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0 केन्द्रीय गृह अमित शाह ने नई दिल्ली में नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर  की 10वीं शीर्ष-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की
0 श्री शाह ने “मादक पदार्थ नियंत्रण पर विज़न डॉक्यूमेंट (2026-2029)” का विमोचन किया
0 श्री शाह ने‘ऑनलाइन ड्रग्स डिस्पोज़ल फोर्टनाइट कैंपेन' की शुरुआत भी की 
0 सभी राज्य एएनटीएफ को फुल-टाइम, डेडिकेटेड, इक्विप्ड और अकाउंटेबल यूनिट बनाए
0 विदेश में छिपे ड्रग तस्करों और गैंगस्टरों के खिलाफ रेड कार्नर नोटिस, प्रत्यर्पण की कार्रवाई तेज करने करें
0 केन्द्रीय गृह मंत्री ने “एनसीबी वार्षिक रिपोर्ट -2025” का विमोचन और जम्मू और गुवाहाटी में एनसीबी के ज़ोनल कार्यालयों का ई-उद्घाटन भी किया

नई दिल्ली। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में नार्को-को ऑर्डिनेशन सेंटर (एनसीओआरडी)  की 10वीं शीर्ष-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। केन्द्रीय गृह मंत्री ने “मादक पदार्थ नियंत्रण पर विज़न डॉक्यूमेंट (2026-2029)” और “एनसीबी वार्षिक रिपोर्ट -2025” का विमोचन और जम्मू और गुवाहाटी में NCB के ज़ोनल कार्यालयों का ई-उद्घाटन भी किया। श्री अमित शाह ने ‘ऑनलाइन ड्रग्स डिस्पोज़ल फोर्टनाइट कैंपेन' की शुरुआत भी की जिसमे 6,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के 2,09,500 किलोग्राम नशीले पदार्थों को नष्ट करने का लक्ष्य रखा गया है।

अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि आज हमारा देश नारकोटिक्स के खिलाफ लड़ाई के ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां पर आने वाले 3 साल यह तय करेंगे कि नशा हम पर विजय प्राप्त करेगा या हम नशे पर विजय प्राप्त करेंगे। उन्होंने कहा कि देश के आने वाले 100 वर्ष के भविष्य के लिए यह लड़ाई हमें दृढ़ता के साथ संयुक्त प्रयास से जीतनी चाहिए। यह लड़ाई कोई एक विभाग, राज्य, सरकार याव्यक्ति नहीं लड़ सकता बल्कि इसके लिए सभी राज्यों और उनके संबंधित विभागों को एक साथ एक मंच पर आना होगा। इस लड़ाई में हमें जनता को प्रेरित करने वाले संतों, देश का भविष्य तय करने वाले युवाओं और हमारी मातृशक्ति को भी जोड़ना पड़ेगा, तभी इस लड़ाई में हम पूरी तरह से सफल हो सकेंगे। श्री शाह ने कहा कि मादक पदार्थों की समस्या केवल कानून व्यवस्था और सार्वजनिक स्वास्थ्य का मुद्दा नहीं है बल्कि यह देश की आंतरिक सुरक्षा, सामाजिक स्थिरता, आर्थिक हितों की रक्षा और हमारी युवा पीढ़ी और उसके माध्यम से देश के भविष्य के साथ जुड़ी हुई समस्या है। इस समस्या पर संपूर्ण विजय प्राप्त करना भारत के सभी राज्यों का एक सामूहिक लक्ष्य होना चाहिए।

हमारे देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए इस पर विजय प्राप्त करनी है
श्री शाह ने कहा कि ड्रग तस्करी, संगठित अपराध, नार्को टेरर फाइनेंस और सीमापार के आतंकी नेटवर्क के वित्त पोषण के साथ यह समस्या एक इवोल्विंग नार्को टेररिज्म ईकोसिस्टम भी बन चुकी है। हमारे देश की आंतरिक सुरक्षा, अर्थतंत्र और युवा पीढ़ी के भविष्य की सुरक्षा के लिए हमें इस समस्या पर पूर्ण विजय प्राप्त करनी ही होगी। हम डेथ ट्राइएंगल और डेथ क्रिसेंट  के बीच में स्थित हैं और ड्रोन-आधारित ड्रॉप्स, समुद्री मार्गों से कंटेनराइज्ड कार्गो, डार्कनेट, क्रिप्टो पेमेंट, ऑर्डर टू डिलीवरी मॉडल, पार्सल का उपयोग आदि तरीकों से ड्रग का कारोबार करने वालों ने हमारी लड़ाई को और कठिन बना दिया है। नार्को ऑफेंडर्स आज टेक्नोलॉजी से सक्षम बन कर नेटवर्क आधारित बन चुके हैं और मल्टी-डोमेन अपराध के रूप में आज हमारे सामने खड़े हैं। इस कठिन लड़ाई के प्रति हमारी प्रतिक्रिया भी सामूहिक और संगठित, रोडमैप आधारित और आधुनिक और इंटेलिजेंस लीड-बेस्ड होनी चाहिए। हमारी अप्रोच टेक्नोलॉजी ड्रिवन होनी चाहिए और हमें रूथलेस अप्रोच के साथ नेटवर्क-सेंट्रिक लड़ाई लड़नी होगी तभी हम इस समस्या के खिलाफ विजय प्राप्त कर सकते हैं।

हमें ड्रग का व्यापार करने वालों के प्रति रूथलेस अप्रोच रखनी है
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि हमें ड्रग का व्यापार करने वालों के प्रति रूथलेस अप्रोच रखनी है और ड्रग के विक्टिम के प्रति सिंपेथेटिक अप्रोच रखनी है। उन्होंने कहा कि हमारी सद्भावना ही उन विक्टिम बच्चों को फिर से सामान्य जीवन के साथ जोड़ सकती है और हमें उनकी अंगुली पकड़ कर सही रास्ते पर ले जाने का काम करना होगा। श्री शाह ने कहा कि आज यहां पर किए गए प्रस्तुतिकरण में बहुत स्पष्ट रूप से चार स्तंभों के अंदर हमारी लड़ाई को व्याख्यायित किया गया है और हर स्तंभ के अंदर उसके उपस्तंभ भी तय किए गए हैं। हर उपस्तंभ के अंदर लक्ष्य और इसे प्राप्त करने की तिथि को भी चिन्हित कर दिया गया है। एक साल बाद इस योजना का हम पुनरीक्षण करेंगे और इसे रीडिफाइन कर अंतिम 2 साल की लड़ाई के लिए हम आगे बढ़ेंगे।

नसीबी की वार्षिक रिपोर्ट का विमोचन किया 
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि आज यहां एनसीबी की वार्षिक रिपोर्ट का भी विमोचन किया गया है। इसके साथ-साथ नशामुक्त भारत के रोडमैपके विजन डॉक्यूमेंट का भी आज विमोचन हुआ है। एनसीबी के गुवाहाटी और जम्मू ज़ोनल कार्यालयों का भी आज लोकार्पण किया गया। आज तक ज़िलास्तरीय एनकॉर्ड की 15876 बैठक हो चुकी हैं, राज्य स्तर की 266 बैठक हो चुकी हैं, एग्जीक्यूटिव स्तर पर सात बैठक कर चुके हैं और शीर्ष स्तर पर आज हम 10वीं बैठक कर रहे हैं। सभी राज्यों के मुख्य सचिव और पुलिस प्रमुख एनकॉर्ड बैठकों को परिणामलक्षित बनाने के लिए भी प्रयास करें।

पीएम मोदी ने विकसित भारत के साथ नशामुक्त भारत का भी लक्ष्य रखा है 
श्री शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने 2047 में विकसित भारत का एक लक्ष्य रखा है और नशामुक्त भारत का लक्ष्य भी प्रधानमंत्री जी ने हमें दिया है। प्रधानमंत्री मोदी जी द्वारा दिए गए इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 2026 से 2029 तक का रोडमैप चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है। पहला स्तंभ –एनफोर्समेंट, इंटेलीजेंस और ऑपरेशंस। इसका उद्देश्य है कि पूरे नेटवर्क पर लक्षित इंटेलिजेंस लीड कार्रवाई करें और नेटवर्क को नष्ट कर दें। दूसरा स्तंभ है –प्रीकर्सर एवं सिंथेटिक ड्रग कंट्रोल। हमें उत्पादन स्तर पर ही नशे को रोकने की रणनीति अपनानी पड़ेगी। तीसरा स्तंभ- डिमांड और हार्म रिडक्शन के अभियान को समाज, शिक्षा और पुनर्वसन के माध्यम से हमें आगे बढ़ाना होगा। कैपेसिटी, बिल्डिंग, को-ऑर्डिनेशन और मॉनिटरिंग के चौथे स्तंभ की रचना तंत्र को सक्षम, समन्वित, जवाबदेह और आधुनिक बनाने के लिए की गई है। यह रोडमैप व्होल ऑफ गवर्नमेंट एप्रोच   और व्होल ऑफ सोसाइटी एप्रोच को ध्यान में रखकर बनाया गया है।इस रोडमैप में भारत के हर नागरिक का रोल समाहित किया गया है, लेकिन नागरिकों को प्रेरित करने का काम सभी राज्य सरकारें और भारत सरकार के सभी विभागों के सचिवों को करना पड़ेगा। इस रोडमैप की सफलता और लक्ष्यों की समय पर सिद्धि की जिम्मेदारी भी साझा है और उसकी निगरानी की भी व्यवस्था तय की गई है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई वर्णन हम तीन शब्दों में कर सकते हैं –Detect, Disrupt और Destroy। हमने सीमावर्ती और संवेदनशील जिलों में HUMINT,टेक्निकल इंटेलिजेंस और कम्युनिटी पुलिसिंग के माध्यम से हमें - विदेश से देश में ड्रग पहुंचाने वाले, देश में उसे राज्यों तक पहुंचाने वाले और राज्यों से उपयोगकर्ता तक पहुंचाने वाले - तीनों प्रकार के कार्टेल को नष्ट करने के लिए आगे बढ़ना होगा। डार्क वेब मॉनिटरिंग, हवाला, क्रिप्टो ट्रांजैक्शन, पोर्ट और एयरपोर्ट के उपयोग पर हमारी सभी वित्तीय एजेंसियों को अपनी पूरी क्षमता के साथ समन्वित तरीके से काम कर एक साझा कार्यक्रम तैयार करना पड़ेगा। Disrupt के तहत नशे का व्यापार करने वालों के सोर्स ट्रांजिट, फाइनेंस और लीडरशिप के हर लेवल पर हमें कानून के तहत आघात करना पड़ेगा। अवैध फसलों को नष्ट करने के लिए हमें एक अभियान चलाना होगा। अवैध प्रयोगशालाओं को ढूंढने का एक तंत्र एजेंसियों को विकसित करना पड़ेगा और उन्हें कठोरता के साथ नष्ट करना पड़ेगा। नई पद्धति के कंट्रोल डिलीवरी ऑपरेशन का हमें उपाय भी ढूंढना पड़ेगा और इस उपाय में सतत पर्वर्तन करते हुए इसकी मॉनिटरिंग कर हमें इसे लॉजिकल एंड तक ले जाना पड़ेगा। श्री शाह ने कहा कि PMLA और ED के माध्यम से नशे के व्यापारियों के फाइनेंशियल इन्वेस्टिगेशन को भी हमें बहुत रूथलेसली करना पड़ेगा और इसके माध्यम से उनके नेटवर्क को छिन्न-भिन्न करने की जिम्मेदारी भी हमारी है। Destroy के तहत ध्वस्त किया गया नेटवर्क दोबारा खड़ा ना हो, इस तरह से हम इसे रूथलेसली समाप्त करें। जो पकड़ा गया जो kingpin है वो छूटना नहीं चाहिएऔर इसके लिए हमारे कानूनों में सभी प्रावधान उपलब्ध हैं। De-addiction और rehabilitation के माध्यम से हमें सप्लाई साइड को कम कर इनको डिस्ट्रॉय करने की दिशा में आगे बढ़ना पड़ेगा। Detect, Disrupt और Destroy इन तीन शब्दों के आधार पर इस पूरे रोडमैप की रचना की गई है।
अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार के सभी मंत्रालयों, राज्यों और सभी विभागों को नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को जमीन पर उतारने के लिए सामूहिक रूप से आगे बढ़ना पड़ेगा। बड़े NDPS के मामले में वित्तीय जांच को राज्य के पुलिस प्रमुखों को अनिवार्य करना होगा। Proceed of Crime, उसकी पहचान, फ्रीज करना, seize करना और उसे जेल से बाहर न आने देने तक की पूरी प्रक्रिया को एविडेंस बेस्ड और आधुनिक तकनीक से लैस करनी होगी। गृह मंत्रालय ने सभी हाई कोर्ट के साथ भी इस विषय को उठाया है कि स्पेशल कोर्ट्स बनें, कोर्ट्स के न्यायमूर्ति की संख्या पर्याप्त हो और सजा तय करने के लिए बड़े केस की प्रतिदिन सुनवाई करने को प्राथमिकता दी जाए। जब तक रियल टाइम शेयरिंग सुनिश्चित नहीं करते हैं तब तक follow the money trail हम नहीं कर पाएंगे और इसीलिए रियल टाइम शेयरिंग को हमें सुनिश्चित करना पड़ेगा।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि Precursors और साइकोट्रॉपिक पदार्थ की शेड्यूलिंग को भी हमें एक बार देखना होगा और नार्को फाइनेंस के विरुद्ध प्रभावी कार्यवाही भी हमें सुनिश्चित करनी पड़ेगी। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय को नशामुक्त भारत अभियान और जन जागरूकता अभियान, सामुदायिक सहभागिता और उपचार पुनर्वास सेवाओं का विस्तार करना होगा तभी हम मांग को कम कर सकते हैं। फार्मास्यूटिकल डायवर्जन और ऑनलाइन फार्मेसी की निगरानी को स्वास्थ्य मंत्रालय को सुनिश्चित करना होगा। शिक्षा मंत्रालय के तहत माध्यमिक शिक्षा और उच्च शिक्षाविभागों को ड्रग-फ्री कैंपस का फ्रेमवर्क अडॉप्ट करना होगा। सबकी सहमति से इस कांसेप्ट को आगे बढ़ाते हुए अभिभावकों औरशिक्षकों की जागरूकता को भी हमेंसुनिश्चित करनाहोगा।

श्री अमित शाह ने कहा कि NCRB, NFSU, DFSS, I4C और NATGRID को कार्टेल आइडेंटिफिकेशन के लिए अपने-अपने स्तर पर बहुत सारे काम करने होंगे। राज्यों को ANTFs को फुल टाइम बनाना चाहिए औरdedicated, resourced, equipped और accountable यूनिट के रूप में इसे परिवर्तित करने के लिए राज्यों के पुलिस प्रमुख को काम करना चाहिए। ड्रग्स की commercial quantity के मामले में फाइनेंशियल इन्वेस्टिगेशन तथा backward-forward linkage हमारी इन्वेस्टिगेशन का अहम हिस्सा होना चाहिए क्योंकि इसके बिना हम तंत्र को नष्ट नहीं कर सकते। राज्य और ज़िला स्तरीय NCORD बैठकों को output-oriented बनाना चाहिए और इसकी मॉनिटरिंग भी बहुत अच्छे तरीके से करनी चाहिए। Strong chargesheet और effective prosecution के लिए स्पेशल पब्लिक प्रोसीक्यूटर रखने की दिशा में हमें आगे बढ़ना चाहिए और exclusive NDPS कोर्ट के लिए राज्य के पुलिस प्रमुख, अपने गृह विभाग के माध्यम से हाई कोर्ट को अप्रोच कर आगे बढ़ें। Demand reduction, treatment, rehabilitation, awareness, अभिभावकों, प्राध्यापकों और शिक्षकों की जागरूकताके लिए भी राज्यों को हर विभाग में एक नोडल अधिकारी तय करना चाहिए। इसके साथ ही, CBI के माध्यम से हमने भगोड़ों को वापस लाने का एक अभियान शुरू किया है जिसमें हमें बहुत अच्छी सफलता मिली है। राज्य सरकारों से भी अनुरोध है जो आपके राज्य के ड्रग्स या गैंगस्टर का काम करने वाले लोग विदेश में छिप कर बैठे हैं, उनके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी कर, सीबीआई का उपयोग कर और एजेंसियों के माध्यम से उनको वापस लाने की प्रक्रिया शुरू करें।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि 2004 से 2014 तक 40000 करोड़ रूपए के मूल्य की 26 लाख किलोग्राम सिंथेटिक ड्रग जब्त किए गए थे जबकि 2014 से 2026 तक 1 लाख 84 हज़ार करोड़ रूपए मूल्य की 1 करोड़ 18 लाख किलोग्राम ड्रग्स ज़ब्त की गई, यह बताता है कि हमारा अभियान सफलता की दिशा में आगे बढ़ रहा है।2004 से 2014 में 8000 करोड़ रूपए मूल्य की 3,26,000 किलोग्रामड्रग्स को नष्ट किया गया जबकि 2014 से 2026 के बीच 89,896 करोड़ रूपए मूल्य की 42,47,000 किलोग्राम ड्रग को हमने नष्ट किया। इसी प्रकार अवैध खेती के विनष्टीकरण को हमने लगातार बढ़ाया है। 2020 में 10,000 एकड़ अवैध अफीम की खेती विनष्ट की गई 2025 में हमने 42,282 एकड़ अवैध खेती को विनष्ट किया। 2004 से 2014 तक 173000 केस हुए थे जिनमें 195000 गिरफ्तारियां की गई थीं। 2014 से 2026 में 8,75,000 केस रजिस्टर किए गए हैं और 10,97,000 लोगों की गिरफ्तारियां हुई है। ये आंकड़े बताते हैं कि जब हम प्रयास करते हैं तो सफलता जरूर मिलेगी। मोदी सरकार ने प्रयास को स्पेसिफिक किया है, लक्ष्य को केंद्रित किया है, टाइम बाउंड भी किया है और ड्रग के खिलाफ लड़ाई के सभी प्रकार के बिंदुओंको आइडेंटिफाई कर हमने यह रोडमैप बनाया है।

श्री अमित शाह ने कहा कि अगर हम इस लड़ाई को मिलकर और एकजुट होकर लड़ते हैं तो निश्चित रूप से विजय हमारी होगी। तीन साल के अंदर हम भारत में ड्रग्स के नेटवर्क को समाप्त करने की दिशा में बहुत आगे बढ़ जाएंगे। इन तीन साल में हम सब एक लक्ष्य को तय कर सामूहिक प्रयास से मेहनत करें, समयसीमा और साझा रणनीति के साथ लक्ष्य तय करें तो हमारी विजय सुनिश्चित है।

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