Head Office

SAMVET SIKHAR BUILDING RAJBANDHA MAIDAN, RAIPUR 492001 - CHHATTISGARH

tranding

0 एनपीसीआई ने कहा-एनआरआई के साथ तैयार हो रहा ग्लोबल नेटवर्क 

नई दिल्ली। भारत के हर जगह मौजूद मोबाइल पेमेंट नेटवर्क को चलाने वाली कंपनी नेशनल पेमेेंट्स कार्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) दुनिया भर में अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए विदेशों में बसे भारतीयों का सहारा लेने की योजना बना रही है। इसका मकसद इस प्लेटफॉर्म को देशों के बीच पैसे के लेन-देन का पसंदीदा जरिया बनाना है।

एनपीसीआई के सीईओ दिलीप असबे ने कहा कि क्या अगले 10 सालों में 15-20 बाजारों में पहुंचना मुमकिन है? मुझे लगता है कि यह बाज़ार में उतरने का एक बहुत अच्छा तरीका है। एनपीसीआई ने ही यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) बनाया है। उन्होंने आगे कहा कि जिस तरह भारत घरेलू पेमेंट के मामले में आत्मनिर्भर है, उसी तरह हम दूसरे देशों के साथ होने वाले पेमेंट (क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट) के मामले में भी आत्मनिर्भर बनना चाहते हैं।
एनपीसीआई जापान, मलेशिया और बहरीन जैसे देशों के साथ बातचीत कर रही है। उन्होंने कहा कि जियोपॉलिटिकल और रेगुलेटरी असर की वजह से इन देशों की सरकारों और सेंट्रल बैंकों का फ़ैसला ही आखिरी होगा। अस्बे ने यह भी बताया कि एनपीसीआई  ‘एजेंटिक एआई’ पर भी काम कर रही है, ताकि ओपनएआई के चैटजीपीटी और अल्फाबेट इंक के जेमिनी जैसे प्लेटफ़ॉर्म के जरिए पेमेंट किया जा सके।

यूपीआई के जरिए आसान होगा विदेशी पेमेंट
इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड के अनुसार, ट्रांजैक्शन वॉल्यूम के मामले में यूपीआई दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम है। इसने भारत में रोज़मर्रा के पेमेंट के तरीके को बदल दिया है। अब यूज़र्स मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल करके बैंक अकाउंट्स के बीच तुरंत पैसे ट्रांसफर कर सकते हैं और कई ट्रांजैक्शन के लिए उन्हें कार्ड नेटवर्क की ज़रूरत नहीं पड़ती। एनपीसीआई अब यूपीआई को विदेशी पेमेंट सिस्टम से जोड़कर विदेशों में भी वैसी ही कामयाबी हासिल करना चाहता है। इसके लिए शुरुआत में उन देशों पर ध्यान दिया जाएगा जहाँ बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं और जहाँ से दुनिया में सबसे ज़्यादा रेमिटेंस (विदेश से भेजा गया पैसा) आता है। भारत में गूगल पे और फोनपे जैसे ऐप्स पेमेंट प्रोसेस करने के लिए यूपीआई का इस्तेमाल करते हैं, जबकि एप्पल पे अभी घरेलू पेमेंट के लिए लॉन्च नहीं हुआ है।

यूपीआई बिजनेस मॉडल में बदलाव संभव
एनपीसीआई की रणनीति का मकसद भारत के 3.5 करोड़ प्रवासी लोगों तक पहुंचना है। इन लोगों ने मार्च में खत्म हुए फाइनेंशियल ईयर में 155 अरब डॉलर से ज़्यादा रकम भारत भेजी, जो दुनिया भर में सबसे ज़्यादा रेमिटेंस है। विदेशी भारतीयों ने बाज़ार में मुश्किल समय के दौरान खास डिपॉज़िट स्कीम के ज़रिए देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मज़बूत करने में भी मदद की है। अस्बे ने कहा कि प्रवासी लोगों की संख्या बढ़ेगी, यात्रा बढ़ेगी और व्यापार भी बढ़ेगा। यह विदेशी विस्तार ऐसे समय में हो रहा है जब देश में यूपीआई का बिज़नेस मॉडल बदल रहा है। गुरुवार को संसद के निचले सदन ने एक कानून को मंज़ूरी दी, जिससे बैंक और दूसरे पेमेंट प्रोवाइडर यूपीआई ट्रांज़ैक्शन पर चार्ज लगा सकेंगे। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि एनपीसीआई ने अभी तक किसी भी चार्ज के बारे में कोई फ़ैसला नहीं लिया है। एनपीसीआई के प्रवक्ता ने इस पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

ग्लोबल पेमेंट सिस्टम में भारत की पहल
यह विस्तार सिंगापुर, फ्रांस और संयुक्त अरब अमीरात समेत नौ देशों में यूपीआई की मौजूदगी को और बढ़ाएगा। अभी यूपीआई सिंगापुर और नेपाल के बीच पर्सन-टू-पर्सन रेमिटेंस की सुविधा देता है, जबकि ग्रीस से इनवर्ड रेमिटेंस (पैसे आने) की सुविधा भी उपलब्ध है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और बैंकों द्वारा स्थापित एनपीसीआई देश के रिटेल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को चलाता है। यूपीआई के अलावा, यह रूपे कार्ड नेटवर्क भी चलाता है, जो वीसा इंक और मास्टरकार्ड इंक का घरेलू विकल्प है। एनपीसीआई नामीबिया, पेरू और त्रिनिदाद और टोबैगो जैसे विकासशील देशों को भी यह टेक्नोलॉजी एक ‘पब्लिक गुड’ के तौर पर उपलब्ध करा रहा है, ताकि वे भी ऐसा ही सिस्टम बना और चला सकें।
यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब देश अपने पेमेंट सिस्टम पर ज़्यादा कंट्रोल चाहते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों ने रूस को स्वीफ्ट इनेंशियल मैसेजिंग सिस्टम से अलग कर दिया है और उसके विदेशी मुद्रा भंडार का एक बड़ा हिस्सा फ्रीज़ कर दिया है। अस्बे ने कहा, कोई भी सरकार पेमेंट सिस्टम जैसे अहम कामों के लिए ज़रूरत से ज़्यादा निर्भरता नहीं चाहेगी। पेमेंट सिस्टम का इस्तेमाल हथियार के तौर पर किया गया है।