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0 पीएम मोदी ने नीति आयोग की शासी परिषद की ग्यारहवीं बैठक को संबोधित किया

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विकसित राष्ट्र के लक्ष्यों तक पहुंचने के लिए सरकार के हर स्तर पर सहयोग और सामूहिक जिम्मेदारी के भाव पर बल देते हुए गुरुवार को कहा कि नीति आयोग इस तरह के सहयोग के लिए एक प्रभावी मंच की भूमिका निभा सकता है। श्री मोदी ने युवा आबादी को देश की एक प्रमुख शक्ति और ऐतिहासिक अवसर बताते हुए इसका लाभ उठाने के लिए युवाओं को मांग आधारित शिक्षण -प्रशिक्षण दिये जाने की आवश्कता पर बल दिया है।

वह राजधानी में नीति आयोग की शासी परिषद की ग्यारहवीं बैठक को संबोधित कर रहे थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था निरंतर अच्छी गति से आगे बढ़ रही है और मजबूत बनी हुई है। विभिन्न देशों और समूहों के साथ किये गये मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) से लघु और मझोले उद्यमों सहित अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों के लिए अवसर बढ़ेंगे।


बैठक में राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों के मुख्यमंत्रियों, उप-राज्यपालों, अपने वरिष्ठ सहयोगी मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में श्री मोदी ने कहा, ‘जैसे-जैसे भारत ‘विकसित राष्ट्र’ के संकल्प की ओर अग्रसर हो रहा है, हमारी सामूहिक जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। राज्यों के बीच सहयोग, संवाद और अनुभवों का आदान-प्रदान मार्गदर्शक सिद्धांत होने चाहिए।”

इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि नीति आयोग सहयोग के एक प्रभावी मंच के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, जहां राज्य विचारों का आदान-प्रदान कर सकें और विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने के लिए मिलकर कार्य कर सकते हैं।

प्रधानमंत्री देश की जन संख्या में युवा आबादी के बड़े अनुपात को ‘एक ऐतिहासिक अवसर’ बताया और कहा कि ‘इसे हम खोने का जोखिम नहीं उठा सकते।’ उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, मांग-आधारित कौशल विकास और रोजगार के अवसरों के माध्यम से युवाओं के लिए उपयुक्त वातावरण तैयार करना हमारी प्राथमिकता बनी रहनी चाहिए। सशक्त युवा ही भारत की विकास यात्रा के सबसे बड़े प्रेरक बनेंगे।

उन्होंने कहा कि महिला-नेतृत्व वाला विकास विकसित भारत की परिकल्पना का एक प्रमुख आधार है। कृषि, स्टार्टअप, विज्ञान और नवाचार सहित विभिन्न क्षेत्रों में नारी शक्ति महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। राज्यों को महिलाओं की शिक्षा, कौशल विकास, सुरक्षा और सशक्तिकरण को प्राथमिकता देनी चाहिए, ताकि उनकी पूर्ण क्षमता का उपयोग करते हुए भारत की विकास यात्रा को और गति दी जा सके।

श्री मोदी ने कहा, ‘‘विश्व इस समय अनिश्चितता और अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है, फिर भी भारत आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ अपनी विकास यात्रा पर निरंतर आगे बढ़ रहा है।”

उन्होंने कहा कि सरकार ने विकास और निर्यात के नये अवसर सृजित करने के लिए अनेक देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) किये हैं। ये समझौते हमारे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएम इकाइयों) के लिए भी एक महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करते हैं, जिससे वे अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करते हुए वैश्विक बाजारों के लिए स्वयं को तैयार कर सकें और अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ा सकें।


बैठक शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, “ सहकारी संघवाद की भावना से प्रेरित होकर हम सभी भारत की विकास यात्रा को तेज़ करने के लिए मिलकर कार्य कर रहे हैं। केंद्र और राज्यों के संयुक्त प्रयास ही विकसित भारत के हमारे साझा संकल्प को साकार करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में नीति आयोग के सर्वोच्च निकाय की यह बैठक ऐसे समय हुई है जबकि श्री मोदी ने देश के निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में कल इस पद पर निरंतर 4399 दिन पूरे कर प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का रिकार्ड पूरा किया। नीति आयोग की टीम का सरकार ने हाल में ही पुनर्गठन किया है और डॉ सुमन बेरी की जगह पूर्व आर्थिक सलाहकार डॉ अशोक लाहिड़ी को उपाध्यक्ष बनाया गया है।

सरकार के सामने इस समय पश्चिम एशिया युद्ध के चलते अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभावों को कम करने की चुनौती है। भारतीय रिजर्व बैंक ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भू-राजनीतिक संकट के कारण पैदा खलल को देखते चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि के अपने अनुमान को अप्रैल के 6.9 प्रतिशत से घटा कर 6.6 प्रतिशत कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने खुदरा मुद्रास्फीति के अनुमान को भी बढ़ा कर 5.1 प्रतिशत कर दिया है, जबकि अप्रैल में इसे 4.6 प्रतिशत रखने का अनुमान लगाया था। 

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