0 केरल-राजस्थान समेत कई राज्यों ने बढ़ाई तैयारी
0 विदेश यात्रा महंगी होने और देश में घूमने की बढ़ती दिलचस्पी के बीच कई राज्य पर्यटकों को आकर्षित करने में जुटे
नई दिल्ली। त्योहारों के इस मौसम में देश भर में लोग छुट्टियां मनाने की तैयारी में जुटे हैं और इस मौके को भुनाने के लिए कई राज्य भी पर्यटकों को अपने क्षेत्र के पर्यटन स्थलों की ओर आकर्षित करने की कोशिश में लगे हैं। इसके लिए कई राज्य हॉलिडे पैकेज की पेशकश करने के साथ-साथ व्यापक स्तर पर प्रचार अभियान में जुटे हैं।
साथ ही नए पर्यटन सर्किट बनाने की योजना और निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी के जरिये घरेलू पर्यटकों को आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं। उनका लक्ष्य भारत के तेजी से बढ़ते घरेलू पर्यटन बाजार में बड़ी हिस्सेदारी हासिल करना है।
केरल ने इस त्योहारी सीजन में यात्रा के लिए विशेष पर्यटन पैकेज और यात्रा से जुड़े बेहतर अनुभव देने की पेशकश करने की जानकारी भी दी है। उत्तर प्रदेश ने ‘विजिट माई स्टेट’ अभियान शुरू कर पर्यटकों को लुभाने की कोशिश की है। वहीं दूसरी ओर राजस्थान सरकार राज्य में एडवेंचर टूरिज्म, डेजर्ट सफारी और राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों के पर्यटन को बढ़ावा दे रही है। घरेलू पर्यटन के बढ़ते दायरे के बीच इस क्षेत्र को बढ़ावा देने की कोशिशें बढ़ रही हैं। भारत में 2025 में घरेलू पर्यटकों की यात्राओं की संख्या 4.28 अरब दर्ज की गई जो वर्ष 2024 के 2.9 अरब के मुकाबले लगभग डेढ़ गुना है। यह संख्या वर्ष 2021 के 67 करोड़ से भी काफी अधिक है।
घरेलू पर्यटकों की यात्राओं में सालाना औसतन 9.89 फीसदी की वृद्धि
साल 2011 से 2024 के बीच देश में घरेलू पर्यटकों की यात्राओं में सालाना औसतन 9.89 फीसदी चक्रवृद्धि दर से वृद्धि हुई। थॉमस कुक (इंडिया) लिमिटेड और एसओटीसी ट्रैवल के कार्यकारी उपाध्यक्ष (ई-कॉमर्स, भारत और छोटी यात्रा) नीरज सिंह देव ने कहा कि राज्य के पर्यटन विभाग घरेलू पर्यटकों को सामान्य पर्यटन स्थलों और बड़े आयोजनों से इतर अन्य जगहों को देखने के लिए प्रोत्साहित करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। देव ने कहा कि बूंदी, कोटा, झालावाड़, डूंगरपुर और बांसवाड़ा जैसी कम चर्चित जगहों को वहां की विरासत, संस्कृति, वास्तुकला और स्थानीय अनुभवों के बेहतर मेल के कारण ही राजस्थान पर्यटन विभाग इन जगहों पर जोर दे रहा है। इसी प्रकार तमिलनाडु में विरासत, संस्कृति, आध्यात्मिकता और प्राकृतिक आकर्षण से जुड़े कई पर्यटन स्थल हैं। इन्हें राज्य के प्रमुख पर्यटन केंद्रों से इतर भी प्रचारित किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश में घरेलू पर्यटकों की यात्राओं की संख्या सबसे अधिक 64.68 करोड़ रही
इंडिया टूरिज्म डेटा कंपेंडियम 2025 के आंकड़ों के अनुसार, साल 2024 में उत्तर प्रदेश में घरेलू पर्यटकों की यात्राओं की संख्या सबसे अधिक 64.68 करोड़ रही। इसके बाद तमिलनाडु में 30.68 करोड़, कर्नाटक में 30.45 करोड़, आंध्रप्रदेश में 29.02 करोड़ और राजस्थान में 23 करोड़ यात्राएं दर्ज की गईं। देव ने कहा कि केरल, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात उन राज्यों में शामिल हैं, जिनके पर्यटन बोर्ड अपने पर्यटन स्थलों को बढ़ावा देने के लिए अधिक सक्रिय रहे हैं। त्योहारी सीजन में बढ़ती यात्रा के साथ ही आगामी सर्दी की छुट्टियों के लिए भी पर्यटन स्थलों के लिए लोगों की दिलचस्पी बढ़ रही है। ट्रैवल कंपनियों का कहना है कि देश भर के पर्यटन स्थलों के लिए मांग दिख रही है जो इस त्योहारी सीजन के बाद भी बरकरार रहेगी। देव ने कहा, ‘सर्दियों के मौसम में छुट्टियों के दौरान पर्यटन की अच्छी खासी मांग देखने को मिल रही है।
चार-धाम सर्किट की धार्मिक यात्राओं की मांग भी बनी हुई है
अंडमान, केरल, पूर्वोत्तर, गुजरात और राजस्थान ऐसे पर्यटन स्थलों में शामिल हैं जिनमें लोग दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इसके अलावा चार-धाम सर्किट की धार्मिक यात्राओं की मांग भी बनी हुई है। कश्मीर में भी पर्यटकों की दिलचस्पी फिर से बढ़ रही है।’ पिछले कुछ वर्षों में घरेलू यात्राओं में काफी बढ़ोतरी हुई है और इसकी वजह यह है कि विदेश यात्रा करना अब काफी महंगा हो गया है।
होर्मुज तनाव के कारण महंगी हुई अंतरराष्ट्रीय यात्रा
वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अनिश्चतता के बीच अंतरराष्ट्रीय यात्राओं की लागत में 20-30 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। ईरान के साथ अमेरिका-इजरायल संघर्ष के बीच कई विमानन कंपनियों ने यूरोप और पश्चिम एशिया के लिए अपनी उड़ानों में कटौती की है और किराये भी बढ़ा दिए हैं। होर्मुज स्ट्रेट क्षेत्र के आसपास बनी तनाव की स्थिति ने ईंधन की लागत पर दबाव और बढ़ा दिया है। इससे हवाई यात्रा महंगी हो गई है और लोगों का ध्यान देश के भीतर छुट्टियां बिताने के विकल्पों की ओर अधिक होने लगा है।
पीएम मोदी की अपील का असर
इसके अलावा घरेलू पर्यटन पर बढ़ता जोर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारत में ही छुट्टियां बिताने की अपील के अनुरूप भी है। मोदी ने देश के नागरिकों से छुट्टियों और शादियों के लिए देश के भीतर ही पर्यटन स्थलों को चुनने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय पर्यटन कारोबार को समर्थन मिलेगा और देश के भीतर ही खर्च बना रहेगा। हालांकि इस अपील में कीमत सिर्फ एक पहलू है। अब पर्यटक पारंपरिक पर्यटन स्थलों को देखने के बजाय नए और अलग तरह के अनुभवों की तलाश भी कर रहे हैं। धार्मिक और आध्यात्मिक यात्राओं, वन्यजीवों से जुड़ी सैर, रोमांचक पर्यटन, स्वास्थ्य और सेहत से जुड़े वेलनेस सेंटर और ग्रामीण जीवन के अनुभवों के प्रति बढ़ती दिलचस्पी ने भी देश में घूमने-फिरने के विकल्पों का दायरा बढ़ा दिया है।
धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन में काफी तेजी आई हैः मेहरा
इंडियन एसोसिएशन ऑफ टूर ऑपरेटर्स (आईएटीओ) के अध्यक्ष और फेडरेशन ऑफ एसोसिएशंस इन इंडियन टूरिज्म ऐंड हॉस्पिटैलिटी (फेथ) के महासचिव राजीव मेहरा ने कहा कि धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन में काफी तेजी आई है। खासकर अयोध्या, वाराणसी, केदारनाथ और तिरुपति जैसे स्थानों पर जाने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ी है।दूसरी ओर एडवेंचर टूरिज्म, वन्यजीव पर्यटन, स्वास्थ्य लाभ से जुड़ी छुट्टियां, ग्रामीण पर्यटन और सप्ताहांत की छोटी यात्राएं भी अलग-अलग उम्र के पर्यटकों को आकर्षित कर रही हैं।’ उद्योग जगत के अधिकारियों के मुताबिक, घरेलू पर्यटन में बढ़ोतरी के पीछे दो बड़े बदलाव हैं। पहला है उपभोक्ताओं के व्यवहार में बदलाव। भारतीय अब घूमने-फिरने पर ज्यादा खर्च कर रहे हैं, लेकिन लंबी छुट्टियों के बजाय कम अवधि की और कई बार यात्राएं करना पसंद कर रहे हैं।
बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर से सफर आसान हुआ
वे नए पर्यटन स्थलों को तलाशने के साथ-साथ वहां के स्थानीय जीवन और संस्कृति को करीब से अनुभव करना चाहते हैं। दूसरा बड़ा कारण है यात्रा की सुविधाओं में सुधार। राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार, हवाई संपर्क में बढ़ोतरी, आने-जाने के अधिक लचीले विकल्प और मीडिया के जरिए पर्यटन स्थलों की बढ़ती जानकारी ने सफर को आसान बना दिया है। इससे ऐसे कम चर्चित पर्यटन स्थल भी लोगों की पहुंच में आ रहे हैं, जिनके बारे में पहले बहुत कम लोग जानते थे।
केंद्र की स्वदेश दर्शन 2.0 योजना का भी असर
राज्यों की इन कोशिशों को केंद्र सरकार की पर्यटन स्थल विकास योजनाओं से भी मदद मिल रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार स्वदेश दर्शन 2.0 के तहत 2,207 करोड़ रुपये की लागत वाली 53 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा ‘प्रसाद योजना’ के तहत तीर्थ स्थलों और विरासत स्थलों पर बुनियादी ढांचे और पर्यटकों की सुविधाओं को बेहतर बनाया जा रहा है।
‘देखो अपना देश 2.0’ योजना की रूपरेखा भी तैयार
सरकार ने कम चर्चित स्थलों को बढ़ावा देने और पर्यटकों की आवाजाही को प्रमुख केंद्रों से आगे बढ़ाने के लिए ‘देखो अपना देश 2.0’ योजना की रूपरेखा भी तैयार की है। मेहरा ने कहा, ‘पर्यटन, विरासत वाले पर्यटन सर्किट, तीर्थ स्थलों और कम चर्चित जगहों को बढ़ावा देने वाली सरकारी योजनाओं से लोग देश के अलग-अलग हिस्सों में घूमने के लिए प्रोत्साहित हुए हैं।