0 26 मंत्रियों ने भी शपथ ली, इनमें भाजपा के 14, जदयू के 8, चिराग के 2 मंत्री; एक मुस्लिम चेहरा
पटना। नीतीश कुमार ने गुरुवार को 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर देश की राजनीति में एक नया कीर्तिमान बनाया। गांधी मैदान में गुरुवार को हुए भव्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत कई बड़े भाजपा नेता मौजूद रहे। डिप्टी सीएम के रूप में सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा ने शपथ ली। वहीं 26 मंत्रियों ने भी शपथ ली। इनमें 14 बीजेपी कोटे से, 8 जदयू से, 2 लोजपा (R) से जबकि हम और कुशवाहा की पार्टी से 1-1 को मंत्री बनाया गया है। इस मंत्रिमंडल में एक मुस्लिम चेहरा भी शामिल है। जदयू ने जमा खान को फिर मंत्री बनाया है।
शपथ के बाद पीएम मोदी ने मंच से गमछा हिलाकर लोगों का अभिवादन किया। हरियाणा, असम, गुजरात, मेघालय, यूपी, नगालैंड, ओडिशा, दिल्ली, एमपी और राजस्थान के मुख्यमंत्री भी शपथ समारोह में शामिल हुए। मंच पर चिराग पासवान ने मांझी और जेपी नड्डा के पैर छूकर आशीर्वाद लिया।
नीतीश कैबिनेट में 13 नए चेहरों को मौका
नीतीश कैबिनेट में इस बार नए चेहरों को मौका दिया गया है। रामकृपाल यादव, श्रेयसी सिंह को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। चिराग की पार्टी से 2 विधायकों को मंत्री बनाया गया है। इसमें संजय सिंह भी शामिल हैं। संजय सिंह महुआ से चुनाव जीते हैं। उन्होंने लालू यादव के बेटे तेजप्रताप को हराया था।
शपथ लेने वाले 26 मंत्री
शपथ लेने वाले 26 मंत्रियों में सम्राट चौधरी, सुनील कुमार, विजय कुमार सिन्हा, मो० जमा खान, विजय कुमार चौधरी, संजय सिंह 'टाइगर, बिजेन्द्र प्रसाद यादव, अरुण शंकर प्रसाद, श्रवण कुमार, सुरेन्द्र मेहता, मंगल पाण्डेय, नारायण प्रसाद, डॉ० दिलीप जायसवाल, रमा निषाद, अशोक चौधरी, लखेन्द्र कुमार रौशन, लेशी सिंह, श्रेयसी सिंह, मदन सहनी, डॉ० प्रमोद कुमार, नितिन नवीन, संजय कुमार, राम कृपाल यादव, संजय कुमार सिंह, संतोष कुमार सुमन व दीपक प्रकाश शामिल हैं।
बिहार में ‘सुशासन बाबू’ के रूप में पहचान बनाए
नीतिश कुमार लगभग दो दशकों तक सत्ता में रहने के बाद इस चुनाव में वह अपनी सबसे कठिन राजनीतिक परीक्षा का सामना कर रहे थे। जातीय खानाजंगी और राजनीति के अपराधीकरण के लिए अक्सर चर्चा में रहने वाले बिहार प्रांत में ‘सुशासन बाबू’ के रूप में पहचान बनाने वाले और बिहार में अपनी स्वच्छ एवं ईमानदार छवि के कारण वह गठबंधन की राजनीति में एक मुख्य धुरी बने हुए हैं। हाल के समय में मीडिया से नीतीश से दूरी, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव द्वारा ‘अचेत मुख्यमंत्री’ कहे जाने और प्रशासन पर नौकरशाही के हावी होने के आरोपों के बावजूद बिहार के मतदाताओं ने उनके नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को इस बार एक ऐतिहासिक जनादेश दिया है। बिहार में जनादेश की बहार में ‘नीतीशे कुमार’ पर जनता ने एक बार फिर ऐतबार जता दिया। छह महीने पहले तक जहां नीतीश कुमार की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे थे और विपक्षी दल महागठबंधन मजबूत दिख रहा था, चुनाव नतीजों ने उनके खिलाफ तमाम अटकलें को हवा-हवाई साबित कर दिया। नीतीश कुमार ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह अब भी बिहार के राजनीतिक रंगमंच के सबसे दमदार और सरदार अदाकार हैं। राजग की इस बार की जीत सिर्फ सरकार बनाने के लिए नहीं, बल्कि बिहार की जनता की निरंतरता और स्थिरता की चाहत का प्रमाण है। जनता ने फिर से कहा है ,“बिहार में बहार है, नीतीशे कुमार हैं...”
नीतीश कुमार अपनी जनसभाओं, रैलियों में कहते , “2005 से पहले कुछ था... कोई काम किया है, ऊ लोग (राजद)....कोई शाम के बाद निकल पाता था... ।”