नई दिल्ली। लोक सभा में बुधवार को हंगामे के बीच बिना चर्चा के खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।
विद्यार्थियों के खिलाफ राजधानी में 20 जुलाई को पुलिस कार्रवाई की जवाबदेही तय करने और अयोध्या के राममंदिर में चढ़ावा चोरी की जांच की मांग को लेकर विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच पीठासीन जगदम्बिका पाल ने कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी को चर्चा और पारित कराने के लिए विधेयक पेश करने की अनुमति दी।
इसके बाद श्री पाल ने विधेयक पर संशोधन पेश करने की नोटिस देने वाले सदस्यों के नाम पुकारे। रिवाेल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) के एन के प्रेमचंद्रन इस पर व्यवस्था का प्रश्न उठाने का प्रयास किया, जिसकी श्री पाल ने अनुमति नहीं दी।
किसी सदस्य के संशोधन पेश नहीं करने पर श्री पाल ने विधेयक पारित कराने का प्रस्ताव करने के लिए श्री रेड्डी का नाम पुकारा। इसके बाद विधेयक ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।
यह विधेयक खनिज अधिकार, कराधान और खनन को नियंत्रित करने वाले मौजूदा फ्रेमवर्क में बदलाव करने की कोशिश करता है, जिसमें कुछ प्रावधान ज़्यादा केन्द्रीय निगरानी का प्रस्ताव करते हैं। प्रस्तावित बदलावों में से एक राज्य की खनिज वाली ज़मीन पर कुछ उपकर, कर या शुल्क लगाने की अधिकार से जुड़ा है। विधेयक में यह प्रावधान है कि राज्यों को खास लेवी लगाने से पहले केंद्र से मंज़ूरी लेनी पड़ सकती है। इसमें प्रस्तावित बदलावों से पहले लगायी गयी लेवी से जुड़े प्रावधान भी हैं, जिसमें एक ऐसा व्यवस्था भी शामिल है जिसके तहत कुछ ऐसी लेवी जो वापस नहीं मिली हैं, जो अमान्य हो सकती हैं।
यह कानून खनन लाइसेंसिंग फ्रेमवर्क को आसान बनाने और गहरे और ज़रूरी खनिजों के ब्लॉक्स की नीलामी और विकास में निजी कंपनियों और केन्द्रीय एजेंसियों की ज़्यादा भागीदारी को बढ़ावा देने की भी कोशिश करता है। ये प्रस्तावित बदलाव ऐसे समय में आये हैं, जब सरकार मैन्युफैक्चरिंग, एनर्जी ट्रांज़िशन और स्ट्रेटेजिक सेक्टर्स के लिए ज़रूरी माने जाने वाले मिनरल्स की घरेलू खनन और उत्पादन बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
विधेयक के उद्देश्यों के अनुसार संघ एमएमडीआर अधिनियम के अधीन केंद्र सरकार द्वारा विहित प्रावधानों के अनुसार खनिज सामग्री वाले खनिज धारक भू-क्षेत्रों के विनियमन को अपने नियंत्रण में लेगा। यह मौजूदा उपबंध के अतिरिक्त है, जो खानों के विनियमन और खनिजों के विकास पर संघ के नियंत्रण की घोषणा करता है। इसके अलावा एमएमडीआर अधिनियम में एक नयी धारा 9ख को अंतः स्थापित करना, जिसमें यह उपबंध है कि ऐसी शर्तों या निबंधनों के अनुसार, जो केंद्रीय सरकार द्वारा विहित किये जायें, के सिवाय, राज्य सरकार द्वारा खनिज अधिकार या खनिज धारक भू-क्षेत्र, या तो खनिज की मात्रा, खनिज के मूल्य या संदेश स्वामित्व पर या अन्यथा आधारित हो, पर कोई कर, उपकर या अन्य उद्ग्रहण (चाहे किसी भी नाम से ज्ञात हो) अधिरोपित नहीं किया जाएगा।
इस विधेयक के लागू होने से क्षेत्र में राजकोषीय व्यवस्था में निश्चितता, स्थिरता और पूर्वानुमान प्रदान करने का प्रयास करते हैं, जिससे राष्ट्रीय आर्थिक विकास को गति मिलेगी।प्रस्तावित बदलावों में से एक राज्य की खनिज वाली ज़मीन पर कुछ उपकर, कर या शुल्क लगाने की अधिकार से जुड़ा है। विधेयक में यह प्रावधान है कि राज्यों को खास लेवी लगाने से पहले केंद्र से मंज़ूरी लेनी पड़ सकती है। इसमें प्रस्तावित बदलावों से पहले लगायी गयी लेवी से जुड़े प्रावधान भी हैं, जिसमें एक ऐसा व्यवस्था भी शामिल है जिसके तहत कुछ ऐसी लेवी जो वापस नहीं मिली हैं, जो अमान्य हो सकती हैं।
यह कानून खनन लाइसेंसिंग फ्रेमवर्क को आसान बनाने और गहरे और ज़रूरी खनिजों के ब्लॉक्स की नीलामी और विकास में निजी कंपनियों और केन्द्रीय एजेंसियों की ज़्यादा भागीदारी को बढ़ावा देने की भी कोशिश करता है। ये प्रस्तावित बदलाव ऐसे समय में आए हैं जब सरकार मैन्युफैक्चरिंग, एनर्जी ट्रांज़िशन और स्ट्रेटेजिक सेक्टर्स के लिए ज़रूरी माने जाने वाले मिनरल्स की घरेलू खनन और उत्पादन बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
विधेयक के उद्देश्यों के अनुसार संघ एमएमडीआर अधिनियम के अधीन केंद्र सरकार द्वारा विहित प्रावधानों के अनुसार खनिज सामग्री वाले खनिज धारक भू-क्षेत्रों के विनियमन को अपने नियंत्रण में लेगा। यह मौजूदा उपबंध के अतिरिक्त है, जो खानों के विनियमन और खनिजों के विकास पर संघ के नियंत्रण की घोषणा करता है। इसके अलावा एमएमडीआर अधिनियम में एक नयी धारा 9ख को अंतः स्थापित करना, जिसमें यह उपबंध है कि ऐसी शर्तों या निबंधनों के अनुसार, जो केंद्रीय सरकार द्वारा विहित किये जायें, के सिवाय, राज्य सरकार द्वारा खनिज अधिकार या खनिज धारक भू-क्षेत्र, या तो खनिज की मात्रा, खनिज के मूल्य या संदेश स्वामित्व पर या अन्यथा आधारित हो, पर कोई कर, उपकर या अन्य उद्ग्रहण (चाहे किसी भी नाम से ज्ञात हो) अधिरोपित नहीं किया जाएगा।
इस विधेयक के लागू होने से क्षेत्र में राजकोषीय व्यवस्था में निश्चितता, स्थिरता और पूर्वानुमान प्रदान करने का प्रयास करते हैं, जिससे राष्ट्रीय आर्थिक विकास को गति मिलेगी।
इसके बाद श्री पाल ने राजधानी में 20 जुलाई को प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों के खिलाफ कार्रवाई की जवाबदेही तय करने और अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावा चोरी की जांच की मांग को लेकर हंगामा कर रहे विपक्षी सदस्यों से अपने-अपने स्थानों पर जाने और राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) और उससे जुड़े मामलों पर चर्चा शुरू कराने में सहयोग करने की अपील की। उनकी अपील का शोरगुल कर रहे सदस्यों पर कोई असर नहीं हुआ तो उन्होंने कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी।