तिरुवनंतपुर। केरल का गोल्ड स्मग्लिंग केस एक बार फिर चर्चा में है। वजह है इस मामले की एक आरोपी स्वप्ना सुरेश, जिन्होंने मंगलवार को खुलासा किया कि केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने 2016 में संयुक्त अरब अमीरात से आया नोटों से भरा बैग अपने पास रख लिया था। इतना ही नहीं स्वप्ना ने कहा कि सीएम पर इन आरोपों के पीछे उनका कोई राजनीतिक या निजी एजेंडा नहीं है, बल्कि उन्हें और उनके परिवार को जान का खतरा है। सुरेश ने कहा है कि उन्हें अगर आगे कुछ हो जाता तो वे इस बारे में बोलने की हिम्मत भी न जुटा पातीं।
यह पहली बार नहीं है जब स्वप्ना सुरेश ने सोने की तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े किसी मामले में सीधे केरल सीएम और उनके परिवार पर आरोप लगाए हैं। इससे पहले कोर्ट में सुनवाई के दौरान भी उन्होंने विजयन का नाम लिया था। हालांकि, तब केरल सीएम ने अपने ऊपर लगे आरोपों को 'तय एजेंडा' बताकर नकार दिया था।
इस बीच अमर उजाला आपको बता रहा है कि आखिर स्वप्ना सुरेश हैं कौन? किस मामले में उन्हें आरोपी बनाया गया है? इस केस में केरल के मुख्यमंत्री का नाम कब उछला और अब तक इस पूरे मामले में हुआ क्या है?
कौन हैं स्वप्ना सुरेश?
स्वप्ना सुरेश का जन्म संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के अबू धाबी में हुआ था। अबू धाबी में ही उन्होंने पढ़ाई की, जिसके बाद उन्हें एयरपोर्ट पर नौकरी मिल गई थी। स्वप्ना ने शादी भी की, लेकिन जल्द ही तलाक हो गया तो वह बेटी के साथ केरल के तिरुवनंतपुरम रहने चली आई। भारत आने के बाद स्वप्ना सुरेश ने दो साल तक तिरुवनंतपुरम में एक ट्रैवल एजेंसी में काम किया।
कब से शुरू हुए विवाद?
2013 में स्वप्ना की एयर इंडिया एसएटीएस में एचआर एक्जीक्यूटिव के तौर पर नौकरी लग गई। 2016 में जब धोखाधड़ी के एक केस में क्राइम ब्रांच ने उसकी जांच शुरू की तो स्वप्ना वापस अबू धाबी चली गईं। बताया जाता है कि जब स्वप्ना एयर इंडिया एसएटीएस में ट्रेनर थीं तो उन पर एक ऑफिसर को झूठे केस में फंसाने का आरोप लगा था। स्वप्ना पर फर्जी नाम से उस अधिकारी के खिलाफ 17 शिकायतें और जांच समिति के सामने झूठे सबूत पेश करने का आरोप लगा।
बताया जा रहा है कि जब इस मामले की जांच चल रही थी तो स्वप्ना को छोड़ने के लिए पुलिस पर बेहद दबाव बनाया गया। बाद में स्वप्ना अबूधाबी लौट गईं और वहां यूएई महावाणिज्य दूतावास में महावाणिज्य दूत की सचिव बन गईं। स्वप्ना ने 2019 में ही ये नौकरी छोड़ दी थी। हालांकि, पुलिस का कहना है कि उसे नौकरी से निकाला गया था।
क्या है सोने की तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आरोप?
आरोप हैं कि यूएई वाणिज्य दूतावास में नौकरी करना स्वप्ना की जिंदगी को नए मोड़ पर ले गया। दरअसल, यूएई महावाणिज्य दूतावास जब तिरुवनंतपुरम में शुरू हुआ तो स्वप्ना ने यहां उन्होंने बड़े-बड़े लोगों से अपनी पहचान बढ़ानी शुरू किया। बड़े होटलों में होने वाली पार्टियों में वह अक्सर शामिल होती थीं। अरबी समेत कई भाषाएं जानने वाली स्वप्ना बाद में केरल आने वाले अरब नेताओं की टीम में भी शामिल होने लगीं। अपने प्रभाव के जरिए स्वप्ना ने इस दौरान सामाजिक, नौकरशाही और राजनीतिक लोगों से भी संपर्क स्थापित किए। आरोप है कि कई बार वे खुद को एक राजनयिक भी बताती थीं।
केरल में एक अभिनेत्री से जबरन वसूली केस में जब पुलिस ने पूछताछ की तो किसी महिला का नाम सामने आया। 'डील वुमन' के नाम से मशहूर इस महिला के बारे में जानकारी मिली तो कस्टम अधिकारियों ने 13 करोड़ रुपये का सोना डिप्लोमेटिक बैगेज से बरामद किया। पुलिस को पता चला कि सोना तस्करी करने वाला गैंग मॉडल्स और अभिनेत्रियों के जरिए सोने की तस्करी कर रहा है। पुलिस का कहना है कि जांच में पता चला कि स्वप्ना सुरेश ही 'डील वुमन' है। वह इस गैंग को गंभीर मामलों में फंसने के बाद बाहर निकालती थी।
आईटी सचिव से जुड़ रहे तार
केरल सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एम शिवशंकर का नाम इस पूरे मामले में सामने आया। बताया जाता है कि जब महावाणिज्य दूतावास ने 2019 में स्वप्ना के आपराधिक केसों की जानकारी मिलने पर उन्हें नौकरी से निकाला था, तब शिवशंकर ने ही स्वप्ना को आईटी डिपार्टमेंट में बिजनेस डेवलपमेंट मैनेजर की नौकरी दिलाई थी।
मजेदार बात यह है कि आईटी सचिव शिवशंकर उस दौरान मुख्यमंत्री के भी प्रमुख सचिव थे और वह स्वप्ना के आवास पर अक्सर आते-जाते रहते थे। यहीं से पूरे मामले के तार मुख्यमंत्री कार्यालय से भी जुड़े। हालांकि, मुख्यमंत्री विजयन का कार्यालय लगातार स्वप्ना से किसी तरह के संबंध से इनकार करता रहा है। आरोपों के बाद राज्य सरकार ने स्वप्ना को केरल स्टेट आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (केएसआईटीएल) से भी बर्खास्त कर दिया। शिवशंकर को भी मुख्यमंत्री के सचिव पद से हटा दिया गया था। विवादों के शांत होने के बाद स्वप्ना सुरेश ने संघ से जुड़े एनजीओ में काम शुरू किया था।