0 आरबीआई एमपीसी के सदस्यों ने दिए संकेत, मिनट्स में इजाफे की संभावना जताई गई है
मुंबई/नई दिल्ली। आने वाले महीनों में महंगाई बढ़ने की आशंका के बीच भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति के सदस्यों ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी के संकेत दिए हैं। अगस्त में हुई मौद्रिक नीति समिति की बैठक के ब्योरे से पता चलता है कि महंगाई की स्थिति को देखते हुए चालू वित्त वर्ष में रीपो रेट बढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है।
छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति ने अगस्त की बैठक में लगातार चौथी बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया था। फिलहाल नीतिगत रेपो दर 5.25 फीसदी पर बनी हुई है।
तीसरी तिमाही में 5.9% तक पहुंच सकती है महंगाई
ब्याज दर बढ़ाने का सबसे स्पष्ट संकेत आरबीआई की डिप्टी गवर्नर और मौद्रिक नीति विभाग की प्रभारी पूनम गुप्ता ने दिया। उनके मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 की तीसरी तिमाही में मुख्य महंगाई दर बढ़कर 5.9 फीसदी तक पहुंच सकती है। अगर महंगाई अनुमान के मुताबिक बढ़ती है तो चालू वित्त वर्ष के दौरान ब्याज दर में बढ़ोतरी की जरूरत पैदा हो सकती है। हालांकि, अगस्त की बैठक में समिति ने मौजूदा ब्याज दर को बरकरार रखने का फैसला किया। इससे आरबीआई को महंगाई और आर्थिक वृद्धि से जुड़े नए आंकड़ों का आकलन करने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।
इस साल अब तक मुख्य महंगाई औसतन 3.93 फीसदी रही
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि पिछले वित्त वर्ष में औसत महंगाई केवल 2 फीसदी थी। इसी अवधि में नीतिगत रीपो रेट को घटाकर 5.25 फीसदी किया गया था। लेकिन चालू वित्त वर्ष में महंगाई की स्थिति बदल रही है। इस साल अब तक मुख्य महंगाई औसतन 3.93 फीसदी रही है। वित्त वर्ष 2026-27 में मुख्य महंगाई के अलावा मूल महंगाई के भी बढ़ने का अनुमान है। आरबीआई के मुताबिक चालू वित्त वर्ष में मूल महंगाई औसतन 4.3 फीसदी रह सकती है। कीमती धातुओं के प्रभाव को अलग रखने वाला मूल महंगाई का पैमाना भी वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही तक व्यापक मूल महंगाई के करीब पहुंच सकता है। गवर्नर मल्होत्रा के मुताबिक महंगाई के बदलते रुझान को देखते हुए भविष्य में नीतिगत दर को दोबारा समायोजित करने की जरूरत पड़ सकती है।
वृद्धि और महंगाई पर रखनी होगी नजर
मौद्रिक नीति समिति के बाहरी सदस्य सौगत भट्टाचार्य ने भी महंगाई के रुझान पर सतर्क नजर रखने की जरूरत बताई। उनके मुताबिक अभी तक अपेक्षाकृत नरम रही अंतर्निहित महंगाई आने वाले समय में सामान्य स्तर की ओर बढ़ सकती है। ऐसे में आर्थिक वृद्धि और महंगाई के बीच संतुलन को ध्यान से देखना होगा। इससे यह तय करने में मदद मिलेगी कि ब्याज दर में बदलाव का सही समय कब होगा।
कर्जदारों पर क्या हो सकता है असर?
फिलहाल रीपो रेट 5.25 फीसदी पर बरकरार है, इसलिए इस बैठक के बाद कर्ज की ब्याज दरों पर तत्काल कोई नया असर नहीं पड़ेगा। लेकिन आने वाले महीनों में महंगाई बढ़ती है और आरबीआई रेपो दर में इजाफा करता है तो रेपो दर से जुड़े आवास, वाहन और दूसरे कर्ज महंगे हो सकते हैं। इससे कर्जदारों की मासिक किस्त या कर्ज की अवधि बढ़ सकती है। बैठक के ब्योरे में ब्याज दर बढ़ाने की संभावना का संकेत जरूर मिला है, लेकिन आरबीआई ने अगली बैठक के लिए कोई फैसला पहले से तय नहीं किया है। आगे का निर्णय महंगाई, आर्थिक वृद्धि और वैश्विक परिस्थितियों से जुड़े आंकड़ों पर निर्भर करेगा।