0 रूस से क्रूड ऑयल खरीद पर अमेरिकी टैरिफ की चिंता टली
वॉशिंगटन डीसी। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने रूस पर सख्त प्रतिबंध लगाने वाले कानून को फिलहाल रोक दिया है। ट्रम्प ने शुक्रवार को इस फैसले से जुड़े आदेश पर हस्ताक्षर किए और कहा कि यह कदम अमेरिका के हित में है। इससे भारत के सामने रूस से क्रूड ऑयल खरीद पर अमेरिकी टैरिफ की चिंता टली गई है।
इस कानून के तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता था। इन देशों में चीन, भारत, स्लोवाकिया समेत हंगरी और अजरबैजान शामिल थे। प्रतिबंध से जुड़े कानून का मकसद रूस की कमाई के रास्ते बंद करना था, ताकि यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध के लिए उसे पैसा जुटाने में मुश्किल हो। खास बात ये है कि ट्रम्प ने 9 अक्टूबर को ही रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ डीजल खरीदने की डील की थी।
ट्रम्प को 30 दिन के अंदर फैसला लेना था
ट्रम्प ने रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले बिल (लिंडसे ग्राहम एक्ट) पर 18 सितंबर 2026 को साइन किए थे। 16 सितंबर को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने इसे 262-159 वोटों से मंजूरी दी थी। कानून पर साइन करने के बाद ट्रम्प को प्रतिबंध लगाने का फैसला 30 दिन के अंदर करना था। हालांकि, ट्रम्प ने इससे पहले ही प्रतिबंधों और टैरिफ पर छूट दे दी।
भारत के तेल आयात में रूस का 45% हिस्सा
भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल दूसरे देशों से खरीदता है। अगस्त 2026 में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी करीब 45% थी। भारत ने अगस्त में रूस से रोजाना औसतन 20.8 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा था। ऐसे में रूस से तेल खरीदने पर 100% तक टैरिफ लगने का खतरा भारत के लिए चिंता की वजह था।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को कहा था कि भारत तेल की उपलब्धता और दुनिया के हालात को देखकर अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी करने का फैसला करता है। भारत पहले भी अमेरिकी अधिकारियों के सामने यह मुद्दा उठा चुका है। जानकारों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी संकट और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही पर असर के बीच रूस से तेल की सप्लाई कम करना दुनिया में तेल की कीमतें बढ़ा सकता है, इसलिए अमेरिका के लिए रूस पर और सख्त प्रतिबंध लगाना आसान फैसला नहीं है।
क्रूड ऑयल की कीमतें भारत के लिए अब भी बड़ी चिंता
आईटी शेयरों में तेजी के बावजूद भारतीय बाजार के सामने एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज उछाल भारत के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि देश अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। जब इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल महंगा होता है, तो भारत के लिए क्रूड ऑयल खरीदने की लागत बढ़ सकती है। इसका असर देश के इम्पोर्ट बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। इसी वजह से बाजार के लिए क्रूड ऑयल की कीमतों में होने वाले बदलाव महत्वपूर्ण बने हुए हैं।