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नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ रहा है और अगले पांच वर्षों में इसके 300 से 350 अरब डालर तक पहुंचने की उम्मीद है।
श्री सिंह ने सोमवार को हिमाचल प्रदेश के मंडी में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के 16 वें स्थापना दिवस को संबोधित करते हुए कहा, “भारत का प्रौद्योगिकी सेक्टर बढ़ रहा है और अगले पांच वर्षों में इसके 300-350 अमेरिकी बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। सवा लाख से अधिक स्टार्ट-अप और 110 यूनिकॉर्न के साथ, हमारा देश दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप इकोसिस्टम बन रहा है। 
उन्होंने छात्रों को विकास और अवसर के इस दौर का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे न केवल भारत की प्रौद्योगिकी प्रगति में योगदान दें, बल्कि अनुसंधान और विकास के प्रमुख क्षेत्रों में वैश्विक स्तर पर नेतृत्व भी करें। श्री सिंह ने प्रौद्योगिकी के भविष्य को आकार देने में नवाचार और ज्ञान सृजन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने उद्यमशीलता और नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देने के महत्व का भी उल्लेख किया। इससे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और डिजिटल प्रौद्योगिकियों जैसे उभरते क्षेत्रों में भारत तेजी से आगे बढ सकेगा। उन्होंने भारत की तकनीकी और वैज्ञानिक प्रगति को आकार देने में संस्थान के उत्कृष्ट योगदान की सराहना की। उन्होंने नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा देने में आईआईटी मंडी की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी प्रकाश डाला और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में वैश्विक नेता के रूप में भारत की बढ़ती प्रमुखता पर जोर दिया।
राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में श्री सिंह ने आईआईटी मंडी से रक्षा-संबंधी प्रौद्योगिकियों में और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आग्रह किया। उन्होंने डीआरडीओ के साथ मौजूदा सहयोग की सराहना की और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) संचालित युद्ध, स्वदेशी एआई चिप विकास, साइबर सुरक्षा और क्वांटम प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में और अधिक योगदान देने का आह्वान किया।
रक्षा मंत्री ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता में भारत की प्रगति का भी जिक्र किया और कहा, “ भारत ने गोला-बारूद उत्पादन में 88 प्रतिशत आत्मनिर्भरता हासिल कर ली है और 2023-24 में रक्षा निर्यात लगभग 23,000 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है। हमारा लक्ष्य 2029 तक रक्षा निर्यात में 50,000 करोड़ रुपये तक पहुँचना है। 
उन्होंने भारत में मजबूत रक्षा उद्योग बनाने में सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।उन्होंने आईआईटी मंडी के छात्रों से प्रौद्योगिकी समाधानों पर ध्यान केंद्रित करके इस विजन में योगदान देने का आह्वान किया।
देश को 2047 तक विकसित बनाने के लिए छात्रों से तकनीकी नवाचार में उत्कृष्टता हासिल करने का आग्रह करते हुए, रक्षा मंत्री ने उन्हें पहल, सुधार और परिवर्तन के सिद्धांतों का पालन करने की सलाह दी। श्री सिंह ने उन्हें ज्ञान की खोज में साहसी बनने और चुनौतियों का सामना करने के लिए दृढ़ रहने के लिए भी प्रेरित किया।