नई दिल्ली। राज्य सभा के उप सभापति सीपी राधाकृष्णन ने मानूसन सत्र के दौरान सदन में लगातार अव्यवस्था और व्यवधान पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि इस तरह की स्थितियां अंततः जनता के विश्वास और उनकी आकांक्षाओं को प्रभावित करती हैं।
उप सभापति ने गुरुवार को सदस्यों से सदन की गरिमा की रक्षा कर लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने की अपील करते हुए उम्मीद जतायी है कि आगे आने वाले सत्र में सदस्य गरिमामय सदन की प्रतिष्ठा को बनाए रखेंगे और लोकतंत्र की सर्वोच्च परंपराओं के अनुरूप अपने संसदीय दायित्वों का निर्वहन करने के लिए नए संकल्प के साथ मिलेंगे। श्री राधाकृष्णन मानसून सत्र के अंतिम दिन सत्र की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित करने से पूर्व समापन संबोधन कर रहे थे।
संबोधन के बाद सदन में राष्ट्र गीत 'वंदे मातरम्...' के गायन के बाद उप सभापति ने मानसून सत्र की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी। पूर्वाह्न सदन में विपक्ष के हंगामे के बीच शून्य काल की जगह विधायी कार्य निपटाया गया और शोर शराबे और नारेबाजी के बीच खान एवं खनिज विकास (संशोधन ) विधेयक 2026 को अनुमोदित किया गया।
श्री राधाकृष्णन ने विधेयक पारित होने के बाद सत्र की समाप्ति से पहले का परंपरागत समापन भाषण दिया। उन्होंने कहा, " सदन के 271वें सत्र के समापन पर, जब मैं इसकी कार्यवाही पर विचार करता हूँ, तो मेरे मन में गहरी चिंता उत्पन्न होती है। यह खेद का विषय है कि यह सत्र लगातार अव्यवस्था और बार-बार हुए व्यवधानों से प्रभावित रहा, जिसके कारण सदन का कामकाज बार-बार बाधित हुआ।
उन्होंने कहा कि व्यवधान से सदन के बहुमूल्य समय का " नुकसान हुआ और इसके कारण राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर सार्थक चर्चा और बहस का अवसर भी सदन से छिन गया।व्यवधानों के बावजूद, सदन ने अपने मूल विधायी दायित्वों को पूरा करते हुए 12 विधेयकों पर विचार किया और उन्हें पारित अथवा वापस किया। यदि हम सभी ने सामूहिक रूप से भाग लिया होता, अपने बहुमूल्य सुझाव दिए होते और सार्थक विचार-विमर्श में हिस्सा लिया होता, तो निश्चित रूप से स्थिति अलग होती।
श्री राधाकृष्णन ने कहा, 'मुझे आशा है कि जब हम अगली बार मिलेंगे, तो इस गरिमामय सदन की प्रतिष्ठा को बनाए रखने और लोकतंत्र की सर्वोच्च परंपराओं के अनुरूप अपने संसदीय दायित्वों का निर्वहन करने के नए संकल्प के साथ मिलेंगे और हम हर समय अपने लोकतांत्रिक संस्थानों और अपने लोकतंत्र को और सुदृढ़ करेंगे।"
उन्होंने अव्यवस्था के कारण हुए प्रभावों का जिक्र करते हुए बताया कि 20 जुलाई से शुरू हुए मानसून सत्र में सदन ने केवल 37 घंटे 49 मिनट काम किया और इसकी उत्पादकता 39.17 प्रतिशत रही। हमें 285 तारांकित प्रश्न, 380 शून्यकाल प्रस्तुतियाँ और 380 विशेष उल्लेख उठाने का अवसर मिला। दुर्भाग्यवश, इनमें से केवल 16 प्रश्न, 52 शून्यकाल प्रस्तुतियाँ और 93 विशेष उल्लेख ही लिए जा सके।
उन्होंने कहा कि मंच हमारे लिए खुला था, लेकिन जिन लोगों का हम प्रतिनिधित्व करते हैं, उनकी आवाज़ उठाने के लिए उपलब्ध अवसरों का हम पूरी तरह उपयोग नहीं कर सके।"
वरिष्ठ सदस्यों का सदन कहे जाने वाली राज्य सभा की जिम्मेदारी को विशिष्ट बताते हुए सभापति ने कहा कि यह तर्कपूर्ण बहस, गरिमापूर्ण असहमति और विचारशील विधिनिर्माण की परंपरा को बनाए रखे। बार-बार होने वाले व्यवधान अंततः जनता के विश्वास और उनकी आकांक्षाओं को प्रभावित करते हैं। इसलिए हमें संसदीय आचरण के उच्चतम मानकों को बनाए रखने तथा इस संस्था की गरिमा और पवित्रता को सुरक्षित रखने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने इस सत्र के दौरान नव-निर्वाचित और मनोनीत सदस्यों के लिए आयोजित अभिमुखीकरण कार्यक्रम का भी जिक्र किया। इस दो दिवसीय इस कार्यक्रम में संसदीय कार्यप्रणाली, प्रक्रिया तथा सदस्यों से अपेक्षित आचरण के मानकों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। इस कार्यक्रम को संबोधित करने वालों में उप सभापति हरिवंश , मंत्री भूपेंद्र यादव तथा सदन के अनुभवी सदस्य घनश्याम तिवारी, प्रमोद तिवारी, अरुण सिंह, डॉ. सस्मित पात्रा, सुजीत कुमार और डॉ. जॉन ब्रिटास शामिल थे। इस कार्यशाला में 35 सदस्यों ने भाग लिया।
श्री राधाकृष्णन ने कहा कि इस सत्र की एक अन्य उल्लेखनीय विशेषता माननीय सदस्यों द्वारा प्रौद्योगिकी का बढ़ता हुआ उपयोग रहा। 'वाणी सेतु' के माध्यम से एआई-आधारित भाषा अनुवाद की सुविधा शुरू की गई। इसके द्वारा सदस्यों को पहली बार यह सुविधा मिली कि वे किसी क्षेत्रीय भाषा में दिए गए भाषण को अपनी पसंद की भाषा में सुन सकें। उन्होंने कहा, ' मुझे प्रसन्नता है कि सदस्यों ने इस सुविधा का लाभ उठाया है। सदस्यों ने त्वरित और सुरक्षित उपस्थिति दर्ज कराने तथा अन्य संसदीय कार्यों के लिए 'सदस्य सेतु' मोबाइल एप्लिकेशन का भी उपयोग किया है, जिससे सदन की कार्यप्रणाली अधिक सुलभ और प्रभावी बनी है।
उन्होंने सदन की कार्यवाही के संचालन में समापन संबोधन में उपसभापति तथा पीठासीन उपसभापतियों के पैनल के सदस्यों , राज्य सभा के महासचिव तथा उनके अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम के अथक प्रयासों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उनके सहयोग से सत्र के सुचारु संचालन को सुनिश्चित किया गया है।