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रायपुर। छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026 विधानसभा में चर्चा के बाद सर्वसम्मति से पारित हो गया। विधेयक में 6 अध्याय और 31 बिंदु शामिल हैं, जिसमें कड़े प्रावधानों के साथ इसे कानून का रूप दिया जाएगा। विधेयक पर बोलते हुए उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने विधेयक पर विपक्ष के चर्चा में हिस्सा नहीं लेने पर कहा कि कांग्रेस वोट बैंक राजनीति ही करती रही है। उन्हें फर्क नहीं पड़ता देश टूट जाए। और अक्सर भारतीय संस्कृति-परंपरा के मुद्दें पर चर्चा करने से भाग जाती है, पलायन कर जाती है। आज इस ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण बिल पर कांग्रेस सदन से पलायन कर गई।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस को सुकमा के एसपी और बस्तर कमिश्नर ने पत्र लिखा था। तात्कालीन सरकार को बस्तर में धर्मांतरण की स्थिति की जानकारी दी थी, लेकिन कांग्रेस की सरकार ने तब कोई संज्ञान नहीं लिया था और आज बस्तर में मौजूदा स्थिति यह है कि समाज का विवाद प्रशासन तक पहुंच गया है। ऐसे में विधिक प्रावधानों की आवश्यकता पड़ती है। कड़े कानून की जरूरत पड़ती है। हम इस पर सदन में चर्चा करने बैठे हैं कि छत्तीसगढ़ में कैसे धर्मांतरण रोका जाए तो कांग्रेस चर्चा करने की बजाए पलायन कर जाती है। मैं इस विधेयक के साथ यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि संविधान में धर्म की स्वतंत्रता तो है, परंतु पब्लिक ऑर्डर उससे ऊपर है और पब्लिक ऑर्डर संभालने के लिए कोई भी राज्य कानून बना सकता है।

विजय शर्मा ने कहा, हमारा देश किसी कानून से सेक्युलर नहीं है, परंतु हमारा देश प्रारंभ से ही सेकुलर है। चर्चा में बहुत सी बातें निकलकर सामने आई है. साथी सदस्यों ने बताया कि धर्मांतरण करने वाले लोग घात लगाकर बैठे हैं कि अगर कोई परेशानी में आए तो उसके मदद के बहाने उसका धर्म परिवर्तन कर देते हैं, लेकिन हम ऐसा अब होने नहीं देंगे।

उन्होंने कहा कि एक और बात 1968 में मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार में धर्म स्वतंत्रता से संबंधित प्रावधान लाए थे। वर्तमान में यही प्रावधान छत्तीसगढ़ में लागू है और अब नया कानून जो बनेगा यह उसी का विस्तारीकरण है। बस यह विस्तारीकरण तात्कालिक परिस्थितियों के अनुसार प्रावधान का स्पष्टीकरण है। यहां एक जानकारी और देना चाहूंगा कि जो चकित करता है। आश्चर्य होता है कि बस्तर के कई जिले जैसे कोंडागांव, बीजापुर, कांकेर में 2004 से 2021 तक धर्मांतरण को लेकर एक भी सूचना नहीं है, जबकि वहां बड़ी संख्या में धर्मांतरण हो गए हैं. इस बिगड़ी स्थिति में नया कानून नहीं लेंगे तो समाज को हम क्या मुंह दिखाएंगे ?

गृहमंत्री शर्मा ने कहा कि आज बस्तर में धर्मांतरण करने वालों ने वर्ग संघर्ष उत्पन्न कर दिया है। यह नक्सलवाद से भी बड़ी समस्या है। कांग्रेस को कभी छत्तीसगढ़ की संस्कृति की चिंता नहीं थी न उन्हें बस्तर से मतलब है न सरगुजा की समस्या से, उन्हें सिर्फ अपने वोट बैंक से मतलब है, जो घुसपैठ और धर्मांतरण में खोजते हैं। वास्तव में यह कानून किसी भी धर्म में कोई परिवर्तन ना हो इसके लिए लाया गया है। इस प्रावधान में यह प्रवधान भी है कि अगर नियमानुसार धर्म परिवर्तन नहीं हुआ है तो वे धार्मिक अनुष्ठान नहीं कर पाएंगे।

उन्होंने कहा कि भारत की जहां-जहां ताकत बढ़ती है कांग्रेसियों को दिक्कत होती है वह विरोध करते हैं। छत्तीसगढ़ का समाज कांग्रेस को कभी माफ नहीं करेगी, क्योंकि कांग्रेस आज बोलने की स्थिति में नहीं है। बस्तर में जो वर्ग संघर्ष की स्थिति में है उसके पीछे कांग्रेस दिखाई पड़ती है। नक्सलवाद से बड़ी इस समस्या का समाधान जरूरी था और इसका हल अब जब विधेयक बनने जा रहा है। शर्मा ने कहा कि माओवाद तो बस्तर में वर्ग या सामाजिक संघर्ष खड़ा नहीं कर सका, लेकिन धर्मांतरण ने सामाजिक-वर्ग संघर्ष को बढ़ा दिया है। यह एक नई बड़ी समस्या है। इस समस्या को खत्म करना जरूरी है। 

गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि आदिवासी संस्कृति को नष्ट करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। यह विधेयक भारत-छत्तीसगढ़ की आदिम संस्कृति-परंपरा की रक्षा करेगी। मुझे खुशी है कि आज चैत्र नवरात्रि और नव वर्ष के मौके पर यह ऐतिहासिक विधेयक सदन में पास हुआ। यह हम सबके लिए गौरव की बात है। मैं इस अवसर पर सभी को बहुत-बहुत बधाई और धन्यवाद देता हूं।