नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि आने वाली पीढ़ियों को नशे की समस्या से मुक्त कराने तथा देश विरोधी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने 31 दिसंबर 2029 तक देश को नशे की समस्या से मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि इसके लिए वर्ष 2026 के शेष समय और 2027, 2028 तथा 2029 में पुलिस बलों को मिलकर नशे के खिलाफ लड़ाई लड़नी होगी।
श्री शाह ने बुधवार को यहां पुलिस स्मृति दिवस पर राष्ट्रीय पुलिस स्मारक में शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि देने के बाद यह बात कही। इस मौके पर उन्होंने नशे के खिलाफ जागरूकता पैदा करने के लिए देशव्यापी मोटरसाइकिल रैली को भी रवाना किया।
उन्होंने कहा कि नशे की समस्या आने वाली पीढ़ियों को कमजोर करती है, अर्थव्यवस्था पर बोझ डालती है और देश विरोधी गतिविधियों में लगे संगठनों को आर्थिक मदद भी पहुंचाती है। उन्होंने देशभर के पुलिस बलों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तैयार 'नशा मुक्त भारत' की योजना को जमीन पर उतारने और आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित करने का आह्वान किया।
गृह मंत्री ने कहा कि वर्ष 2026 भारतीय पुलिस के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि 31 मार्च 2026 को देश को दशकों पुरानी नक्सल समस्या से मुक्ति मिली। वर्ष 1981 से मार्च 2026 के बीच नक्सलवाद के कारण 3,600 से अधिक जवान शहीद हुए और करीब 13,700 निर्दोष नागरिकों की जान गई।
उन्होंने कहा कि देश आज विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है, तो इसकी नींव में शहीद जवानों का बलिदान है। उन्होंने कहा कि कश्मीर, पूर्वोत्तर और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अब शांति और विकास का माहौल बना है। कश्मीर में आतंकवाद पर काबू पाने में काफी सफलता मिली है, जबकि समझौतों के बाद पूर्वोत्तर में भी शांति का रास्ता खुला है।
नक्सलवाद को समाप्त करने में पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की भूमिका की सराहना करते हुए उन्होंने खास तौर पर केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), कोबरा बटालियन और छत्तीसगढ़ पुलिस की बहादुरी का उल्लेख किया। श्री शाह ने कहा कि पुलिसकर्मियों के बलिदान और कर्तव्य के प्रति समर्पण को याद करते हुए कहा कि पुलिस की सेवा सबसे कठिन सेवाओं में से एक है।
जब लोग रक्षाबंधन, होली, दीपावली और ईद जैसे त्योहार परिवार के साथ मनाते हैं, तब पुलिसकर्मी आंतरिक सुरक्षा, यातायात और लोगों की सुरक्षा में जुटे रहते हैं। उन्होंने कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा में पुलिस की भूमिका सबसे अहम है। पुलिस स्मृति दिवस के इतिहास का जिक्र करते हुए गृह मंत्री ने बताया कि 21 अक्टूबर 1959 को लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र में चीन की सेना के हमले का मुकाबला करते हुए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के 10 जवान शहीद हुए थे। उन्हीं के बलिदान की याद में हर साल 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रीय पुलिस स्मारक का उद्घाटन किया था, ताकि पुलिस की आने वाली पीढ़ियां शहीदों से प्रेरणा लें। इस स्मारक पर कर्तव्य की वेदी पर प्राणों की बाजी लगाने वाले पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी जाती है।
नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने वाली मोटरसाइकिल रैली में राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और केंद्रीय पुलिस संगठनों के करीब 90 सवार शामिल हैं। 'नशे के खिलाफ लड़ाई' के संदेश के साथ निकाली जा रही यह रैली देशव्यापी अभियान का हिस्सा है। इसमें शामिल सवार गुजरात के एकता नगर पहुंचकर एकता परेड-2026 में भाग लेंगे।