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मुंबई। महाराष्ट्र में जारी लाउडस्पीकर व हनुमान चालीसा विवाद के बीच मनसे प्रमुख राज ठाकरे की घेराबंदी जारी है। बीड जिले की परली कोर्ट ने 2008 के एक केस में गैर जमानती वारंट जारी किया है। उधर, बॉम्बे हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर ठाकरे के खिलाफ राष्ट्रद्रोह का केस दायर करने का निर्देश देने की मांग की गई है।

हाईकोर्ट में याचिका पुणे के एक्टिविस्ट हेमंत पाटिल ने दायर की है। इसमें कहा गया है कि ठाकरे के खिलाफ देशद्रोह का केस दायर करने के लिए महाराष्ट्र सरकार व मुंबई पुलिस को निर्देश दिया जाए। इसकी वजह बताते हुए याचिका में कहा गया है कि राज ने 1 मई को औरंगाबाद रैली के जरिए अशांति फैलाने का प्रयास किया।

अपनी याचिका में हेमंत पाटिल ने कहा कि ठाकरे ने औरंगाबाद रैली में राकांपा प्रमुख शरद पवार के खिलाफ बात की, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं में अशांति हो सकती है। इससे राज्य में शांति भंग हो सकती है। उन्होंने मनसे प्रमुख के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज करने की मांग की। ठाकरे ने पवार पर महाराष्ट्र को जाति की राजनीति में विभाजित करने का आरोप लगाया था और यह भी कहा था कि पवार नास्तिक हैं।

औरंगाबाद पुलिस दर्ज कर चुकी एफआईआर
ठाकरे के भाषण के बाद औरंगाबाद पुलिस ने उनकी रैली के वायरल वीडियो को देखकर मनसे प्रमुख के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। राज ठाकरे ने 3 मई तक मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने का अपना अल्टीमेटम दोहराया था, जिसमें विफल रहने पर वे 4 मई से अजान की तुलना में दोगुनी मात्रा में हनुमान चालीसा बजाएंगे।

ठाकरे ने कहा था कि आज महाराष्ट्र (महाराष्ट्र दिवस) का पहला दिन है। मैं अब से चौथे दिन से नहीं सुनूंगा। हम जहां भी लाउडस्पीकर देखेंगे, हम लाउडस्पीकर के सामने डबल वॉल्यूम में हनुमान चालीसा का भी पाठ करेंगे। 4 मई को ऐसा ही किया गया। इस मामले में 250 से ज्यादा मनसे कार्यकर्ता व नेता गिरफ्तार किए गए। उधर राज्य के कई शहरों में लाउड स्पीकर पर अजान नहीं हुई। राज ने इसे अपने आंदोलजन की कामयाबी बताया।