0 शिवकाशी को यूरोप और अमेरिका से पटाखों के लिए पूछताछ मिलने लगी है
0 देश के संगठित पटाखा उद्योग में करीब 85 फीसदी हिस्सेदारी है शिवकाशी की
0 भारत में पटाखा उद्योग का कुल कारोबार करीब 6000 करोड़ रुपए है
चेन्नई/नई दिल्ली। दिवाली से पहले तमिलनाडु के शिवकाशी में पटाखा कारोबारियों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। देश में सबसे ज्यादा पटाखे बनाने वाला यह शहर अब विदेशी बाजारों में भी अपनी जगह बनाने की तैयारी कर रहा है। यूरोप और अमेरिका की कंपनियों ने यहां के पटाखों में दिलचस्पी दिखाई है। पोलैंड की एक कंपनी भी पटाखे खरीदने के लिए संपर्क कर चुकी है। खास बात यह है कि इनमें कुछ ऐसी कंपनियां भी हैं, जो पहले चीन से पटाखे खरीदती थीं।
भारत के संगठित पटाखा उद्योग में शिवकाशी की हिस्सेदारी करीब 85 फीसदी है। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने यहां की औद्योगिक तरक्की को देखते हुए इसे ‘कुट्टी जापान’ यानी छोटा जापान कहा था। अब यह शहर दुनिया के बड़े पटाखा निर्यात केंद्र के रूप में अपनी पहचान बनाना चाहता है।
कितना बड़ा है पटाखों का कारोबार?
भारत में पटाखा उद्योग का कुल कारोबार करीब 6000 करोड़ रुपये है। इसमें अकेले शिवकाशी की हिस्सेदारी लगभग 5100 करोड़ रुपये है। शिवकाशी में बनने वाले पटाखों की करीब 80 फीसदी बिक्री दिवाली के दौरान होती है। इससे 4000 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार होता है। करीब 10 फीसदी बिक्री केरल में विशु त्योहार के दौरान होती है, जबकि बाकी 10 फीसदी बिक्री गणेश चतुर्थी समेत दूसरे त्योहारों पर होती है।
इस बार पटाखों की कीमतें 30 से 50 फीसदी बढ़ने के बावजूद कारोबारियों को पिछले साल के मुकाबले ऑर्डर में मामूली बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।
चीन को कैसे मिलेगी टक्कर?
फिलहाल दुनिया के करीब दो-तिहाई पटाखे चीन के हुनान प्रांत के लियूयांग शहर में बनते हैं, लेकिन चीन में बढ़ती पाबंदियों, अमेरिकी शुल्क और दूसरे देशों से सामान खरीदने की कोशिशों के चलते विदेशी कंपनियां अब भारत की ओर भी देख रही हैं। शिवकाशी पटाखा निर्माता संघ के मुरली असैथंबी ने बताया कि विदेश से पूछताछ शुरू हो गई है। कुछ कंपनियां पहले चीन से पटाखे खरीदती थीं, लेकिन अब भारत से खरीदने की संभावना तलाश रही हैं। अगर भारतीय कंपनियां अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुताबिक पटाखे बना सकीं और समय पर सप्लाई कर पाईं तो यह बड़ी उपलब्धि होगी।
सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत
पटाखा कारोबारियों की उम्मीदें बढ़ने की एक वजह सुप्रीम कोर्ट के फैसले भी हैं। सितंबर में अदालत ने कुछ शर्तों के साथ नई पीढ़ी के जुड़े हुए ग्रीन पटाखे बनाने की अनुमति दी थी। उद्योग लंबे समय से इसकी मांग कर रहा था। इसके अलावा अदालत ने पटाखों पर पूरी तरह रोक लगाने के बजाय तय समय के दौरान इन्हें चलाने की अनुमति दी है। भारतीय पटाखा संघ के अध्यक्ष जे तमिलसेल्वन के मुताबिक, मांग के मुकाबले उत्पादन कम है। पिछले 11 महीनों में जितने पटाखे बनाए गए हैं, वे इस दिवाली की मांग पूरी करने के लिए ही पर्याप्त होंगे। उन्होंने मंजूरी मिलने की प्रक्रिया तेज करने की जरूरत भी बताई।
निर्यात बढ़ाने के लिए क्या कर रही सरकार?
तमिलनाडु सरकार शिवकाशी को अंतरराष्ट्रीय पटाखा बाजार से जोड़ने की तैयारी कर रही है। इसके लिए चेन्नई और तूतीकोरिन बंदरगाहों से माल भेजने की सुविधाएं बेहतर बनाने पर काम हो रहा है। राज्य सरकार निर्यात से जुड़ी कुछ शर्तों में छूट के लिए केंद्र से भी बातचीत कर रही है। राज्य की उद्योग मंत्री और शिवकाशी से विधायक एस कीर्तन ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा कि सरकार बेहतर तकनीक, ऊंचे मानकों और नए बाजारों के जरिए शिवकाशी को दुनिया से मुकाबला करने लायक बनाना चाहती है। इसके साथ मजदूरों की सुरक्षा और रोजगार का ध्यान रखना भी जरूरी है। सरकार विरुधुनगर जिले में पटाखा उद्योग के लिए एक बड़ा साझा सुविधा केंद्र बनाने की तैयारी में है। यहां पटाखों की जांच, प्रमाणन, नई तकनीक पर शोध और कर्मचारियों के प्रशिक्षण की सुविधाएं होंगी। इस केंद्र में सामान्य पटाखों के अलावा रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाली विस्फोटक तकनीकों पर भी काम करने की योजना है। सरकार का कहना है कि उद्योग का विस्तार मजदूरों की जान की कीमत पर नहीं होना चाहिए।