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नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में प्रस्तावित 53.47 लाख करोड़ रुपये के व्यय के लिए समेकित निधि से सरकार को धन के भुगतान के लिए अधिकृत करने वाले विनियोग विधेयक (नंबर 2), 2026 को लोकसभा में बुधवार को पारित कर दिया गया।

इससे पहले सदन ने कई मंत्रालयों और विभागों से संबंधित अनुदान मांगों को एक साथ बिना चर्चा के स्वीकृति प्रदान की। रेलवे तथा कृषि मंत्रालयों से संबंधित अनुदान मांगों पर लोकसभा में तथा ग्रामीण विकास मंत्रालय की अनुदान मांगों पर राज्यसभा में विस्तृत चर्चा हुई थी और मंत्रियों के जवाब के बाद उन्हें पारित किया गया था।

कृषि मंत्रालय से संबंधित अनुदान मांगों को सदन की मंजूरी मिलने के बाद अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि शेष मंत्रालयों से संबंधित अनुदानों की बकाया मांगों के संबंध में अनेक कटौती प्रस्ताव मिले हैं। उन्होंने "समय के अभाव के कारण" सभी कटौती प्रस्तावों को एक साथ मतदान के लिए रखा। सदन ने सभी कटौती प्रस्तावों को ध्वनिमत से नामंजूर कर दिया। इसके बाद सदन ने शेष मंत्रालयों की अनुदान मांगों को एक साथ ध्वनिमत से पारित किया।

अंत में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने तत्संबंधी विनियोग विधेयक को सदन की मंजूरी के लिए पेश किया और उसे भी सदन ने ध्वनिमत से पारित कर दिया।

विनियोग विधेयक के पारित होने के साथ ही वर्ष 2026-27 के बजट को पारित करने का दूसरा चरण पूरा हो गया है। इसमें सरकार को पूरे वित्त वर्ष के लिए बजट प्रावधानों के अनुसार खर्च करने की लोकसभा से अनुमति मिल गयी है। वित्त संबंधी विधेयक होने के कारण इसके लिए राज्यसभा की मंजूरी अनिवार्य नहीं है।

तीसरे चरण में अब वित्त विधेयक 2026 पर चर्चा होगी और उसे पारित किया जायेगा, और उसके आधार पर पहली अप्रैल से शुरू होने वाले कर प्रस्ताव लागू किये जायेंगे।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक फरवरी 2026 को संसद में बजट पेश किया था जिसमें 53,47,315 करोड़ रुपये के व्यय का अनुमान लगाया गया है जो चालू वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान से 7.7 प्रतिशत अधिक है। वर्ष 2026-27 के बजट में कुल प्राप्तियां (कर्ज को छोड़कर) 36,51,547 करोड़ रुपये है।

अगले वित्त वर्ष में जीडीपी में वर्तमान कीमतों पर 10 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है और इसके आधार पर राजस्व घाटा जीडीपी के 1.5 प्रतिशत और राजकोषीय घाटा 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान में राजकोषीय घाटा 4.4 प्रतिशत रहने की संभावना व्यक्त की गयी है। संसद का बजट सत्र दो अप्रैल तक निर्धारित है।