नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर निशाना साधते हुए कहा है कि उसने यह तय कर लिया है कि वह देश के डेढ़ अरब लोगों की सच्चाई जानता है, जबकि हर व्यक्ति अपनी सच्चाई खुद जानता है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर आरएसएस को डेढ़ अरब लोगों की सच्चाई जानने का अधिकार किसने दिया।
श्री गांधी ने जवाहर भवन में यहां गुरुवार को पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न राजीव गांधी की 82वीं जयंती पर आयोजित 'हरा भरा स्वराज : राजीव गांधी के दृष्टिकोण को श्रद्धांजलि' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आज देश में वैचारिक लड़ाई इसी सवाल को लेकर है कि स्वराज को अक्सर स्वतंत्रता के समान समझ लिया जाता है, जबकि इसका अर्थ खुद पर शासन करना है। यह जिम्मेदारी और सोचने का तरीका है। कोई व्यक्ति दूसरे को स्वतंत्रता दे सकता है, लेकिन किसी दूसरे को स्वराज नहीं दे सकता।
उन्होंने कहा कि खुद को गहराई से समझना और दुनिया के साथ अपने व्यक्तिगत संबंध को समझना ही स्वराज है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी चाहते थे कि देश का हर व्यक्ति इस रास्ते पर चले। कोई व्यक्ति इंजीनियर, रसोइया, मोची या अंतरिक्ष यात्री बनना चाहता है तो उसे अपनी पसंद के अनुसार आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए। सरकार और देश का काम लोगों की कल्पना के दरवाजे खोलना और उन्हें अपने चुने हुए रास्ते पर आगे बढ़ने में मदद करना है। लेकिन सच यह है कि गांधीजी का स्वराज का दृष्टिकोण ऐसी महंगी शिक्षा व्यवस्था के साथ संभव नहीं है और यह ऐसी अन्यायपूर्ण परीक्षा व्यवस्था के साथ भी कायम नहीं रह सकता। उन्होंने कहा कि दो-तीन लोगों के हाथों में केंद्रित वित्तीय व्यवस्था देश की गहराई तक नहीं पहुंचने वाली है और इस साचे की राजनीतिक व्यवस्था भी गांधीजी के दृष्टिकोण के अनुरूप नहीं हो सकती।
श्री गांधी ने कहा कि खराब माहौल इंसान को स्वराज से दूर कर देता है और उसकी स्वाभाविक स्थिति को बदल देता है, जिससे वह अपनी जिंदगी ठीक से नहीं जी पाता। गांधीजी का मानना था कि हर जीव एक विशिष्ट इकाई है और सत्य तक पहुंचने का उसका अपना रास्ता है। यदि वह खुद यह मानने लगें कि वह किसी दूसरे व्यक्ति की सच्चाई जानते हैं तो यह गलत होगा, क्योंकि उन्होंने वह अनुभव नहीं किया है जो उस व्यक्ति ने किया और न ही वह देखा है जो उसने देखा है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी सच्चाई जानने और अपने जीवन की राह चुनने का अधिकार है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा मुसलमानों, ईसाइयों और सिखों से कहती है कि उनका कोई अस्तित्व नहीं है। आदिवासियों से कहती है कि उनकी जमीन ले ली जाएगी और विरोध करने पर उन्हें गोली मार दी जाएगी, जबकि दलितों से कहा जाता है कि उनका उत्पीड़न मायने नहीं रखता। उन्होंने कहा कि देश में जो कुछ किया गया है, उसे बदलने की जरूरत है।
श्री गांधी ने कहा कि देश के प्रत्येक व्यक्ति को, चाहे वह किसी भी धर्म, जाति, उम्र या लिंग का हो, यह महसूस होना चाहिए कि वह इस देश का हिस्सा है, यहां उससे प्रेम किया जाता है, उसका सम्मान किया जाता है और सत्य की उसकी खोज मायने रखती है।