0 सरकार बोली- मामले को हाईलेवल पर देख रहे
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को त्योहारों और इमरजेंसी हालातों में प्राइवेट एयरलाइंस के हवाई किराए बढ़ाने को लेकर चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा कि यह एक बहुत गंभीर चिंता का विषय है। वरना, हम 32 पिटीशन पर विचार नहीं करते।
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सिविल एविएशन मिनिस्ट्री इस मुद्दे पर विचार कर रही है। इस पर जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने केंद्र सरकार और डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) को विचार करने और जवाब देने के लिए चार हफ्ते का समय दिया है।
यह मामला एक जनहित याचिका (पीआईएल) से जुड़ा है, जिसमें प्राइवेट एयरलाइंस के त्योहारों के समय अचानक किराया बढ़ाने और अतिरिक्त शुल्क वसूलने पर कंट्रोल के लिए नियम बनाने की मांग की गई है। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल कौशिक ने अदालत को बताया कि यह मामला आम जनता के हित से जुड़ा है। सरकार और संबंधित विभाग इसे हाईलेवल पर देख रहे हैं। मामले में अगली सुनवाई 23 मार्च को होगी।
याचिका में चेक-इन बैगेज समेत अन्य मुद्दे उठाए गए
एयरलाइंस ने इकोनॉमी क्लास में मुफ्त चेक-इन बैगेज की सीमा 25 किलो से घटाकर 15 किलो कर दी है। साथ ही, कई छिपे हुए चार्ज और डायनामिक प्राइसिंग के जरिए यात्रियों से ज्यादा पैसे वसूले जा रहे हैं। अभी किसी भी सरकारी संस्था के पास हवाई किराए पर सीधा कंट्रोल या सीमा तय करने का अधिकार नहीं है, जिससे एयरलाइंस मनमाने तरीके से कीमतें बढ़ा लेती हैं, खासकर त्योहार या इमरजेंसी के समय। सिविल एविएशन सेक्टर में पारदर्शिता और यात्रियों की सुरक्षा के लिए एक मजबूत और स्वतंत्र रेगुलेटर बनाया जाए, ताकि आम लोगों को मनमानी कीमतों और अतिरिक्त शुल्क से राहत मिल सके।
वॉट्सएप ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- निर्देशों का पालन करेंगे
नई दिल्ली। ग्लोबल टेक कंपनियों मेटा और वॉट्सएप ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वे कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) की प्राइवेसी और गाइडलाइंस को एडवरटाइजिंग से जुड़े डेटा शेयर करने के मामले में एनसीएलएटी के निर्देशों का पालन करेंगे। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और विपुल एम पंचोली की बेंच पिछले साल दिसंबर में नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) के निर्देशों के खिलाफ इन टेक कंपनियों की अपील पर सुनवाई कर रही थी। सीजेआई की सख्ती के बाद वॉट्सएप और मेटा ने सीसीआई के आदेशों को स्वीकार कर लिया। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने भरोसा दिया कि 16 मार्च 2026 तक प्राइवेसी पॉलिसी के सभी नियम लागू कर दिए जाएंगे। कंपनी ने इस संबंध में एनसीएलएटी के आदेश के खिलाफ दायर अपनी अंतरिम अर्जी वापस ले ली। कोर्ट ने अर्जी खारिज कर दी है। अब यूजर को विज्ञापन कंपनियों को डेटा शेयर करने का ऑप्शन देना होगा