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बस्तर में कई बड़े लीडर्स खुद को पुलिस के हवाले कर दिए हैं। पूर्व नक्सली हेमला भीमा उर्फ आकाश ने कलेक्टर एलेक्स पॉल के अगवा का सनसनीखेज खुलासा किया है..

सामवेत शिखर न्यूज़ वर्ष 2012 में देश को झकझोर देने वाले सुकमा कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनन के अपहरण कांड का 14 साल बाद सनसनीखेज खुलासा हुआ है। इस कांड को अंजाम देने वाले नक्सली नेता तथा केरलापाल एरिया कमेटी के तत्कालीन सचिव हेमला भीमा उर्फ आकाश ने पूरे घटनाक्रम की अंदरूनी कहानी उजागर करते हुए दावा किया है कि कलेक्टर से प्रताड़ित सरकारी कर्मियों की शिकायत पर ही उन्हें सबक सिखाने के लिए उनका अपहरण किया था।

25 लड़ाकों ने दिया था अंजाम

इस वारदात को नक्सलियों की स्थानीय एरिया कमेटी के 25 लड़ाकों ने ही अंजाम दिया दिया था। बाद में हिड़मा,सोनू और बसवाराजू की इस मामले हुई इंट्री ने इसे और हाई प्रोफाइल बना दिया था आकाश का दावा है कि उक्त दिवस पर कलेक्टर के यदि एसपी भी होते तो शायद उनकी साजिश सफल नहीं हो पाती। 21 अप्रैल 2012 को सुकमा जिले के केरलपाल के मांझीपारा में आयोजित जन समस्या निवारण शिविर से नक्सलियों ने दिन दहाड़े कलेक्टर का अपहरण कर लिया।

दो पीएसओ हो गए थे शहीद

इस दौरान कलेक्टर के साथ दो पीएसओ थे जो कि कलेक्टर को बचाने के दौरान वे शहीद हो गए थे। इस घटना ने छग ही नहीं, पूरे देश में नक्सल प्रभावित इलाकों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए थे। आकाश ने कहा कि कलेक्टर का अपहरण उनकी हत्या के लिए नहीं बल्कि उन्हें सिर्फ सबक सिखाने के लिए किया गया था।

कलेक्टर के पूरे कार्यक्रम की थी जानकारी

आकाश के मुताबिक, कलेक्टर के कार्यक्रम की पूरी जानकारी पहले से नक्सलियों के पास थी। सरकारी कर्मचारियों की शिकायतों और स्थानीय असंतोष को आधार बनाकर संगठन ने रणनीति तैयार की। उसने दावा किया कि कार्यक्रम स्थल से कुछ किमी पूर्व तक एसपी भी कलेक्टर के साथ थे लेकिन कुछ आवश्यक कार्य के कारण वे नीलावाया से सीधे सुकमा की ओर निकल गए। उनकी सुरक्षा में शामिल 15 जवान भी वापस सुकमा लौट गए।

इसके बाद कलेक्टर केवल दो पीएसओ के साथ शिविर में शामिल होने केरलापाल पहुंचे थे। आकाश का कहना है कि यदि एसपी और अतिरिक्त बल मौके पर मौजूद रहते, तो सुरक्षा घेरा मजबूत रहता और संभवत: अपहरण की घटना टल सकती थी।उसने बताया कि वे और उसकी टीम के सभी 25 सशस्त्र साथी शिविर में आमजनों के साथ बैठे थे।

दस मिनट में किया कलेक्टर का अपहरण

नक्सली नेता ने बताया कि कलेक्टर के अपहरण के लिए हमने कई बार रेकी की थी तथा पुलिस और प्रशासन के बीच कैसे हथियार के साथ सभा में बैठना है इसकी पूरी तैयारी की थी यही कारण है कि केरलापाल शिविर में पुलिस और प्रशासन को इस बात की भनक भी नहीं लगी कि यहां हथियार सहित हमारे साथी भी बैठे है यह बड़ी सुरक्षा चूक थी जिसने हमें इतना बड़ा अवसर प्रदान किया।

उन्होंने बताया कि पूरी टीम को मै लीड कर रहा था जैसे ही मैने इशारा किया वैसे ही हमारे साथी भीड़ से उठ खड़े हुए और सबसे पहले पीएसओ को नियंत्रित करने के लिए आगे बढ़े तब तक जवानों ने फायरिंग कर दी और जवाब में हमारे साथियों ने भी मोर्चा संभाला जिसमें जवान शहीद हो गए।इसके तुरंत बाद हमने कलेक्टर को पूंछा तो उन्होंने बताया कि मैं हूँ तो हम उन्हें लगभग 100 मीटर पैदल लेकर गए जहां हमारी बाइक खड़ी थी इसके बाद चार बाइक के काफिले में कलेक्टर को लेकर हम निकल गए इस पूरे घटना को हमने दस मिनट में अंजाम दिया।

दो दिनों तक बाइक में कलेक्टर को घूमाते रहे

सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि अपहरण के बाद दो दिनों तक कलेक्टर को बाइक से लगातार स्थान बदलते हुए घुमाया गया, ताकि सुरक्षा बलों को कोई सुराग न मिल सके। बाद में उन्हें सुकमा-बीजापुर सीमा पर स्थित ग्राम पामलूर और उससे लगे ग्राम कुमडतुंग में रखा गया। इन दुर्गम इलाकों को रणनीतिक रूप से इसलिए चुना गया क्योंकि वहां सुरक्षा बलों की पहुंच नहीं थी।

आकाश ने बताया कि अपहरण के बाद संगठन का शीर्ष नेतृत्व भी सक्रिय हो गया था। क्षेत्र में कुख्यात कमांडर हिड़मा के बाद नक्सल मिलिट्री चीफ बसवा राजू और भूपति उर्फ सोनू भी पहुंचे। इन्होंने भी कलेक्टर से कई बार बातचीत की थी और लोगो की शिकायतों के बारे में उन्हें बताया था।