Head Office

SAMVET SIKHAR BUILDING RAJBANDHA MAIDAN, RAIPUR 492001 - CHHATTISGARH

tranding

नई दिल्ली। राज्यसभा ने राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम विधेयक 2026 को बुधवार को कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष के बहिर्गमन के बीच ध्वनिमत से पारित कर दिया जिससे इस पर संसद की मुहर लग गयी। लोकसभा इस विधेयक को पहले ही पारित कर चुकी है।

द्रमुक के तिरूचि शिवा ने विधेयक के कुछ प्रावधानों में संशोधन के प्रस्ताव दिये थे जिन्हें सदन ने ध्वनिमत से खारिज कर दिया। कांग्रेस ने विधेयक को सहकारिता मंत्री अमित शाह के स्थान पर सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल द्वारा पेश किये जाने का विरोध किया। इस मुद्दे पर नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे तथा नेता सदन जगत प्रकाश नड्डा के बीच तकरार भी हुई। इसके बाद कांग्रेस और कुछ विपक्षी दलों के सदस्य सदन से बहिर्गमन कर गये। विधेयक पर हुई चर्चा और उस पर श्री मोहोल के संक्षिप्त जवाब के बाद सदन ने विधेयक ध्वनिमत से पारित कर दिया।

श्री मोहोल ने कहा कि इस विधेयक में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम 1962 में संशोधन किया गया है और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम की स्थापना इसका मूल बिन्दू है। उन्होंने कहा कि इससे देश में सहकारी क्षेत्र का विकास और विस्तार होगा तथा सहकारी इकोसिस्टम मजबूत बनेगा। यह नये अवसर उपलब्ध करायेगा जिससे सहकारिता क्षेत्र को नयी गति मिलेगी जिससे आर्थिक तथा सामाजिक विकास को बढावा मिलेगा। उन्होंने कांग्रेस नेताओं पर तंज करते हुए कहा कि जो लोग गरीबी और किसानों तथा लोक कल्याण के बारे में बोलते हैं वह अभी सदन में नहीं हैं।
राज्य मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में देश की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नये सहकारिता मंत्रालय का गठन कर देश में सहकार से समृद्धि के मूल मंत्र को राष्ट्र की मुख्यधारा से जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि देश में सहकारी तंत्र से 30 करोड़ लोग जुड़े हुए हैं।

सरकार ने पिछले पांच वर्षों में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये हैं जिनमें तीन हजार करोड़ रुपये की लागत से प्राथमिक सहकारी समितियों 'पैक्स' का कंप्यूटरीकरण किया जा रहा है। देश भर में पैक्स के माध्यम से 25 व्यवसाय किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश भर में दो लाख पैक्स बनाने का लक्ष्य रखा गया है और इसमें से 40 हजार बन गये हैं। इस क्षेत्र में अगले 20 वर्ष के कामकाज की रूपरेखा के लिए नयी सहकारिता नीति बनायी गयी है। सरकार ने पिछले पांच वर्षों में भारत टैक्सी जैसी 163 नयी पहल की हैं।

श्री मोहाेल ने सदस्यों की आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि इस संशोधन विधेयक से राज्यों की स्वायतत्ता प्रभावित नहीं होगी और राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम किया जायेगा। उन्होंने कहा कि विधेयक में सहकारिता की मूल भावना को बनाये रखते हुए इसे मौजूदा जरूरतों के अनुरूप और सक्षम बनाने का प्रयास किया गया है। विधेयक के प्रावधानों से किसानों के जीवन में समृद्धि आयेगी। किसानों को बीज से बाजार तक की मूल्य श्रंखला उपलब्ध करायी गयी है। उन्होंने कहा कि विधेयक में किसी भी अतिरिक्त वित्तीय सहायता का प्रस्ताव नहीं किया गया है और अप्रासंगिक प्रावधानों को इसमें हटाया गया है।

विधेयक में यह प्रावधान किया गया है कि निगम निर्दिष्ट क्षेत्रों में सहकारी विकास के कार्यक्रमों की योजना बनायेगा, उन्हें बढ़ावा देगा और उनका वित्तपोषण करेगा। सहकारी विकास का अर्थ है, सहकारी समितियों को प्रत्यक्ष या किसी मध्यस्थ के जरिए सहायता प्रदान करना। अधिनियम में खाद्य पदार्थों में अंडे, दूध, मांस और सब्ज़ियों जैसी चीज़ें शामिल थी जबकि संशोधन के बाद इसका दायरा बढ जायेगा और इसमें प्रसंस्कृत भोजन और अन्य खाद्य पदार्थ तथा केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित कोई अन्य खाद्य सामग्री भी शामिल की गयी है।

विधेयक निगम को औद्योगिक वस्तुओं से जुड़ी गतिविधियों की भी अनुमति देता है। विधेयक में संबंधित संस्थाओं के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित होने की अनिवार्यता को समाप्त किया गया है।