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धर्म डेस्क। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को शीतला सप्तमी मनाई जाती है। इस दिन माताएं अपनी संतान के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं और शीतला माता की पूजा करती हैं। मान्यता है कि इस दिन माता को बासी भोजन का भोग लगाने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है और बच्चों को रोगों से रक्षा मिलती है।

शीतला सप्तमी के दिन क्या नहीं करना चाहिए

0 मान्यता है कि इस दिन घर में चूल्हा या गैस नहीं जलाना चाहिए और तवा चढ़ाना वर्जित माना जाता है।

0 शीतला सप्तमी के दिन गर्म खाना न बनाना चाहिए और न ही गर्म भोजन करना चाहिए।

0 महिलाओं को इस दिन कढ़ाई, बुनाई या सिलाई जैसे कार्य करने से बचना चाहिए।

0 पूजा के समय माता को गर्म भोजन का भोग नहीं लगाना चाहिए और पूजा से पहले भोजन नहीं करना चाहिए।

0 यदि घर में किसी को चेचक या त्वचा संबंधी बीमारी हो तो इस दिन व्रत या पूजा करने से परहेज करने की सलाह दी जाती है।

0 इस दिन बाल धोने से भी बचना चाहिए।

0 शीतला सप्तमी पर क्या करना चाहिए

0 सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ और पवित्र वस्त्र धारण करें।

0 शीतला माता की पूजा तक व्रत रखने का नियम माना जाता है।

0 माता को चढ़ाने वाला भोजन एक दिन पहले ही बनाकर रखा जाता है, क्योंकि उन्हें बासी भोजन का भोग लगाया जाता है।

0 मीठे चावल, हलवा-पूरी और गुलगुले माता का प्रिय प्रसाद माने जाते हैं।

0 शाम के समय विधि-विधान से पूजा कर माता को भोग लगाना शुभ माना जाता है।

0 भोग लगाने के बाद वही प्रसाद परिवार के सभी सदस्यों के साथ ग्रहण करना चाहिए।

शीतला सप्तमी की धार्मिक मान्यता

पौराणिक कथा के अनुसार एक बार  शीतला माता किसी स्थान से गुजर रही थीं, तभी किसी ने उन पर गर्म चावल का पानी डाल दिया जिससे उन्हें पीड़ा हुई। उसी समय एक गरीब कुम्हारन ने उन्हें अपने घर बुलाकर ठंडी चीजें और रात का बचा हुआ भोजन खिलाया।

उससे माता की पीड़ा शांत हुई। तभी से यह परंपरा मानी जाती है कि शीतला माता को बासी और ठंडा भोजन ही भोग में चढ़ाया जाता है।

मान्यता है कि माता शीतला बच्चों को चेचक और अन्य रोगों से बचाने वाली देवी मानी जाती हैं, इसलिए इस दिन किया गया व्रत परिवार में सुख, शांति और स्वास्थ्य का आशीर्वाद देता है।