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तेहरान। ईरानी विदेश मंत्रालय ने बुधवार को देश के दक्षिणी तटीय क्षेत्र में स्थित निगरानी एवं पर्यवेक्षण केंद्रों पर अमेरिकी सैन्य हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने के परिणामों के लिए अमेरिका जिम्मेदार होगा।

विदेश मंत्रालय ने जारी बयान में कहा कि बुधवार तड़के अमेरिकी सेना ने ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित कई निगरानी और पर्यवेक्षण केंद्रों पर हमला किया, जो संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का स्पष्ट उल्लंघन है।मंत्रालय ने कहा कि ये हमले पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के पहले प्रावधान का भी घोर उल्लंघन हैं, जिसमें सभी सैन्य कार्रवाइयों को रोकने का प्रावधान किया गया था।

बयान में कहा गया कि अमेरिकी वित्त मंत्रालय द्वारा एक रात पहले ईरान के तेल निर्यात की अनुमति वापस लेने, होर्मुज जलडमरूमध्य से संबंधित व्यवस्थाओं के उल्लंघन तथा लेबनान के खिलाफ इज़रायल की जारी सैन्य कार्रवाई और आतंकवादी गतिविधियों ने समझौते के महत्वपूर्ण और बुनियादी प्रावधानों को निष्प्रभावी बना दिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा, "इस खतरनाक तनाव वृद्धि के परिणामों की पूरी जिम्मेदारी संधि का उल्लंघन करने वाले अमेरिकी शासन की होगी।"

मंत्रालय ने कहा कि सभी देशों, विशेषकर फारस की खाड़ी के दक्षिणी तटवर्ती पड़ोसी देशों का अंतरराष्ट्रीय कानूनी दायित्व है कि वे किसी भी आक्रामक देश को अपने क्षेत्र या सुविधाओं का उपयोग ईरान के विरुद्ध शत्रुतापूर्ण कार्रवाई के लिए न करने दें। बयान में कहा गया कि ईरान के खिलाफ किसी भी आक्रामक कार्रवाई में सहयोग करना उस अपराध में साझेदार और सहभागी बनने के समान होगा। विदेश मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और संयुक्त राष्ट्र महासचिव से भी क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा बनाये रखने की अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने का आग्रह किया।

मंत्रालय ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत आत्मरक्षा के अधिकार का प्रयोग करते हुए ईरान के सशस्त्र बल देश की क्षेत्रीय अखंडता, राष्ट्रीय संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए किसी भी अमेरिकी सैन्य आक्रामकता का जवाब देने से नहीं हिचकिचाएंगे तथा किसी भी हमले के स्रोत को निशाना बनायेंगे।