मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि भारत जैसे पारंपरिक समाज में परिवारों के लिए यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ के मामलों की शिकायत दर्ज कराना आसान नहीं होता। इसलिए केवल एफआईआर दर्ज करने में हुई देरी के आधार पर ऐसे मामलों को रद्द नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने घरेलू सहायिका से छेड़छाड़ के आरोपी 58 साल के व्यक्ति की एफआईआर रद्द करने की मांग खारिज कर दी।
दरअसल 2019 में घरों में काम करने वाली महिला ने आरोप लगाया था कि एक घर के मालिक ने उसके साथ छेड़छाड़ की। आरोपी ने शिकायत दर्ज कराने में देरी और सीसीटीवी फुटेज का हवाला देकर खुद को निर्दोष बताया, लेकिन कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया।
हाईकोर्ट ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों में सिर्फ देरी के आधार पर केस खारिज नहीं किया जा सकता, जब तक कि देरी के पीछे दुर्भावना या बदले की मंशा पहली नजर में साबित न हो।