीं। इसके लिए राज्य के न्यूनतम वेतन को आधार बनाया जाता था, जो कि बहुत कम होता था।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- दावों पर फैसले एक साल में हों
0 एक गृहिणी का काम केवल खाना बनाना, बच्चों की देखभाल और घर संभालना नहीं है। वह परिवार की नींव को मजबूत बनाती है, अगली पीढ़ी तैयार करती है। जब किसी दुर्घटना के कारण गृहिणी की मौत हो जाती है, तब उसका मुआवजा तय करते उसके योगदान का आकलन जरूरी है। 
0 गृहिणियों की आय का आकलन करते समय उनकी उम्र, एजुकेशन, स्किल, पारवारिक जिम्मेदारियां और आर्थिक हालात को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। 
0 यदि किसी सड़क दुर्घटना में गृहिणी घायल हो जाती है या उसकी मौत हो जाती है, तो परिवार को केवल उसकी आय न होने के आधार पर कम मुआवजा नहीं दिया जा सकता। 
0 मुआवजा न तो किसी के लिए अचानक छप्परफाड़ लॉटरी जैसा होना चाहिए और न ही इतनी कम रकम होनी चाहिए कि पीड़ित का मजाक बने। 
0 सड़क दुर्घटना के दावों का निपटारा आमतौर पर एक साल के भीतर हो जाना चाहिए। अगर पीड़ितों को दशकों तक इंतजार करना पड़े, तो कानून का मकसद ही खत्म हो जाता है।
0 सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों से अपील की है कि वे खुद ऐसे मामलों की निगरानी करें और निर्देश जारी कर तय समय में मामलों का निपटारा सुनिश्चित कराएं।