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नई दिल्ली। कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) नियमों और संशोधनों को तत्काल वापस लेने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि ये कठोर नियम नागरिक समाज के संगठनों और अल्पसंख्यक संस्थानों की स्वायत्तता को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाते हैं।

श्री वेणुगोपाल ने पत्र के माध्यम से आरोप लगाया कि नए संशोधन नागरिक समाज संगठनों, विशेषकर अल्पसंख्यक संस्थानों द्वारा संचालित संगठनों की स्वायत्तता को कमजोर करते हैं और उनके नियमित कामकाज में बाधा उत्पन्न करेंगे। उन्होंने कहा कि मार्च 2026 में लोकसभा में एफसीआरए संशोधन विधेयक लाने का प्रयास विफल होने के बाद केंद्र सरकार अब नियमों के जरिए ऐसे प्रावधान लागू करने की कोशिश कर रही है, जिनसे जिन संस्थाओं का एफसीआरए लाइसेंस रद्द हो जाए या उसकी अवधि समाप्त हो जाए, उनकी संपत्तियों को जब्त करने का अधिकार सरकार को मिल सके।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि जिस प्रावधान को पहले संसद में कानून के रूप में लाने का प्रयास किया गया था, उसे अब नियमों के माध्यम से लागू किया जा रहा है। उनके अनुसार यह संसदीय प्रक्रिया को दरकिनार कर कार्यपालिका के जरिए निर्णय थोपने जैसा है। पत्र में श्री वेणुगोपाल ने कहा कि कठोर वित्तीय दंड के प्रावधान छोटे गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) को आर्थिक रूप से कमजोर करने का प्रयास हैं। वहीं, सोशल मीडिया खातों का अनिवार्य खुलासा करने की शर्त को उन्होंने "बढ़ती सरकारी निगरानी" करार दिया।

कांग्रेस ने इन संशोधनों को "दमनकारी" बताते हुए केंद्र सरकार से इन्हें तत्काल वापस लेने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि नागरिक समाज संगठनों और अल्पसंख्यक संस्थानों को बिना किसी भय या दबाव के स्वतंत्र रूप से कार्य करने का अवसर मिलना चाहिए।