0 जबरन और प्रलोभन से अवैध धर्मांतरण पर आजीवन कारावास तक का कड़ा प्रावधान
0 प्रक्रिया का पालन नहीं करने पर धर्म परिवर्तन को अवैध और शून्य माना जाएगा
रायपुर। विधानसभा बजट सत्र के 14वें दिन गुरुवार को गृह मंत्री विजय शर्मा ने अवैध धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए कड़े प्रावधानों वाला छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026 सदन में पेश किया। विधेयक पर चर्चा के बाद इसे सदन में ध्वनिमत से पास कर दिया गया। विधेयक पास होने के बाद भाजपा सदस्यों ने सदन में जय श्रीराम के नारे लगाए। यह विधेयक पूर्व में लागू धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम-1968 का स्थान लेगा और इसमें सजा एवं प्रक्रिया दोनों को अधिक सख्त बनाया गया है। इसमें जबरन और प्रलोभन से अवैध धर्मांतरण पर आजीवन कारावास तक का कड़ा प्रावधान है।
छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 छत्तीसगढ़ राज्य में वर्तमान में लागू छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्रय अधिनियम 1968 का स्थान लेगा। छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्रय अधिनियम 1968 में धर्मातरण उपरांत मात्र जिला मजिस्ट्रेट को सूचना देना प्रावधानित है। छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्रय अधिनियम 1968 में जबरन धर्मांतरण को एक संज्ञेय एवं जमानतीय अपराध बनाया गया है। जबरन धर्मांतरण के लिए साधारण दण्ड का प्रावधान है।
प्रस्तुत विधेयक में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ की भौगोलिक स्थिति, सामाजिक, आर्थिक परिस्थिति एवं समय बीतने के साथ समाज में प्रौद्योगिकी तथा संचार के साधनों के विकास के कारण एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तन के लिए बल प्रयोग, लालच, कपटपूर्ण रीति को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने के लिए प्रचलित छत्तीसगढ़ धर्म स्वातन्त्रय अधिनियम 1968 के प्रावधान वर्तमान परिदृश्य में अपर्याप्त हो जाने से एक व्यापक कानून बनाना आवश्यक हो गया है।
नए कानून में स्पष्ट किया गया है कि कोई भी व्यक्ति प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रलोभन, मिथ्या प्रस्तुतीकरण, महिमामंडन या डिजिटल माध्यमों के जरिए धर्मांतरण के लिए प्रेरित नहीं कर सकेगा। अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों के लिए भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत सक्षम प्राधिकारी को सूचना देना अनिवार्य किया गया है।
विधेयक के अनुसार धर्म परिवर्तन के इच्छुक व्यक्ति को निर्धारित प्रारूप में जिला मजिस्ट्रेट या सक्षम प्राधिकारी के समक्ष घोषणा पत्र देना अनिवार्य होगा। घोषणा पत्र प्राप्त होने के बाद संबंधित प्राधिकारी इसे अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित करेगा और स्थानीय पुलिस, तहसीलदार व ग्राम पंचायत को इसकी सूचना दी जाएगी। प्रक्रिया का पालन नहीं करने पर धर्म परिवर्तन को अवैध और शून्य माना जाएगा।
छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक- 2026 में छह अध्यायों में 31 बिंदुओं में वैध-अवैध धर्मांतरण को परिभाषित करते हुए निहित सजा और जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। विधेयक में अवैध तरीके से धर्मांतरण कराने पर 7 से 10 साल तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है। यदि पीड़ित नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित है, तो सजा 10 से 20 साल तक की जेल और कम से कम 10 लाख रुपये जुर्माना का प्रावधान है।
सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में सजा और कठोर होगी
सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में सजा और कठोर होगी, जिसमें 10 साल से लेकर आजीवन कारावास और कम से कम 25 लाख रुपये जुर्माना का प्रावधान किया गया है। विधेयक के तहत आने वाले अपराध संज्ञेय और अजमानतीय होंगे, मामलों की सुनवाई विशेष न्यायालय में की जाएगी। विधेयक के मुताबिक, महिमामंडन कर, झूठ बोलकर, बल, अनुचित प्रभाव, प्रलोभन, दबाव, मिथ्या जानकारी या कपटपूर्ण तरीके से धर्म परिवर्तन कराना अवैध माना जाएगा और प्रतिबंधित होगा।
स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने पर सक्षम प्राधिकारी को पहले सूचना देनी होगी
यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत जिला मजिस्ट्रेट या सक्षम प्राधिकारी को पहले सूचना देनी होगी. प्रस्तावित धर्मांतरण की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी, और 30 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज कराने का प्रावधान होगा।
पैतृक धर्म में वापसी को धर्मांतरण नहीं माना जाएगा
विधेयक में प्रलोभन, प्रपीड़न, सामूहिक धर्मांतरण और डिजिटल माध्यम से धर्मांतरण जैसे शब्दों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि पैतृक धर्म में वापसी को धर्मांतरण नहीं माना जाएगा।
फादर, प्रीस्ट, मौलवी को सक्षम प्राधिकारी के सामने घोषणा पत्र प्रस्तुत करना होगा
एक धर्म का व्यक्ति अगर दूसरे धर्म में शादी करता है, तो ऐसे विवाह को सम्पन्न करवाने वाले फादर, प्रीस्ट, मौलवी या ऐसे विवाह को करवाने वाला जिम्मेदार व्यक्ति को विवाह की तारीख से 60 दिन पहले निर्धारित प्रारूप में सक्षम प्राधिकारी के सामने घोषणा पत्र प्रस्तुत करना होगा। सक्षम प्राधिकारी ये तय करेगा कि विवाह कहीं धर्मांतरण के उद्देश्य से तो नहीं किया जा रहा है, ऐसा हुआ तो अवैध घोषित किया जा सकेगा। केवल विवाह के उद्देश्य से किया गया धर्मांतरण अवैध माना जाएगा और विवाह स्वत: धर्मांतरण का आधार नहीं बनेगा।
सरकार का कहना है कि इस विधेयक का उद्देश्य जबरन और अवैध धर्मांतरण पर प्रभावी रोक लगाना तथा धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ी प्रक्रियाओं को पारदर्शी और वैधानिक बनाना है।