नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को कहा कि वह धन शोधन निवारण अधिनियम के कड़े प्रावधानों को बरकरार रखने के अपने पूर्व के फैसले पर फिर से विचार करेगा।
शीर्ष अदालत ने पीएमएलए पर यह फैसला 27 जुलाई को महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख, कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती सहित 200 से अधिक लोगों की ओर से दायर जनहित याचिकाओं पर 545 पन्नों में दिया था।