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0 प्रधानमंत्री मोदी ने चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन किया
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि युवाओं को देश की प्रगति से जोड़ना, समाज को बांटने वाली ताकतों के खिलाफ एकजुट करना और आत्मनिर्भरता के प्रति जागरूक करना जरूरी है। श्री मोदी आज यहां चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।

पीएम ने कहा कि दशकों में समय बदला है, नई चुनौतियां सामने आई हैं और नई सामाजिक बुराइयां पैदा हुई हैं। आज, इन समस्याओं को सुलझाने की जिम्मेदारी हम सभी की है। उन्होंने आगे कहा कि हमें समाज को बांटने वाली ताकतों के खिलाफ एकजुट होना होगा, आत्मनिर्भर बनने के लिए लोगों प्रेरित करना होगा, हर व्यक्ति को 2047 तक 'विकसित भारत' के विजन से जोड़ना होगा। इस दौरान, पीएम ने स्वामी चिन्मयानंद के होलोबॉट से बात की। यह ऐसी तकनीक है जो एक वास्तविक दिखने वाले 3डी होलोग्राफिक डिजिटल इंसान को पेश करती है।
उन्होंने चिन्मय मिशन से विकसित भारत के संकल्प को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्वामी चिन्मयानंद जी का मुख्य विचार युवाशक्ति के निर्माण के जरिए सशक्त भारत बनाना था। चिन्मय मिशन के युवा कार्यकर्ताओं ने करीब 300 दिनों में 40 हजार किलोमीटर की यात्रा कर एक लाख से अधिक युवाओं से संपर्क किया है। उन्होंने कहा कि 2047 में देश की आजादी के 100 साल पूरे होंगे और इसी कालखंड में चिन्मय मिशन भी अपनी शताब्दी मनायेगा। ऐसे में विकसित भारत और चिन्मय मिशन की यात्रा को साथ आगे बढ़ाना है।

उन्होंने विश्वास जताया कि मिशन के संत, आचार्य, साधक और कार्यकर्ता विकसित भारत के निर्माण में अहम भूमिका निभायेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वामी चिन्मयानंद जी ने भारतीय ज्ञान, संस्कृति और विरासत को जन-जन तक पहुंचाने का काम किया। चिन्मय मिशन के 100 से अधिक शिक्षण संस्थान बच्चों और युवाओं को आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कार भी दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वामी जी आध्यात्मिक उन्नति को व्यक्तिगत विकास और व्यक्तिगत विकास को राष्ट्र की प्रगति से जोड़ने की सीख देते थे। श्री मोदी ने नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें भारतीय ज्ञान परंपरा, मातृभाषा में शिक्षा, आधुनिक विज्ञान और नयी तकनीक को महत्व दिया गया है।

उन्होंने कहा कि देश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और उसके प्रति गर्व की भावना को मजबूत करना जरूरी है। काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या में राम मंदिर और उज्जैन के महाकाल महालोक जैसे केंद्रों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के सांस्कृतिक केंद्रों का पुनर्जागरण हो रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते 12 वर्षों में विदेशों में चोरी कर ले जायी गयी 650 से अधिक प्राचीन मूर्तियों को वापस लाया गया है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग संस्थाओं के उद्देश्य भले ही अलग हों, लेकिन देश का विकास और गौरव सभी का साझा लक्ष्य है। विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए सभी को मिलकर आगे बढ़ना होगा। 

विकसित भारत और चिन्मय मिशन का रास्ता एक
बीते दशकों में समय बदला है। देश के सामने नई चुनौतियां पैदा हुई हैं। आज उसके समाधान का काम हम सबके सामने है। आज हमें आत्मनिर्भरता के लिए देश को जागरूक करना है। हमें 2047 के विकसित भारत संकल्प से सबको जोड़ना है।
जब भारत अपनी आजादी के 100 साल पूरे करेगा, जब चिन्मय मिशन भी 100 साल पूरे करेगा। यानी विकसित भारत और चिन्मय मिशन का रास्ता एक है। मुझे विश्वास है, आप सब मिलकर विकसित भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएंगे।

अब देश ऋषियों-राष्ट्रभक्तों की राह पर
आज उत्तर से दक्षिण, पूर्व से पश्चिम भारत का सांस्कृतिक पुनर्जागरण हो रहा है। अयोध्या राम मंदिर हो, उज्जैन का महाकाल धाम हो या केदारनाथ या बद्रीनाथ हो, हर जगह ऐसा ही हो रहा है। एक समय भारत से बहुत सी मूर्तियां चोरी कर विदेश ले जाई गईं। इन्हें बेच दिया गया। कोई इन्हें पूछने वाला नहीं था। हम पिछले 12 साल में ऐसी 600 मूर्तियां वापस लाए हैं। देश अब उस राह पर आगे बढ़ रहा है, जिसका सपना हमारे ऋषियों और राष्ट्रभक्तों ने देखा था। उनका विचार शक्ति हमारी ताकत है। 

नई शिक्षा नीति में संस्कृति के साथ टेक्नोलॉजी सिखा रहे
2015 में मुझे स्वामी जी की स्मृति में एक सिक्का जारी करने का मौका मिला था। मैंने कहा था कि स्वामी जी का जीवन एक प्रतीक है। उनके गुरु ने उन्हें आशीर्वाद दिया था- 'गो, रोर लाइक अ लॉयन' यानी जाओ, शेर की तरह दहाड़ो।

वेदों में लिखा है राष्ट्र को महान बनाएं
अब चिन्मय मिशन का अमृत महोत्सव भी भारत के अमृत काल से जुड़ रहा है। ये भारत के संकल्प की असली ताकत है। हमारे वेदों में लिखा है- राष्ट्र का हित चाहने वाले हम लोग राष्ट्र को महान बनाएं। स्वामी जी ने गीता ज्ञान के अभियान की शुरुआत की। आज इसी का परिणाम है कि लाखों युवा भारत के सांस्कृतिक ब्रांड एंबेसडर का काम कर रहे हैं।

1993 में गुरुदेव से मुलाकात हुई थी
1993 के फरवरी में मेरी गुरुदेव से मुलाकात हुई थी। मैं उन्हें अमेरिका के शिकागो में विश्व धर्म संसद के शताब्दी समारोह में आमंत्रित करने गया था। गुरु जी इसके बाद अमेरिका गए। उन्होंने लोगों को इस इवेंट के प्रति जागरूक किया। 3 अगस्त को अमेरिका के सैन डिएगो में स्वामी जी हमें छोड़कर चले गए। मैं वहीं था, हम सभी को पूज्य गुरुदेव की कमी महसूस हो रही थी।

चिन्मय मिशन के दुनियाभर में 350 से ज्यादा केंद्र
स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती ने 1951 में चिन्मय मिशन की स्थापना की थी। इसका उद्देश्य गीता, उपनिषद और वेदांत की सीखों को आम लोगों तक पहुंचाना है। मिशन की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, आज मिशन के दुनियाभर में 350 से ज्यादा केंद्र और 1,000 से अधिक आध्यात्मिक अध्ययन समूह हैं।

भारत में 80 से ज्यादा चिन्मय विद्यालय
भारत में चिन्मय मिशन का नेटवर्क केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, दिल्ली, मध्य प्रदेश, असम, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों में फैला है। इन राज्यों में मिशन की मौजूदगी केंद्रों, आश्रमों, सत्संग, बच्चों और युवाओं के कार्यक्रमों तथा शैक्षणिक संस्थानों के जरिए है। मिशन के शैक्षणिक नेटवर्क में भारत में 80 से ज्यादा चिन्मय विद्यालय और कई कॉलेज शामिल हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसकी सामाजिक सेवा गतिविधियां चलती हैं।

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