नई दिल्ली। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को घोषणा की कि न्यूजीलैंड के साथ हुआ भारत का मुक्त व्यापार समझौता 20 अक्टूबर से लागू हो जाएगा।
श्री गोयल ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में यह घोषणा करते हुए कहा कि यह समझौता 'भारत और न्यूजीलैंड दोनों के हित में हैं। इस समझौते पर इसी साल 27 अप्रैल को हस्ताक्षर किये गये थे और न्यूजीलैंड की संसद ने इसे पिछले सप्ताह अनुमोदित कर दिया। उन्होंने कहा कि समझौते को लागू करने की सभी प्रक्रियें पूरी कर ली गयी हैं।
उन्होंने भारत के उद्योग और व्यवसाय जगत को ऐसे समझौतों का पूरा लाभ उठाने का आह्वान किया। इस समझौते के तहत भारत के शत-प्रतिशत निर्यात को न्यूजीलैंड में शुल्क मुक्त प्रवेश मिलेगा जबकि भारत ने डेयरी, घरेलू किसानों की दृष्टि से मक्का, प्याज , चना, फलियां, चीनी और शहद जैसे तमाम संवेदनशील कृषि उत्पादों पर न्यूजीलैंड को कोई छूट नहीं दी है। वाणिज्य मंत्री ने कहा कि इस समझौते को दोनों देशों में व्यापक समर्थन है। न्यूजीलैंड की संसद में सत्तापक्ष और विपक्ष-दोनों ओर के 93 सदस्यों ने इसका समर्थन किया। केवल 29 सदस्य इसके विरोध में थे।
उन्होंने कहा कि भारत में किसी भी हितधारक इस समझौते के खिलाफ अब तक कोई बात नहीं कही है। श्री गोयल ने कहा कि इस समझौते से न्यूजीलैंड के बाजार में उन देशों के उत्पादों के समक्ष प्रतिस्पर्धा में हमारी समस्याओं का समाधान होगा जिनका न्यूजीलैंड के साथ पहले से समझौता है। उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड ने इस करार के तहत भारत में 20 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की जिससे 'हमें विदेशी पूंजी और नयी प्रौद्योगकी प्राप्त होगी। वाणिज्य मंत्री ने कहा कि न्यूजीलैंड के निवेशकों को इस समझौते से भारत में विनिर्माण करने को प्रोत्साहन मिलेगा और वे यहां सस्ती लागत पर विनिर्माण कर के तीसरे देश को निर्यात कर सकेंगे।
कृषि उत्पादकता साझेदारी पर भी बनी सहमति
उन्होंने कहा कि इस समझौते के तहत कृषि उत्पादकता साझेदारी भी कायम की गई है। इससे न्यूजीलैंड की तकनीक भारत के बड़े पैमाने और बढ़ती मांग के साथ तालमेल बना सकेगी। गोयल के अनुसार, न्यूजीलैंड को इस समझौता से दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था तक तरजीही पहुंच मिलेगी। न्यूजीलैंड ने भारत में 15 वर्षों के दौरान 20 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है।
भारतीय वस्तुओं पर शुल्क घटने की उम्मीद
इस समय न्यूजीलैंड सेरामिक्स, कालीन, वाहन और वाहन कलपुर्जों सहित प्रमुख भारतीय वस्तुओं पर 10 फीसदी तक का अधिकतम शुल्क लगाता है। गोयल ने कहा, ”हमारी तात्कालिक प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना होना चाहिए कि समझौते के प्रावधान तुरंत भारत और न्यूजीलैंड के कारोबारियों तथा लोगों के लिए ठोस लाभ में तब्दील हों… आइए मिलकर यह सुनिश्चित करें कि यह एफटीए दोनों देशों के बीच एक गहरी, अधिक गतिशील और पारस्परिक रूप से लाभकारी आर्थिक साझेदारी की मजबूत नींव बने।”
संवेदनशील कृषि उत्पाद समझौते से बाहर
उन्होंने स्पष्ट किया कि डेयरी, प्याज, चना, मटर, मक्का, बादाम, कृत्रिम शहद और चीनी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को इस व्यापार समझौते से बाहर रखा गया है। न्यूजीलैंड के व्यापार मंत्री टॉड मैक्ले ने कहा कि यह एक उच्च गुणवत्ता वाला समझौता है, जो दोनों देशों के नागरिकों को महत्वपूर्ण लाभ देगा। उन्होंने कहा कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के इस दौर में यह समझौता दोनों देशों के कारोबारी समुदायों में भरोसा पैदा करेगा।